कोसली के इतिहास में पहली अनूठी पारिवारिक-सामाजिक पहल

बुजुर्गों के  सम्मान से खिलखिला उठी कोसली की माटी, बोली आज मै धन्य हो गईं.


रणघोष खास. माता-पिता की कलम से


मकर संक्रांति के अवसर पर गुरुवार को कोसली की माटी खिलखिला उठी। वह इसलिए नहीं की जमकर बारिश या शानदार पैदावार हुई हो। पहली बार जय जवान- जय किसान वाली इस धरती पर 138 गांवों से सबसे बुजुर्ग दंपति एक दूसरे से मिले।  मान बढ़ा, सम्मान हुआ और संस्कारों की सुगंध चारों तरफ फैलती चली आईं। यह आयोजन कोसली विधायक लक्ष्मण सिंह यादव के नेतृत्व में हुआ। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष ओमप्रकाश धनखड़ एवं अलवर सांसद एवं अस्थल बोहर के मठाधीश महंत बाबा बालकनाथ इस गौरवशाली क्षण के गवाह बने। जिस किसी ने भी अपनी आंखों इस दृश्य को देखा वह आत्मबोध हो रहा था। यह ऐसा आयोजन था जिसके वातावरण में कोई मिलावट नहीं थी। भाव शब्द बनकर ऐसे माहौल में खुशी के मारे इतरा रहे थे। ना किसी की बुराई थी और ना किसी की तारीफ। बस एक शब्द ही चारों तरफ शोर मचा रहा था वह था बड़े बुजुर्गों का सम्मान जिसकी वजह से परिवार- समाज और राष्ट्र का स्वाभिमान जिंदा रहता है। यह ना किसी से लिया- दिया जा सकता है और ना ही मुंहमांगी कीमत लगाकर खरीदा जा सकता है। यह संस्कारों की गोद से जन्म  लेता है। जब कोसली विधानसभा के प्रत्येक गांव से ये बुजुर्ग दंपति हाथ पकड़कर अपने बेटों- पोते पोतियों के साथ महा कुंडलीय महायज्ञ में बैठे तो डाली जा रही आहुति से संस्कारों का जन्म हो रहा था जिसे हमने भोग विलास और भाग दौड़ की जिंदगी में भूला दिया था।

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