चंद दिनों पहले ही नीट पेपर लीक के खिलाफ दिल्ली में एक महीने से अधिक समय तक आंदोलन करने वाली कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) झारखंड में छात्रों के प्रदर्शन को लेकर सक्रिय नजर नहीं आ रही है। सोमवार को हुए ‘विधानसभा घेराव’ को लेकर जहां रांची में जमकर हंगामा हुआ तो दूसरी तरफ सीजेपी के नेताओं ने इस पर चुप्पी साधे रखी। हालांकि, अभिजीत दीपके ने जरूर ‘रस्म अदायगी’ कर दी, लेकिन पार्टी के दूसरे नेता जंतर-मंतर पर बल प्रयोग को लेकर केंद्र सरकार को घेरने में ही व्यस्त रहे।
जेपीएससी-जीएसएससी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी के खिलाफ 17 दिनों से आंदोलन कर रहे हजारों छात्रों ने सोमवार को विधानसभा घेराव का ऐलान किया था। सुबह करीब 11 बजे छात्र विधानसभा की ओर निकल पड़े और एक के बाद एक बैरिकेड को पार करते हुए विधानसभा की ओर बढ़ गए। पुलिस प्रशासन की ओर से लगाए गए कंटीले तार और पानी की बौछार भी उन्हें रोक नहीं पाई। बाद में पुलिस ने हल्का बलप्रयोग करके छात्रों को खदेड़ने की कोशिश की।
सीजेपी ने साधी चुप्पी, अभिजीत दीपके क्या बोले
नीट छात्रों के लिए दिल्ली में आंदोलन करके सरकार को केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के लिए झुकाने वाली सीजेपी झारखंड आंदोलन पर सोमवार को चुप्पी साधे नजर आई। यह खबर लिखे जाने तक सौरभ दास और आशुतोष रांका जैसे तेज तर्रार प्रवक्ताओं के सोशल मीडिया हैंडल्स पर भी झारखंड के छात्रों के समर्थन में सुबह से कुछ नहीं लिखा गया था। ना तो छात्रों से किसी तरह की अपील दिखी और ना ही सरकार के लिए। हालांकि, सीजेपी के संस्थापक और राष्ट्रीय संयोजक अभिजीत दीपके ने जरूर रस्म अदायगी कर दी। उन्होंने देवेंद्र नाथ महतो के मार्च में शामिल होने के वीडियो को शेयर करते हुए अंग्रेजी में लिखा, ‘झारखंड के प्रदर्शनकारी छात्रों के साथ एकजुटता।’
कॉकरोच जनता पार्टी के मुख्य एक्स हैंडल पर झारखंड आंदोलन को लेकर कुछ नहीं लिखा गया। वहीं, सीजेपी के सह संयोजक आशुतोष रांका भी चुप्पी साधे रहे। सौरभ दास के हैंडल से कई ट्वीट/रीट्वीट किए गए, लेकिन इनमें से अधिकतर में जंतर-मंतर पर हुए बल प्रयोग को लेकर केंद्र सरकार और गृहमंत्री अमित शाह पर निशाना साधा गया था।
अभिजीत दीपके समेत बड़े नेता झारखंड नहीं पहुंचे, प्रतिनिधिमंडल को भेजा गया
रांची में जब से छात्रों का आंदोलन शुरू हुआ है, तब से अभिजीत दीपके और उनकी टीम के बड़े नेताओं से बार-बार यह सवाल किया गया है कि क्या वे झारखंड जाकर वहां के छात्रों का साथ देंगे? शुरुआत में जहां गोलमोल जवाब दिया गया तो बाद में दीपके ने छात्रों की हर तरीके से मदद और झारखंड जाने की बात भी कही। उन्होंने यह भी कहा था कि टाइफाइड होने और अन्य नेताओं के भी बीमार होने की वजह से रांची नहीं पहुंच पाए हैं। दो दिन तक महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर बेरोजगारी, चुनाव आयोग, न्यायपालिका, मीडिया में सुधार के लिए कई ऐलान करने वाली सीजेपी की टीम ने झारखंड में एक प्रतिनिधिमंडल को जरूर भेजा, लेकिन कोई भी ऐसा बड़ा नेता नहीं पहुंचा, जो जंतर-मंतर पर हुए आंदोलन का चेहरा था।