अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के कार्यकारी आदेश से अडानी समूह को राहत? जानें पूरा मामला

ट्रम्प ने रिश्वत विरोधी कानून पर लगाई रोक, अडानी समूह को मिलेगा फायदा?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसमें न्याय विभाग को 1977 में लागू हुए विदेशी भ्रष्ट आचरण अधिनियम (FCPA) को लागू करने से रोकने का निर्देश दिया गया है। इसी कानून के तहत अडानी समूह के खिलाफ रिश्वतखोरी की जांच शुरू की गई थी।

यह घटनाक्रम तब सामने आया है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिका दौरे पर जाने वाले हैं। इससे पहले वे फ्रांस की यात्रा पर हैं। माना जा रहा है कि इस फैसले से अडानी समूह को सीधा फायदा मिलेगा।

क्या है विदेशी भ्रष्ट आचरण अधिनियम (FCPA)?

1977 में लागू FCPA कानून के तहत अमेरिकी कंपनियों के लिए व्यापारिक सौदे पाने के लिए विदेशी सरकारी अधिकारियों को रिश्वत देना अवैध है। अमेरिकी अधिकारियों ने इस कानून का इस्तेमाल कई बड़े घोटालों में किया है।

ट्रम्प ने इस कानून पर रोक लगाने का निर्णय लिया है क्योंकि उन्होंने इसे “अमेरिकी हितों के खिलाफ” बताया। नवंबर 2024 में, अमेरिकी अधिकारियों ने गौतम अडानी और उनके भतीजे सागर अडानी पर भारतीय अधिकारियों को रिश्वत देने के आरोप में मुकदमा दर्ज किया था। एफबीआई ने इस मामले में कोर्ट में सबूत भी सौंपे थे।

अडानी समूह पर रिश्वत के आरोप

  • अमेरिकी न्याय विभाग ने अडानी समूह पर भारतीय अधिकारियों को $250 मिलियन (₹2,100 करोड़) से अधिक की रिश्वत देने का आरोप लगाया था।
  • अडानी ग्रीन एनर्जी ने भारतीय सौर ऊर्जा निगम (SECI) के जरिए महंगे दामों पर बिजली बेचने के लिए भारतीय अधिकारियों को रिश्वत दी थी।
  • रिश्वत देकर अडानी समूह ने आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, छत्तीसगढ़, ओडिशा और जम्मू-कश्मीर में बिजली वितरण कंपनियों से कॉन्ट्रैक्ट हासिल किए।
  • अमेरिकी सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन (SEC) ने गौतम अडानी और सागर अडानी पर बाजार से ऊंची कीमतों पर बिजली खरीदने के लिए रिश्वत देने का आरोप लगाया।

ट्रम्प के कार्यकारी आदेश का असर

ट्रम्प प्रशासन ने FCPA के तहत सभी नई जांचों पर रोक लगाने और मौजूदा मामलों की समीक्षा करने का निर्देश दिया है। इसका मतलब यह हो सकता है कि अडानी समूह के खिलाफ मामला कमजोर हो सकता है या पूरी तरह बंद भी किया जा सकता है

अमेरिकी सांसदों की प्रतिक्रिया

  • अमेरिकी सांसदों ने इस फैसले पर सवाल उठाए हैं।
  • सांसद लांस गूडेन, पैट फॉलन, माइक हैरिडोपोलोस, ब्रैंडन गिल, विलियम आर. टिममन्स और ब्रायन बाबिन ने अटॉर्नी जनरल को पत्र लिखकर इस फैसले की समीक्षा करने की मांग की है।
  • उनका मानना है कि इस फैसले से भारत-अमेरिका के संबंधों पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।

क्या होगा आगे?

ट्रम्प के इस आदेश से अडानी समूह को अस्थायी राहत जरूर मिली है, लेकिन यह देखना होगा कि 6 महीने की समीक्षा अवधि के बाद अमेरिकी न्याय विभाग क्या निर्णय लेता है।

निष्कर्ष:

ट्रम्प के नए फैसले से अडानी समूह को फायदा हो सकता है, लेकिन अमेरिकी सांसदों के विरोध के चलते यह मामला अभी खत्म नहीं हुआ है। भारत-अमेरिका संबंधों के लिए भी यह एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है।