देश में मिला एमपॉक्स का पहला संदिग्ध केस, अस्पताल में आइसोलेट किया गया मरीज

देश में एमपॉक्स (मंकीपॉक्स) का पहला संदिग्ध मामला सामने आया है। मरीज एक युवक है, जिसने हाल ही में एमपॉक्स से जूझ रहे देश से यात्रा की है। युवक को अस्पताल में भर्ती करवाया गया है, जहां उसे आइसोलेशन में रखा गया है। मालूम हो कि डब्ल्यूएचओ ने एमपॉक्स को हेल्थ इमरजेंसी घोषित किया है और कई देशों में इसके बड़ी संख्या में मामले सामने आए हैं। भारत सरकार भी एमपॉक्स को लेकर कई दिनों से सतर्क है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया है कि एमपॉक्स के संदिग्ध मरीज की हालत इस समय स्थिर है। युवक को एमपॉक्स है या नहीं, इसकी पुष्टि करने के लिए उसका सैंपल लिया जा चुका है और उसकी जांच हो रही है। स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि हालांकि, किसी भी अनावश्यक चिंता की कोई बात नहीं है।

मंत्रालय ने बताया कि देश इस तरह के अलग-अलग यात्रा संबंधी मामलों से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है और किसी भी संभावित जोखिम को प्रबंधित करने और कम करने के लिए मजबूत उपाय किए गए हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा 12 अफ्रीकी देशों में प्रकोप को ग्लोबल इमरजेंसी घोषित करने के तीन सप्ताह बाद भारत में संदिग्ध एमपॉक्स मामले का पता चला।

एमपॉक्स को लेकर केंद्र सरकार जरूरी कदम उठाने लगी है। इसके लिए टेस्टिंग किट तैयार की जा रही है। सीडीएससीओ ने एमपॉक्स का पता लगाने के लिए तीन टेस्टिंग किट को मंजूरी दी है। ये आरटी-पीसीआर किट जांच के लिए पॉक्स के चकत्ते से तरल पदार्थ के सैंपल का प्रयोग करते हैं। आईसीएमआर ने भी इन किट्स को मंजूरी दी हुई है।

इस बीच, अफ्रीका रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र और WHO ने शुक्रवार को Mpox प्रकोप के लिए एक योजना शुरू की। अफ्रीका CDC के महानिदेशक डॉ. जीन कासेया के अनुसार, लगभग 600 मिलियन डॉलर के बजट वाली छह महीने की योजना निगरानी, ​​प्रयोगशाला परीक्षण और सामुदायिक सहभागिता पर ध्यान केंद्रित करेगी। गुरुवार को कांगो को JYNNEOS वैक्सीन की 100,000 खुराकों का पहला बैच मिला, जिसे यूरोपीय संघ ने यूरोपीय संघ की स्वास्थ्य आपातकालीन एजेंसी HERA के जरिए से डोनेट किया है। इन टीकों को स्वास्थ्य कर्मियों और आबादी की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।