नगर परिषद रेवाड़ी चुनाव की मौजूदा तस्वीर से मुलाकात करिए..कांग्रेसी यह भ्रम निकाल दे वे ईमानदार है, यही उनका असली बचाव होगा..

रणघोष खास. सुभाष चौधरी  

रेवाड़ी व धारूहेड़ा नगर निकाय चुनाव को लेकर कांग्रेसी भ्रष्टाचार को लेकर भाजपा पर जमकर हमला कर रहे हैं। करना भी चाहिए। भाजपा का 12 साल का राज कम नही होता लेकिन कांग्रेसी यह कहना बंद कर दें की वे  पूरी तरह से ईमानदार है। यह दावा करना भी शराब के ठेके पर दूध पीने जैसा है। जिसे चाहकर भी कोई हजम नही कर सकता।  

दरअसल रेवाड़ी में जमीनी तौर पर किसी भी पार्टी, उम्मीदवार की कोई हवा या लहर नही है। कही माया का प्रंचड अपना असर दिखा रहा है तो कही रात के समय शराब और पैसे का खेल दिशा और दशा बदल रहा है। रेवाड़ी का असली दर्द क्या है। क्यों वह इतने सालों से अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रही है। इससे किसी को कोई सरोकार नही है। चुनाव के समय टिकट काटने या देने क नाम पर असरदार नेताओं के फतवे जारी होते रहे हैं। ऐसी कोई पारदर्शी व्यवस्था आज तक कायम नही हो पाई है जिसमें ईमानदारी, मूल्य व विजन को  सम्मान व प्राथमिकता मिली हो। सभी बड़े राजनीतिक दलों में आधे से ज्यादा बाजारू कार्यकर्ताओं की फौज का कब्जा हो चुका है जिसका मकसद सत्ता में रहकर अपने निजी एजेंडे को पूरा करना है। यही कार्यकर्ता एजेंडा व प्रबंधन बनकर मीडिया को मैनेज करते हैं। चुनाव में मीडिया की स्थिति उस प्रेमिका की तरह होती है जो कपड़ों की तरह प्रेमी बदलने में माहिर है। ऐसा लगता है की यह प्रेमिका पांच सालों से इन्हीं पलों का इंतजार कर रही थी की उसकी इतने सालों की भूख शांत होने जा रही है। मुख्य मुकाबला भाजपा- कांग्रेस के बीच बताया जा रहा है लेकिन निर्दलीय उम्मीदवार भी समीकरण बदलने की ताकत रखते हैं। इसकी वजह भी साफ है। दोनों बड़े दल पहले तो टिकट को लेकर अंदरखाने बिखरे हुए थे। अब भ्रष्टाचार को लेकर एक दूसरे पर ताबड़तोड हमला कर रहे है जिसमें कही ना कहीं सच्चाई अपनी मौजूदगी दर्ज करा रही है। कोई एक उंगली उठाता है तो चार उसकी तरफ उठ जाती है। कोई दूध का धुला नही है। अगर पांच मई को मतदान होता है तो  रेवाड़ी में एससी महिला चेयरपर्सन जो भी विजयी होगा वह जनादेश वाला नही होगा। मतदाता ऐसे माहौल में अपने वोट को इस सोच के साथ डालेंगे की यह कम ईमानदार है यह ज्यादा भ्रष्टाचारी है। कई सालों से काजल की कोठरी बन चुकी नगर परिषद का स्वरूप बदल जाएगा। इसका भरोसा कोई भी प्रत्याशी ईमानदारी से कायम नही कर पाया है। इसलिए वोटों के बिखराव में खंडित जनादेश के हालात बने हुए हैं। इसके अलावा यह मैन टू मैन  की डोर में बना छोटा चुनाव है इसलिए इसमें किसी बड़े नेता या संगठन के प्रभाव का असर ज्यादा नही पड़ेगा। प्रत्याशी का उसका व्यवहार व पीछे की उसकी कार्यप्रणाली ही उसकी जीत और हार का आधार तय करेगी। कुल मिलाकर कोई भी प्रत्याशी चुनाव प्रचार में यह खुलकर दावा नही करें की वह ईमानदार है। ऐसा कहने वाला ही आगे चलकर सबसे घातक बन जाता है। यही नगर परिषद रेवाड़ी की यात्रा का असल सच है।