दिल्ली के बॉर्डर पर किसानों की शहादत शर्म से झुका रही हैं

47 दिन में 60 किसानों की मौत; सुप्रीम कोर्ट भी पसीजा, कृषि कानून पर रोक से मंगल को हो सकती है घर वापसी


देश की रक्षा के लिए बॉर्डर पर जवानों की शहादत की खबरें सम्मान में सिर गर्व से झुकाती हैं। 47 दिन से दिल्ली के बॉर्डर पर किसानों की शहादत की खबरें नज़रें शर्म से झुका रही हैं। केंद्र सरकार के कृषि कानूनों के विरोध में दिल्ली की सीमाओं पर कड़ाके की ठंड और बारिश के बीच आंदोलनरत किसानों में 60 की शहादत से केंद्र सरकार का दिल भले ही नहीं पसीजा पर याचिकाओं पर सोमवार को सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट का किसानों की शहादत पर दिल जरुर पसीजा है। याचिकाओं पर सुनवाई दौरान सरकार और किसानों की ओर से पेश होने वाले वकीलों और सरकार पर फटकार लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने वकीलों को सिघुं,टिकरी और गाजीपुर बॉर्डर पर बैठे किसानों के बीच संदेश देने को कहा है कि आंदोलन में शामिल बुजुर्ग किसानों व महिलाओं से निवेदन किया जाए ठंड के इस मौसम की मार से बचने के लिए वे अपने घरों को लौट जाएं। हो सकता है कि मंगलवार को सुनवाई दौरान कृषि कानूनों पर रोक लगा कर सभी आंदोलनकािरयों के घर लौटने का रास्ता साफ कर दे। 47 दिन से दिल्ली सीमा की सड़कों पर आंदोलनरत हजारों किसानों ने खाने, ठहरने और ठंड से बचने के अपनी ओर से प्रबंध किए पर कड़ाके की ठंड के बीच बारिश, बीमारी और अन्य कारणों की वजह से 55 किसान शहीद हुए हैं। पांच ने मौत को गले लगाया है जिनमें एक बड़े सिख संत भी शामिल हैं। 26 नवंबर से दिल्ली की सीमाओं पर मौर्चा लगाने वाले पंजाब के किसान तो सिंतबर से ही रेलवे ट्रैक्स पर डटे थे और वहां भी करीब 50 किसान शहीद हो चुके हैं। किसानों की मौत के कारण अलग-अलग रहे है पर किसान सगंठन मौत के लिए केंद्र सरकार को जिम्मेदारी ठहरा रहे हैं। सरकार के ही ‘काले कानूनों’ के खिलाफ ही किसान जबरदस्त ठंड व कोरोना के प्रकोप के बीच आंदोलन करने को मजबूर हुए हैं। भारतीय किसान यूनियन हरियाणा के अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी के मुताबिक, “ठंड और बािरश में खुले आसमान तले खुली सड़कों पर बैठें किसानों का जीवन सरकार और मौसम की मार के कारण ख़त्म हो गया, लेकिन घमंडी केंद्र सरकार का अहंकार खत्म नहीं हुआ। सरकार किसानों का हाथ पकड़ने के लिए तैयार नहीं हुई तो हमें अब सुप्रीम कोर्ट से उम्मीद जगी है। बॉर्डर पर जान गवाते किसानों की व्यथा सुप्रीम कोर्ट जरुर समझेगी हमें पूरी उम्मीद हैं। सुप्रीम कोर्ट ही किसानों की घर वापसी का रास्ता खोलेगी।

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