डंके की चोट पर : आइए इस उपलब्धि पर गर्व करें

दुनिया भर में शानदार पदों पर बैठे हैं भारत की माटी से निकले लोग इस समय…

डंके की चोट पर : अब राजनीति तय करती है आंसूओं को कब बहना और कब सूखना है

रणघोष खास. देशभर से इस देश में सहृदय प्रधानमंत्रियों के भावुक होकर आंखें छलकाने का इतिहास…

डंके की चोट पर : बोलने की आजादी अब नए ढंग से पाबंद होने लगी है..

रणघोष खास. देशभर से  सरकारें अभिव्यक्ति की या दूसरी तरह की आजादी पर हल्ला बोलती हैं,…

भारत में ज्ञान की मौत पर आँसू कौन बहायेगा!

रणघोष खास. अपूर्वानंद  शिक्षा संस्थानों पर लगाम लगाने के नए सरकारी फरमान की हिंदी की अखबारी…

भूकंप पर लिखे इस लेख को जरूर पढ़े

बार-बार आते भूकंप: पृथ्वी एक दिन ख़त्म हो जाएगी? रणघोष खास. अनिल जैन  उत्तर भारत और…

डंके की चोट पर : अधिकारी- कर्मचारियों ने कोरोना संकट में फ़र्जीवाड़ा किया क्या असली राष्ट्र-द्रोह नहीं है?

 आज हालात यह बन गए हैं कि असली देशभक्त असली राष्ट्र द्रोही कौन हैं? यह अब…

कोरोना काल में मदद के लिए निजी हाथ कितने मजबूत थे, इस सवाल का जवाब जरूरी

सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के दिन क्या अब लद गए हैं? क्या आने वाले समय में…

कृषि संकट मध्यम किसानों का है, छोटे खेतिहरों का नहीं

 रणघोष खास. हरीश दामोदरन  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने चौधरी चरण सिंह का हवाला देकर और हाशिए…

डंके की चोट पर : ख़ामोश! मुल्क में अब सवाल पूछना मना है ?

माहौल यह है कि हरेक आदमी या तो डरा हुआ है या फिर डरने के लिए…

इसमें कोई शक नहीं पूंजीपतियों की लार भारतीय खेती पर टपक रही है

रणघोष खास. देशभर से पूरी दुनिया में कुछ बड़ी कंपनियां तय कर रही हैं कि कौन…

स्मार्ट फोन को गले लगाते ही हमारी प्राइवेसी गिरवी हो गई, यह आज का कटु सच है

रणघोष खास. देशभर दरअसल, आज के दौर में रोटी, कपड़ा और मकान के साथ हमें सोशल…

कृषि क़ानूनों पर छूट राज्यों को क्यों नहीं देता केंद्र?

किसानों का चक्का-जाम बहुत ही शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो गया और उसमें 26 जनवरी- जैसी…

जब टिकैत के आंसू सैलाब बन सकते हैं तो सोचिए..

 जेल से बाहर आकर निर्दोष किसान बोलेंगे तो क्या होगा.. हमने अपने देश के लोकतंत्र को…

लोकतंत्र की सड़क लंबी है; सरकार की कीलें कम पड़ेंगी!

रणघोष खास.: श्रवण गर्ग विचार किसान ‘कांट्रैक्ट फ़ार्मिंग’ से लड़ रहे हैं और पत्रकार ‘कांट्रैक्ट जर्नलिज़्म’…

रणघोष की सीधी सपाट बात

खेड़ा बॉर्डर पर धरना दे रहे किसानों को ना छेड़े, टिकैत के आंसुओं से सबक ले …

पुण्यतिथि: यदि आज गांधी जी जिंदा होते तो

राष्ट्र बेताब दिख रहा है, बेहतरी और बदलाव के लिए रणघोष खास. देशभर से वर्ष-2021 की…

रणघोष की सीधी सपाट बात

आते–आते देश 72 सालों में इस तरह बंटा हुआ मिलेगा, किसने सोचा था? आजादी के बाद…

डंके की चोट पर : आज देश में लोकतंत्र पर भारी पड़ रही बेवजह की जिद..

अराजकता और हिंसा किसी सकारात्मक नतीजे की ओर नहीं ले जाती, इसलिए वह दुखद और निंदनीय…

संविधान की प्लाटिंग करने वाले नेता यह समझ ले किसान के लिए खेती उसकी मां है..

सरकार एवं विपक्षी दलों के नेताओं को चाहिए कि वह गणतंत्र की घटना के बाद अपनी…