देशभर में लॉकडाउन को लेकर चल रही अटकलों के बीच केंद्र सरकार ने स्थिति साफ करते हुए कहा है कि फिलहाल देश में किसी भी प्रकार का लॉकडाउन लगाने की कोई योजना नहीं है। हाल ही में संसद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान के बाद सोशल मीडिया पर इस तरह की चर्चाएं तेज हो गई थीं।
दरअसल, प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा था कि देश को वैश्विक संकटों के प्रभावों का सामना उसी तरह करना होगा, जैसे कोरोना काल में किया गया था। इसी बयान के बाद कुछ लोगों ने यह अनुमान लगाना शुरू कर दिया कि देश में फिर से लॉकडाउन लगाया जा सकता है। हालांकि, सरकार ने इन सभी अटकलों को पूरी तरह खारिज कर दिया है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सरकार ने स्पष्ट किया है कि आम जनता की गतिविधियों या आर्थिक कार्यों पर किसी भी प्रकार की पाबंदी लगाने का कोई निर्णय नहीं लिया गया है। खास बात यह है कि प्रधानमंत्री ने अपने पूरे भाषण में कहीं भी “लॉकडाउन” शब्द का उपयोग नहीं किया था।
इस बीच, ममता बनर्जी ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने ईंधन की बढ़ती कीमतों और रसोई गैस बुकिंग नियमों में बदलाव को लेकर केंद्र सरकार की आलोचना की। ममता बनर्जी ने कहा कि उन्हें लॉकडाउन या अलर्ट जैसे उपायों की चर्चा सुनने को मिल रही है, हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि यदि देश पहले कोविड से लड़ सकता है, तो दोबारा भी मुकाबला कर सकता है।
प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में यह भी कहा था कि वैश्विक हालात—खासकर पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष—का असर लंबे समय तक रह सकता है। उन्होंने देशवासियों से एकजुट रहने और धैर्य व संयम के साथ हर चुनौती का सामना करने की अपील की।
गौरतलब है कि वर्ष 2020 में 24 मार्च को देश में पहली बार लॉकडाउन लागू किया गया था, जिसने आम जनजीवन पर व्यापक असर डाला था। इसी ऐतिहासिक संदर्भ के चलते इस बार भी लोगों में आशंकाएं बढ़ गई थीं।
इस बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक करने वाले हैं, जिसमें पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात और भारत की तैयारियों की समीक्षा की जाएगी। यह बैठक इस लिहाज से भी अहम मानी जा रही है क्योंकि पहली बार इस तरह के वैश्विक संकट पर राज्यों के साथ सामूहिक चर्चा की जा रही है।
फिलहाल सरकार की ओर से यह साफ संदेश है कि देश में लॉकडाउन जैसी कोई स्थिति नहीं है और नागरिकों को अफवाहों पर ध्यान देने से बचना चाहिए।