बांकीपुर में हार की वजह खोज रही भाजपा, सम्राट और संजय की बैठक में ढाई घंटे मंथन, क्या हुआ?

बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव में मिली करारी हार पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) में मंथन शुरू हो गया है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी की अध्यक्षता में बुधवार को समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इसमें मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की मौजूदगी में बांकीपुर हार के कारणों का मंथन किया गया। बैठक में उपचुनाव में लगे पार्टी के नेताओं आदि से फीडबैक लिया गया।

यह बैठक पटना स्थित प्रदेश भाजपा कार्यालय में लगभग ढाई घंटे तक चली। इसमें भाजपा के मंत्री, पटना के विधायक, सांसद और पार्टी के प्रदेश पदाधिकारी सहित चुनावी ड्यूटी में लगे नेता मौजूद रहे।

लगभग तीन दशक तक भाजपा का गढ़ रहे बांकीपुर के उपचुनाव में पार्टी को किन वजहों से हार का सामना करना पड़ा, इस पर बैठक में विस्तार से चर्चा की गई। बताया जा रहा कि प्रदेश नेतृत्व ने बांकीपुर चुनाव में लगे नेताओं से जाना कि चुनावी तैयारी में कहां कमी रह गई थी और इसके पीछे क्या कारण रहे।

रामकृपाल ने बताया बैठक में क्या चर्चा हुई

बिहार भाजपा की बैठक में शामिल होकर निकले सम्राट सरकार में मंत्री रामकृपाल यादव ने मीडिया से बातचीत में कहा कि बांकीपुर में हार की विस्तार से समीक्षा की जाएगी। वहां की जनता हमारी है। जहां भी कमी रही, वह पता लगयाा जाएगा। उन्होंने कहा कि बांकीपुर से चुनाव जीतने वाले जन सुराज पार्टी के प्रशांत किशोर ने 3 महीने में बदलाव दिखने का दावा किया है। उनसे भाजपा हर दिन काम का हिसाब पूछेगी।

नितिन नवीन के गढ़ को प्रशांत किशोर ने छीना

पटना शहर की बांकीपुर विधानसभा सीट पर 30 जुलाई को हुए उपचुनाव के नतीजे बीते 3 अगस्त को जारी किए गए। इस सीट पर जन सुराज पार्टी के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने भाजपा के कैंडिडेट नीरज कुमार सिन्हा को 19324 वोटों के अंतर से हरा दिया। बीते 30 सालों में भाजपा पहली बार यह सीट हारी है।

इससे पहले लगातार पांच बार भाजपा के मौजूदा राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन बांकीपुर से विधायक रहे। इससे पहले चार बार उनके पिता नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा यहां से जीतते रहे। 2008 के परिसीमन से पहले बांकीपुर का नाम पटना पश्चिमी सीट था।

भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन के राज्यसभा जाने के बाद यह सीट खाली हुई और उपचुनाव में पार्टी ने एक साधारण कार्यकर्ता नीरज सिन्हा को टिकट दिया था। उनके लिए प्रचार में नितिन ने बिहार भाजपा की पूरी टीम उतार दी थी। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से लेकर एनडीए के कई मंत्री, सांसद, विधायकों और वरीय नेताओं ने नीरज के समर्थन में प्रचार किया था। हालांकि, वह भाजपा का गढ़ बचाने में असफल साबित हुए। बांकीपुर में भाजपा की हार की चर्चा बिहार ही नहीं बल्कि देश भर में हो रही है।

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