नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) द्वारा संसद में पेश की गई रिपोर्ट में रेलवे में पेयजल की गुणवत्ता पर उठाए गए सवालों के बाद रेल मंत्रालय पूरी तरह एक्शन मोड में आ गया है। कैग की टिप्पणियों को गंभीरता से लेते हुए रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव, रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष एवं सीईओ सतीश कुमार तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने एक उच्चस्तरीय बैठक में स्थिति की समीक्षा की। इस समीक्षा के बाद यात्रियों को साफ एवं स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए तत्काल प्रभाव से कड़े कदम उठाने के आदेश जारी किए गए हैं।
पेयजल व्यवस्था सुधारने का रोडमैप
कैग की सिफारिशों और यात्रियों की सेहत को सर्वोपरि रखते हुए रेलवे बोर्ड ने पूरे रेल नेटवर्क में पेयजल व्यवस्था को दुरुस्त करने की व्यापक योजना तैयार की है। इसके तहत आपातकालीन और सुधारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं। वाटर कूलरों सहित पूरे रेलवे नेटवर्क में लगभग 20,000 स्थानों पर नई टैंक टू टैप जल एवं निगरानी प्रणाली स्थापित की जाएगी। यानी ओवरहेड वाटर टैंक (पानी की मुख्य टंकी) से लेकर नल (टैप) तक पानी के पूरे आपूर्ति के दौरान उसकी शुद्धता सुनिश्चित की जाएगी। पानी के पुराने और जर्जर भंडारण टैंकों को तेजी से बदलकर नए टैंक लगाए जाएंगे।
प्राथमिकता में पेय जल
रेल मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि पेयजल की गुणवत्ता में सुधार करना रेलवे की शीर्ष प्राथमिकताओं में शामिल है। इस पूरे अभियान की सीधी निगरानी रेलवे बोर्ड स्तर पर की जाएगी। प्रणाली में पूर्ण पारदर्शिता बनाए रखने के लिए समय-समय पर जल गुणवत्ता रिपोर्ट और प्रगति रिपोर्ट सार्वजनिक रूप से प्रकाशित की जाएगी। मंत्रालय के अधिकारी के अनुसार, यह त्वरित कार्रवाई कैग की सभी टिप्पणियों का निवारण करने और रेल यात्रियों के सफर के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए चलाए जा रहे एक व्यापक राष्ट्रव्यापी अभियान का हिस्सा है। रेलवे का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि देश के हर स्टेशन पर यात्रियों को मानकों के अनुरूप शुद्ध और सुरक्षित पानी उपलब्ध हो। (हिन्दुस्तान प्रिंट के सहयोग से)