चीन के परमाणु ठिकानों का खुलासा: सिचुआन की पहाड़ियों में बंकर, सैटेलाइट तस्वीरों ने बढ़ाई वैश्विक चिंता

चीन के परमाणु ठिकानों का खुलासा: सिचुआन की पहाड़ियों में बंकर, सैटेलाइट तस्वीरों ने बढ़ाई वैश्विक चिंता

चीन के सिचुआन प्रांत से सामने आई सैटेलाइट तस्वीरों ने अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा जगत में हलचल मचा दी है। एक अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, 2022 से 2026 के बीच ली गई जियोस्पेशल सैटेलाइट तस्वीरों के अध्ययन में संकेत मिले हैं कि चीन पहाड़ों को काटकर भूमिगत परमाणु ठिकाने विकसित कर रहा है।

बताया जा रहा है कि सिचुआन के जिटोंग क्षेत्र में घाटियों के बीच बड़े-बड़े बंकर, पाइपलाइन नेटवर्क और सुरंगनुमा संरचनाएं तैयार की गई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इन संरचनाओं का उद्देश्य परमाणु हथियारों के सुरक्षित भंडारण और परीक्षण से जुड़ा हो सकता है।


2019 के बाद तेज हुआ परमाणु अभियान

जियोस्पेशल इंटेलिजेंस विशेषज्ञों के अनुसार, 2019 के बाद से चीन ने अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर गतिविधियां तेज कर दी हैं। सिचुआन में जिटोंग और पिंगटोंग जैसे क्षेत्रों में तेजी से निर्माण कार्य हुआ है।

रिपोर्ट के मुताबिक यहां हाई-एक्सप्लोसिव टेस्टिंग सेंटर और मजबूत भूमिगत बंकर बनाए गए हैं। इन संरचनाओं को इस तरह डिजाइन किया गया है कि विस्फोट होने पर शॉक वेव बाहर तक प्रभाव न डाले। इससे संकेत मिलता है कि यहां संवेदनशील सैन्य गतिविधियां संचालित हो सकती हैं।


अमेरिका और चीन के बीच बढ़ता परमाणु तनाव

अमेरिका पहले भी चीन पर गुप्त परमाणु परीक्षण करने के आरोप लगा चुका है। 2020 में अमेरिकी प्रशासन ने दावा किया था कि चीन पारदर्शिता के बिना अपने परमाणु कार्यक्रम का विस्तार कर रहा है।

अमेरिका का यह भी कहना रहा है कि भविष्य में किसी भी न्यूक्लियर आर्म्स कंट्रोल एग्रीमेंट में चीन को शामिल किया जाना चाहिए। अमेरिका और रूस के बीच मौजूदा परमाणु हथियार नियंत्रण समझौते कमजोर पड़ने के बाद वैश्विक परमाणु संतुलन को लेकर नई बहस शुरू हो चुकी है।


2030 तक 1000 परमाणु हथियारों का लक्ष्य?

पेंटागन के अनुमान के मुताबिक 2024 के अंत तक चीन के पास 500 से अधिक परमाणु हथियार हो सकते हैं। वहीं 2030 तक इस संख्या को 1000 तक पहुंचाने का लक्ष्य बताया जा रहा है।

हालांकि, वर्तमान में चीन रूस और अमेरिका की तुलना में पीछे है, लेकिन उसकी तेजी से बढ़ती सैन्य क्षमता और भूमिगत ठिकानों का विस्तार आने वाले वर्षों में शक्ति संतुलन को प्रभावित कर सकता है।


भारत के लिए क्यों बढ़ी चिंता?

भारत और चीन के बीच पहले से ही सीमा तनाव की स्थिति बनी रहती है। ऐसे में सिचुआन में भूमिगत परमाणु ठिकानों के निर्माण की खबरें रणनीतिक दृष्टि से अहम मानी जा रही हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि परमाणु हथियारों का विस्तार केवल दो देशों के बीच प्रतिस्पर्धा नहीं है, बल्कि यह पूरे एशिया-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा संरचना को प्रभावित कर सकता है। मैसाचुसेट्स इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नॉलजी से जुड़े विश्लेषकों ने भी इस ट्रेंड को चिंताजनक बताया है।

सिचुआन के जिटोंग क्षेत्र में बनाए गए बंकर और परीक्षण केंद्र संकेत देते हैं कि चीन अपनी स्ट्रैटजिक पोजीशन को मजबूत करने में लगा है। हालांकि चीन की ओर से इन गतिविधियों को लेकर आधिकारिक तौर पर स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है।


वैश्विक हथियारों की दौड़ में नया चरण?

दुनिया पहले ही अमेरिका-ईरान तनाव, रूस-यूक्रेन युद्ध और एशिया में बढ़ते सामरिक गठबंधनों के कारण अस्थिर माहौल से गुजर रही है। ऐसे समय में चीन के परमाणु ढांचे के विस्तार की खबरें वैश्विक हथियारों की दौड़ को और तेज कर सकती हैं।

विश्लेषकों का कहना है कि आने वाले वर्षों में एशिया में सामरिक संतुलन बनाए रखना बड़ी चुनौती होगा। भारत, अमेरिका, रूस और अन्य वैश्विक शक्तियां चीन की इन गतिविधियों पर बारीकी से नजर रखे हुए हैं।

फिलहाल सैटेलाइट तस्वीरों ने जो संकेत दिए हैं, उन्होंने दुनिया को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या वैश्विक परमाणु संतुलन एक नए दौर में प्रवेश कर चुका है।