रणघोष खास. देशभर से
मणिपुर में दंगा प्रभावित लोगों के जख्मों पर मरहम लगाने के लिए विपक्षी गठबंधन इंडिया का एक प्रतिनिधिमंडल मणिपुर जा सकता है। इंडिया टुडे ने सूत्रों के हवाले से यह खबर दी है। इंडिया गठबंधन में 26 राजनीतिक दल हैं। इन सभी के दलों के नेता प्रतिनिधिमंडल में शामिल होंगे। सूत्रों ने कहा, प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व उन पार्टियों द्वारा किया जाएगा जिनकी पूर्वोत्तर राज्य में मजबूत उपस्थिति है। यात्रा की तारीख और अवधि अभी तय नहीं की गई है। इस पर विभिन्न सुझाव आ रहे हैं। कुछ दलों की राय है कि शनिवार-रविवार को जब संसद की छुट्टी सत्र के दौरान हो तो उसमें जाया जा सकता है या फिर 11 अगस्त को मॉनसून सत्र खत्म होने के बाद जाया जा सकता है। यहां यह बताना जरूरी है कि मणिपुर में हिंसा के दौरान पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह गए थे और उसके बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी वहां पहुंचे थे। मणिपुर हिंसा पर विपक्षी दल संसद के मौजूदा मानसून सत्र के दौरान मणिपुर में हिंसा ने तूल पकड़ लिया है। विपक्षी नेता हर दिन सदन में नारेबाजी करते हुए मांग कर रहे हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संसद में इस मुद्दे पर बोलें।मणिपुर मुद्दे पर बुधवार को लोकसभा में नरेंद्र मोदी सरकार के खिलाफ कांग्रेस का अविश्वास प्रस्ताव भी मंजूर हो गया। भीड़ द्वारा दो महिलाओं को नग्न कर घुमाने का वीडियो सामने आने के बाद केंद्र सरकार पर पहाड़ी राज्य में शांति लाने का दबाव बढ़ रहा है।
सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने कहा था कि वह मणिपुर में प्रतिनिधिमंडल भेजने के लिए इंडिया गठबंधन में शामिल विपक्ष शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों से बातचीत कर रही हैं। टीएमसी सांसदों के पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने 19 जुलाई को राज्य का दौरा किया। पिछले महीने, कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने राज्य के राहत कैंपों का दो दिवसीय दौरा किया और जारी हिंसा से विस्थापित लोगों से मुलाकात की। इससे पहले, विपक्षी दलों ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से कहा था कि लोगों को ‘हीलिंग टच’ देने के लिए एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल को मणिपुर का दौरा करना चाहिए। लेकिन सरकार की ओर से अभी तक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल भेजने की कोई पहल नहीं हुई। मणिपुर में मई महीने में व्यापक हिंसा हुई थी, जिसका सिलसिला अब तक जारी है। राज्य में मैतेई और कुकी आदिवासी समुदाय का टकराव पुराना है। मैतेई हिन्दू बहुल समुदाय है। उसकी आबादी वहां 53 से 60 फीसदी तक बताई जाती है, जबकि कुकी-नागा आदिवासी समुदाय करीब 40 फीसदी है। मैतेई ज्यादातर इंफाल घाटी में रहते हैं, जबकि कुकी पहाड़ी क्षेत्रों में रहते हैं, जिसकी सीमाएं म्यांमार से लगती हैं।