रेवाड़ी सीट पर बदलता राजनीति मिजाज

रेवाड़ी की जीत पर कापड़ीवास के हस्ताक्षर भी जरूरी है..  


रणघोष खास. सुभाष चौधरी

 दक्षिण हरियाणा में रेवाड़ी विधानसभा सीट को लेकर कांग्रेस की तस्वीर साफ है तो भाजपा पूरी तरह से उलझी हुई है। पूर्व मंत्री कप्तान अजय सिंह यादव के बेटे मौजूदा विधायक चिरंजीव राव अपना दूसरा चुनाव लड़ने जा रहे हैं। अभी तक पार्टी के अंदर और बाहर इस पर कोई संशय नही है। भाजपा में टिकट को लेकर महाभारत की स्क्रिप्ट लिखी जा चुकी है।

इसलिए चर्चा में भाजपा ज्यादा है। भाजपा हाईकमान किस पर दांव खेल जाए किसी को नही पता। इतना जरूर है की हरियाणा में कुछ सीटों पर उसे हकीकत से सामना करते हुए निर्णय लेने पड़ेगे। रेवाड़ी सीट पर भाजपा के पास ऐसा चेहरा है जिसे अनदेखा करना किसी सूरत में तर्कसंगत नही है। वो है पूर्व विधायक रणधीर सिंह कापड़ीवास। भाजपाईयों में सबसे ज्यादा दुनियादारी देख चुके कापड़ीवास पूरी तैयारी के साथ चुनाव लड़ने के लिए तैयार है। उनका सामाजिक दायरा इतना मजबूत है की विरोधी चाहकर भी उसे बिखेर नही पाए हैं। उनके भतीजे मुकेश कापड़ीवास बैकअप के तौर पर उनके साथ कदमताल करते हुए दावेदारी को हर लिहाज से मजबूत करने में लगे हुए हैं। भाजपा के पास इस सीट के लिए अनेक मजबूत दावेदारों की लंबी सूची है लेकिन आज भाजपा इस पोजीशन में नही है की वह महज टिकट देकर किसी की जीत का रास्ता आसान कर दे। मौजूदा हालात में प्रत्येक सीट पर जबरदस्त मुकाबला है। महज टिकट देने से किसी की जीत तय होने वाली नही है उम्मीदवार का जमीनी तौर पर खुद की मजबूत हैसियत होना भी जरूरी है। कापड़ीवास लगातार 2000 से इस सीट पर चुनाव लड़ते आ रहे हैं। 2014 के चुनाव में शानदार वोटों से भाजपा विधायक बने थे। 2019 में टिकट नही मिला। लेकिन हर बार चुनाव में लड़ते रहे ओर अपने दम पर सम्मानजनक वोट लेकर अपनी मजबूत हैसियत को साबित करते रहे। यही वजह है की इस सीट पर कापड़ीवास को अनदेखा करना भाजपा के लिए किसी सूरत में आसान नही होगा। कापड़ीवास को आसानी से टिकट मिल जाएगी यह भी सहज नही है। पार्टी के भीतर और बाहर उनके विरोधियों में सबसे बड़े यहां के धाकड़ नेता राव इंद्रजीत सिंह है। इसलिए भाजपा इस सीट को लेकर पूरी तरह से उलझी हुई है।