कजाखस्तान में चेहरा ढकने पर प्रतिबंध, हिजाब पर परोक्ष रोक से उठा नया विवाद

अस्ताना। मुस्लिम बहुल देश कजाखस्तान ने एक ऐतिहासिक लेकिन विवादास्पद फैसला लेते हुए सार्वजनिक स्थलों पर चेहरा ढकने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। राष्ट्रपति कासिम जोमार्ट तोकायेव ने इस कानून को मंजूरी दे दी है। इसके तहत अब देश में कोई भी व्यक्ति अपने चेहरे को ढंक कर सार्वजनिक स्थानों पर नहीं घूम सकेगा।

सरकार ने इस कदम को सुरक्षा, तकनीकी और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से जरूरी बताया है, लेकिन दुनिया भर में यह फैसला हिजाब प्रतिबंध के संदर्भ में देखा जा रहा है और कई मुस्लिम संगठनों में इससे नाराजगी भी है।


🎯 क्या कहता है नया कानून?

सरकार के अनुसार, यह कानून किसी खास धर्म या पोशाक को लक्षित नहीं करता, लेकिन इसमें स्पष्ट है कि कोई भी व्यक्ति बीमारी, खराब मौसम या खेलकूद जैसी विशेष परिस्थितियों को छोड़कर अपना चेहरा नहीं ढक सकेगा।

“फेशियल रिकॉग्निशन तकनीक की जरूरत सार्वजनिक सुरक्षा के लिए अहम है। चेहरे ढंके होने से तकनीक बेअसर हो जाती है।” — कजाखस्तान सरकार का आधिकारिक बयान


🏛️ सांस्कृतिक पहचान बनाम धार्मिक स्वतंत्रता

राष्ट्रपति तोकायेव ने इस कानून को “कजाख संस्कृति की पुनर्परिभाषा” बताया है। उन्होंने कहा:

“हमें अपने पारंपरिक कजाख वस्त्रों को अपनाना चाहिए, न कि चेहरे को ढकने वाले काले कपड़े पहनने चाहिए। यह समय है अपनी राष्ट्रीय पहचान को मजबूत करने का।”

हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि —

“मजहब व्यक्ति का निजी मामला है, लेकिन पोशाक से हमारी राष्ट्रीय पहचान झलकनी चाहिए।”


🔍 देश में पहले से चल रही थी बहस

हाल के वर्षों में कजाखस्तान में इस्लामिक ड्रेस को लेकर बहस तेज हो गई थी।

  • 2023 में अतयारु क्षेत्र के एक स्कूल में 150 छात्राओं ने यह कहते हुए स्कूल जाने से इनकार कर दिया था कि जब तक हिजाब बैन नहीं हटेगा, वे स्कूल नहीं जाएंगी।

  • कई अन्य इलाकों में भी अभिभावकों और धार्मिक समूहों ने प्रदर्शन किए थे।

इसके बावजूद, सरकार अपनी नीति पर अडिग रही।


🌍 सोवियत अतीत और धर्मनिरपेक्षता

कभी सोवियत संघ का हिस्सा रहे कजाखस्तान पर आज भी सोवियत मूल्यों और धर्मनिरपेक्ष सोच का प्रभाव है।

  • राष्ट्रपति तोकायेव का मानना है कि राष्ट्रीय एकता के लिए सांस्कृतिक एकरूपता जरूरी है।

  • यह प्रतिबंध रूस, उज्बेकिस्तान, ताजिकिस्तान और किर्गिस्तान जैसे पूर्व सोवियत देशों की तर्ज पर लागू किया गया है, जहां हिजाब पहले से ही बैन है।


⚖️ समाज में मिला-जुला समर्थन

इस फैसले को लेकर कजाखस्तान में मिश्रित प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।

  • एक ओर प्रगतिशील तबका इसे राष्ट्रीय हित में मान रहा है,

  • तो दूसरी ओर धार्मिक समूह और रूढ़िवादी मुस्लिम महिलाएं इसे धार्मिक स्वतंत्रता पर चोट बता रही हैं।

एक नागरिक ने कहा:

“हमें यह तय करने की आजादी होनी चाहिए कि हम क्या पहनें। चेहरे को ढकना हमारी परंपरा है, आतंकवाद नहीं।”