सुप्रीम कोर्ट के जज उज्जल भुयान ने कॉलेजियम सिस्टम पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा है कि अच्छा काम करने वाले जजों के साथ यह कॉलेजियम सिस्टम अन्याय कर रहा है। अप्वाइंटमेंट की वजह न बताकर कॉलेजियम सिस्टम ज्यूडिशियरी के साथ गलत कर रहा। जस्टिस भुयान ने कहा, ”कारण को न बातकर आप असली में उन जजों के साथ गलत कर रहे, जिन्होंने वास्तव में अच्छा काम किया है।”
लाइव लॉ के अनुसार, जस्टिस उज्जल भुयान का कहना है कि इससे आप ऐसे लोगों को ज्यूडिशियरी के अदंर आने दे रहे हैं, जो बाद में लोगों के एक ग्रुप को चीटियां और यह-वह कहेंगे। ऐसे लोगों को रोकने के लिए कुछ तो चर्चा होने चाहिए। यह पूरी तरह से गैर-संवैधानिक है। रोकने के लिए कुछ कारण बताए जाने चाहिए। वजह बताने में नुकसान आखिर क्या है।
सुप्रीम कोर्ट के जज ने कॉलेजियम सिस्टम की ट्रांसपेरेंसी पर भी सलाह दी। उन्होंने कहा, ”जजों का प्रमोशन और ट्रांसफर पर बातचीत गोपनीय रहती है। किसी सिफारिश को खारिज करने की वजह शायद ही कभी खुलासा किया जाता हो। लागू किए गए क्राइटेरिया को किसी भी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध इंस्ट्रूमेंट को कोडिफाई नहीं किया गया है।”
बता दें कि कॉलेजियम सिस्टम पर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं। ज्यूडिशियरी और सरकार के बीच मतभेद बने हुए हैं। कॉलेजियम एक ऐसा सिस्टम है, जिसके तहत सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ जज हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में जजों की नियुक्ति की सिफिारिश करते हैं। आलोचकों का कहना है कि इस प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी है और नियुक्तियों के कारण सार्वजनिक नहीं किए जाते। वहीं, न्यायपालिका का तर्क है कि कॉलेजियम व्यवस्था न्यायपालिका की स्वतंत्रता बनाए रखने के लिए जरूरी है और इससे कार्यपालिका का गलत हस्तक्षेप रोका जा सकता है।