लद्दाख को लेकर केंद्र सरकार ने स्पष्ट कह दिया है कि इसे पूर्ण राज्य का दर्जा नहीं मिलने वाला है। कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (KDA) और लेह अपेक्स बॉ़डी (LAB) अपनी मांगों को लेकर दिल्ली पहुंची थीं। दोनों ही दलों की ओर से कहा गया है कि केंद्र ने लद्दाख को छठी सूची में शामिल करने से भी जवाब दे दिया है। बता दें कि छठी सूची के तहत आदिवासी इलाकों स्वायत्तता की रक्षा, संस्कृति और भूमि की स्वतंत्रता के लिए विशेष प्रशासनिक व्यवस्था दी जाती है।
4 फरवरी को गृह मंत्रालय की हाई पावर्ड कमेटी के साथ बैठक हुई थी। इसमें लद्दाख के बड़े नेता शामिल था। केंद्र सरकार ने उनके सामने टेरिटोरियाल काउंसिल का ऑफर रखा है। इस प्रस्ताव के मुताबिक लद्दाख ऑटोनोमस हिल डिवेलपमेंट काउंसिलर (LAHDC) के चीफ को मुख्यमंत्री और डिप्टी चीफ एग्जिक्टिव काउंसिलर को उपमुख्यमंत्री का दर्जा दिया जाएगा।
केडीए के पदाधिकारी असगर अली करबाली ने कहा कि, हमने इस प्रस्ताव को खारिज किया है। एलएबी और केडीए दोनों ने ही इसे स्वीकार नहीं किया है। केवल एक सदस्य कुंजेस डोलमा ने केंद्र के इस प्रस्ताव का समर्थन किया है। करबाली ने कहा कि डोलमा हों या फिर कोई और, कोई भी अगर लद्दाख की पहचान के साथ छेड़छाड़ करके तो उसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
करबाली के मुताबिक कारगिल में सभा के दौरान लोगों ने सोनम वांगचुक के समर्थन में नारे लगाए। एलएबी के सदस्य और जलवायु कार्यकर्ता को सितंबर 2025 में पूर्ण राज्य के प्रदर्शन के दौरान ही गिरफ्तार कर लिया गया था। वह फिलहाल जेल में ही हैं। गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय से मुलाकात के बाद करबाली और लद्दाख बुद्धिस्ट असोसिएशन के अध्यक्ष शेरिंग दोरजे लाकरूक ने कहा कि वार्ता समावेशी थी।
करबाली ने कहा, हमने जब लद्दाख के पूर्ण राज्य और छठी सूची में शामिल करने की बात कही तो उधर से कहा गया कि छठी सूची में अब ताकतें नहीं रह गई हैं।करबाली ने कहा कि गृह मंत्रालय का कहना था कि लद्दाख के पास वित्तीय संसाधन नहीं हैं। यह पूरी तरह से गलत बात है क्योंकि देश का कोई भी राज्य ऐसा नहीं है जिसके पास सारे संसाधन मौजूद हों। बता दें कि बीते दिनों सुप्रीम कोर्ट ने वांगचुक के स्वास्थ्य पर भी चिंता जताई है। इस बीच केंद्र सरकार ने न्यायालय को सूचित किया कि राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए), 1980 के तहत उनकी हिरासत की समीक्षा में कोई प्रगति नहीं हुई है और उनकी स्वास्थ्य स्थिति ‘बिल्कुल ठीक’ है।