भारत मसालों का देश है और यहां उगाई जाने वाली मिर्चें अपने तीखे स्वाद, रंग और खुशबू के लिए दुनियाभर में पहचान रखती हैं। देश के अलग-अलग राज्यों में ऐसी कई किस्में उगाई जाती हैं, जिनका तीखापन आम मिर्चों से कई गुना ज्यादा होता है। इनमें सबसे चर्चित नाम भूत जोलोकिया का है, जिसका इस्तेमाल भारतीय सेना ने भीड़ नियंत्रण के लिए बनाए गए चिली ग्रेनेड में भी किया था। आइए जानते हैं भारत की पांच सबसे तीखी मिर्चों के बारे में।
1. भूत जोलोकिया
भूत जोलोकिया भारत की सबसे प्रसिद्ध और बेहद तीखी मिर्चों में शामिल है। इसकी खेती मुख्य रूप से असम, नागालैंड, मणिपुर और अरुणाचल प्रदेश में होती है। वर्ष 2007 में इसे गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में दुनिया की सबसे तीखी मिर्च का दर्जा मिला था। इसका तीखापन 10 लाख से अधिक स्कोविल हीट यूनिट (SHU) तक पहुंच सकता है। इसका उपयोग अचार, मसालों, पेपर स्प्रे और भारतीय सेना के चिली ग्रेनेड में भी किया गया है।
2. कांथारी मिर्च
केरल और गोवा में उगाई जाने वाली कांथारी मिर्च आकार में छोटी होती है, लेकिन इसका तीखापन काफी अधिक होता है। इसका इस्तेमाल चटनी, अचार और स्थानीय व्यंजनों में बड़े पैमाने पर किया जाता है।
3. सिरारखोंग हाथेई मिर्च
मणिपुर की यह खास मिर्च अपने अनोखे स्वाद और तीखेपन के लिए जानी जाती है। इसकी विशिष्ट पहचान के कारण इसे भौगोलिक संकेतक (GI) टैग भी प्राप्त है, जिससे इसकी गुणवत्ता और क्षेत्रीय पहचान को मान्यता मिली है।
4. गुंटुर सन्नम मिर्च
आंध्र प्रदेश की गुंटुर सन्नम मिर्च अपने गहरे लाल रंग और तेज स्वाद के कारण देश-विदेश में लोकप्रिय है। मसालों, अचार और मिर्च पाउडर बनाने में इसका व्यापक उपयोग होता है और इसका निर्यात भी बड़े पैमाने पर किया जाता है।
5. ब्यादगी मिर्च
कर्नाटक की ब्यादगी मिर्च का तीखापन अपेक्षाकृत कम होता है, लेकिन इसका चमकदार लाल रंग और सुगंध इसे खास बनाते हैं। इसी वजह से इसका उपयोग लाल मिर्च पाउडर और विभिन्न मसाला मिश्रणों में किया जाता है।
मिर्च के तीखेपन को स्कोविल हीट यूनिट (Scoville Heat Unit – SHU) के आधार पर मापा जाता है। किसी मिर्च का SHU जितना अधिक होता है, वह उतनी ही ज्यादा तीखी मानी जाती है। जहां सामान्य भारतीय मिर्च का तीखापन लगभग 5 हजार से 50 हजार SHU के बीच होता है, वहीं भूत जोलोकिया 10 लाख SHU से भी अधिक तीखी हो सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार अत्यधिक तीखी मिर्च का सेवन सीमित मात्रा में ही करना चाहिए। मिर्च काटने के बाद हाथ अच्छी तरह धोना चाहिए और हाथों से आंखों को छूने से बचना चाहिए। यदि मिर्च का तीखापन ज्यादा महसूस हो तो पानी पीने की बजाय दूध या दही लेना अधिक प्रभावी माना जाता है। बच्चों और पेट संबंधी समस्याओं से जूझ रहे लोगों को ऐसी मिर्चों का सेवन सावधानी के साथ करना चाहिए।