देश के राष्ट्रीय राजमार्गों के टोल प्लाजा पर लगे फास्टैग व ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन कैमरे अब सिर्फ टोल वसूली का जरिया नहीं रहेंगे। केंद्र सरकार इनका उपयोग वाहन चोरी, संगठित अपराध, आतंकी गतिविधियों पर नकेल कसने के लिए करेगी। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने गत सप्ताह इसके लिए दिशानिर्देश जारी किए हैं। दरअसल, पूर्व में आतंकी हमलों में वाहनों को विस्फोटक ले जाने या वाहनजनित आईईडी (वीबीआईईडी) के रूप में इस्तेमाल होता रहा है।
आतंकी कार, ट्रक, वैन या बाइक को एक शक्तिशाली विस्फोटक उपकरण या बम में बदल देते हैं। वाहन चोर नंबर प्लेट बदलकर वाहनों को ले जाते हैं। इन सब पर लगाम कसने के लिए राजमार्गों पर बने टोल प्लाजा मददगार साबित होंगे। अब एनआईए और खुफिया एजेंसियों को डायरेक्ट फीड मिलने से ब्लैकलिस्टेड या संदिग्ध वाहनों के टोल प्लाजा पर पहुंचते ही रियल-टाइम अलर्ट जारी हो जाएगा। इससे संवेदनशील क्षेत्रों में संदिग्ध वाहनों की आवाजाही पर नजर रखना व हमले के बाद आतंकियों को ट्रैक करना संभव होगा। मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, यह फैसला राष्ट्रीय सुरक्षा में गेम-चेंजर साबित होगा।
सिर्फ अधिकृत एजेंसियों को होगी नियंत्रित पहुंच
अफसरों ने बताया कि एनआईए, ईडी, पुलिस और परिवहन विभागों जैसी अधिकृत एजेंसियों को ही इस डेटा का नियंत्रित एक्सेस मिलेगा। लोगों की निजता बनाए रखने के लिए डेटा सार्वजनिक नहीं होंगे। डेटा एक्सेस के लिए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर तय है, जिसके तहत केवल वरिष्ठ अफसरों के अनुरोध पर ही जानकारी साझा होगी। (हिन्दुस्तान प्रिंट के सहयोग से)