महिला पहलवानों द्वारा लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोपों में अदालत से बाइज्जत बरी होने के बाद भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह की पहली प्रतिक्रिया सामने आई है। अदालत के फैसले का स्वागत करते हुए बृजभूषण शरण सिंह ने कहा है कि उन्होंने हमेशा से यही कहा था कि सारे आरोप गलत है। बृजभूषण सिंह ने बताया कि उन्होंने पहले दिन ही कहा था कि अगर एक भी आरोप सही साबित हुआ तो वे खुद ही फांसी पर लटक जाएंगे।
कोर्ट का फैसला आने के बाद बृजभूषण सिंह ने कहा, “माननीय जज साहब ने कहा कि बृजभूषण सिंह और विनोद तोमर को बाइज्जत बरी किया जाता है। मैं यही कहना चाहता हूं कि मैंने पहले दिन से ही कहा था कि अगर मेरे खिलाफ एक भी आरोप साबित हो जाता है, तो मैं खुद ही फांसी पर लटक जाऊंगा।” उन्होंने कहा कि कोर्ट के फैसले से उनके समर्थक बेहद खुश हैं। उन्होंने आगे कहा, “मेरी बात सही साबित हुई। मुझे नहीं पता सामने वाले के बारे में पता नहीं था। मेरी पहली प्रतिक्रिया यही थी कि मैं फांसी पर लटक जाऊंगा, लेकिन आज खुशी का दिन है।”
राउज एवेन्यू कोर्ट ने किया बरी
इससे पहले दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट के अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (ACJM) अश्विनी पंवार की अदालत ने सोमवार को बृजभूषण शरण सिंह और WFI के पूर्व सहायक सचिव विनोद तोमर को बरी करने का आदेश सुनाया। इसके साथ ही लगभग 2 साल से चल रहा यह हाई-प्रोफाइल बंद हो गया है। इससे पहले कोर्ट ने दोनों की लिखित दलीलें जमा करने का निर्देश देकर 2 जुलाई को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।
बृजभूषण शरण सिंह पर क्या थे आरोप
बृजभूषण शरण सिंह पर WFI के अध्यक्ष पद पर रहते हुए महिलाओं के साथ यौन उत्पीड़न के आरोप लगे थे। कई महिला पहलवानों ने इन पर अनुचित तरह से छूने का भी आरोप लगाया था। पूरा मामला तब सामने आया जब छह महिला पहलवानों ने बृजभूषण शरण सिंह पर कई सालों तक महिला एथलीटों का यौन उत्पीड़न करने का गंभीर आरोप लगाया था। इन आरोपों के बाद 2023 में दिल्ली के जंतर-मंतर पर पहलवानों ने महीनों तक धरना-प्रदर्शन किया था। पहलवान बृजभूषण शरण सिंह की गिरफ्तारी और उन्हें WFI अध्यक्ष पद से हटाने की मांग कर रहे थे।
विवाद बढ़ने पर उत्तर प्रदेश की कैसरगंज सीट से तत्कालीन भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह को कुश्ती महासंघ के शीर्ष पद से हटा दिया गया था। वहीं उनके करीबी और WFI के सहायक सचिव विनोद तोमर को भी निलंबित कर दिया गया था। केंद्रीय खेल मंत्रालय द्वारा पहलवानों को आरोपों की जांच के लिए एक समिति गठित करने का आश्वासन दिए जाने के बाद विरोध प्रदर्शन को कुछ समय के लिए रोक दिया गया था। हालांकि, एथलीटों ने आरोप लगाया कि कोई सार्थक कार्रवाई नहीं की गई, जिसके बाद अप्रैल 2023 में पहलवानों ने फिर से अपना आंदोलन शुरू कर दिया था।
बृजभूषण शरण सिंह पर भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 354 (महिला की लज्जा भंग करने के इरादे से हमला या आपराधिक बल का प्रयोग), 354A (यौन उत्पीड़न) और 506(1) (आपराधिक धमकी) के तहत आरोप तय किए गए थे। वहीं विनोद तोमर पर धमकी देने के भी आरोप थे।