जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और उनकी पत्नी पायल के बीच लंबे समय से चल रहा वैवाहिक विवाद आखिरकार खत्म हो गया है। सुप्रीम कोर्ट ने दोनों के आपसी सहमति से तलाक लेने के फैसले पर मुहर लगा दी है। इसके साथ ही दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के खिलाफ दर्ज सभी केस वापस लेने पर भी सहमति जताई है। दोनों करीब 17 सालों से अलग रह रहे थे।
इससे पहले वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने उच्चतम न्यायालय को बताया कि दोनों पक्षों ने आजादी का रास्ता चुना है। इसके बाद जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए इस मामले का निपटारा कर दिया।
1994 में हुई थी शादी
इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के मुताबिक उमर अब्दुल्ला और पायल की पहली मुलाकात दिल्ली के मशहूर ओबेरॉय होटल में काम करने के दौरान हुई थी। काम के दौरान दोनों का प्यार परवान चढ़ा और सितंबर 1994 में दोनों शादी के बंधन में बंध गए। दोनों के 2 बेटे भी हैं। हालांकि रिश्तों में अनबन के बाद दोनों 2009 से ही अलग रहने लगे। इसके बाद 2011 में उमर अब्दुल्ला ने अलग होने की घोषणा सार्वजनिक रूप से कर दी।
कानूनी लड़ाई लड़ रहे थे अब्दुल्ला
इसके बाद तलाक की अर्जी लेकर उमर अब्दुल्ला लंबे समय से कानूनी लड़ाई लड़ रहे थे। उमर अब्दुल्ला ने शुरुआत में अपनी पत्नी से क्रूरता के आधार पर तलाक मांगा था। हालांकि फैमिली कोर्ट ने इस दलील को खारिज कर दिया और कहा कि वे क्रूरता के आरोपों को साबित करने में नाकाम रहे। इसके बाद फैमिली कोर्ट के फैसले के खिलाफ उमर अब्दुल्ला हाईकोर्ट गए। लेकिन दिसंबर 2023 में दिल्ली हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने भी फैमिली कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा और अर्जी खारिज कर दी।
इस दौरान दिल्ली हाईकोर्ट ने उमर अब्दुल्ला को पत्नी पायल को हर महीने 1.5 लाख रुपये का गुजारा भत्ता देने और उनके बेटे की शिक्षा के लिए हर महीने 60,000 रुपये देने का निर्देश दिया था। हाईकोर्ट के रुख के बाद उमर अब्दुल्ला ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। अब सुप्रीम कोर्ट ने तलाक को मंजूरी दे दी।