कुरुक्षेत्र से निकली आवाज ने साधारण इंसान की ताकत बता दी
-इस आयोजन ने सीआईडी को ना केवल फेल कर दिया साथ ही तमाम गतिविधियों पर नजर रख रहे प्रशासन के अधिकारियों के दावों को भी झूठला दिया।
रणघोष खास. कुरुक्षेत्र से ग्राउंड रिपोर्ट
हरियाणा के इतिहास में एक आयोजन को हमेशा के लिए याद किया जाएगा। जिसकी कमान एक ऐसे व्यक्ति के पास थे जो हरियाणा सरकार में महज कुछ महीने ही बड़े ओहदे पर रहा। वह चाहता था तो किसी भी तोर तरीकों से, पार्टी संगठन की फौज सहयोग से, प्रभावशाली नेता, मंत्री एवं विधायकों के बल व कारोबारियों के धन से, तरह तरह के प्रलोभन से भीड़ जुटाकर अपना शक्तिप्रदर्शन दिखा सकता था जो आमतौर पर राजनीति के ताकतर चेहरे करते आ रहे हैं। कई दशकों से इसे राजनीति परपंरा के तोर पर स्वीकार भी कर लिया गया है। लेकिन इस शख्स से एकदम इसका विपरित करके हर किसी को हैरत में डाल दिया। आयोजन से पहले उसने अपना पद छोड़ा। भाजपा संगठन से किसी भी तरह का सहयोग लेने से सार्वजनिक तौर पर इंकार कर दिया। इतना ही नही अपनी जनसंपर्क सभाओं में बार बार अपील की समारोह में वही लोग आए जिनका उनकी कलम से काम हुआ है। कोई नेता, प्रधान या चौधरी यह सोचकर नही आए की उसकी वजह से भीड़ आई है। उनका यह विडियो भी जारी हुआ। इस शख्स ने आयोजन के मंच पर केवल अपने राजनीति गुरु केंद्रीय मंत्री मनोहरलाल के अलावा किसी से अनुरोध नही किया। बाद में राजनीति तौर पर कोई गलत संदेश नही चले जाए इसलिए हरियाणा से समाज से जुड़े मंत्री, सांसद, विधायक ओर स्थानीय जनप्रतिनिधियों को मंच के लिए न्यौता दिया गया। ऐसा करने के पीछे इस शख्स का मकसद किसी के सम्मान को ठेस पहुंचाना, छोटा करना या स्वयं को श्रेष्ठ साबित करना नही था। उसका एकमात्र लक्ष्य समाज के उस पीड़ित ओर शोषित अंतिम व्यक्ति की आवाज का सम्मान एवं स्वाभिमान करना था जो समारोह के मंच पर सार्वजनिक तोर पर नजर आया। देखा जाए तो यह देश की राजनीति प्रयोगशाला में एक ऐसा नया प्रयोग है जिसमें सिस्टम करंट की तरह दौड़ने लगता है ओर आमजन का नेताओं के प्रति खत्म होता भरोसे पर रोक लग सकती है।
यहां बात हो रही है 26 अगस्त जन्माष्टमी के दिन भगवान श्रीकृष्ण की कर्म भूमि कुरुक्षेत्र, पीपली में स्थित भगवान रविदास मैमोरियल स्थल पर हुए राज्य स्तरीय दलित सम्मान स्वाभिमान समारोह की। जिसने समाज के पारिवारिक, सामाजिक व राजनीतिक ताने बाने को पूरी तरह से बदलकर रख दिया है। इस समारोह में प्रदेश के कोने से कोने से पहुंचे लोगों में जिसमें विशेष तौर से आई महिलाओं ने यह बता दिया की जो उनकी पीड़ा, दर्द को अपनी आवाज देगा वही बाबा साहेब भीम राव अंबेडकर का सच्चा सिपाही है। वे सूदेश कटारिया की एक आवाज पर यहा पहुंची है।
हरियाणा के करीब 16 जिलों से 270 से ज्यादा बसें इस आयोजन में पहुंची। 200 के करीब छोड़ी गाड़ियों का काफिला भी समारोह स्थल के चारों तरफ फैला हुआ था। इस आयोजन ने सीआईडी रिपोर्ट को भी ना केवल फेल कर दिया साथ ही इसकी तमाम गतिविधियों पर नजर रख रहे प्रशासन के अधिकारियों के दावों को भी झूठला दिया। समारोह को लेकर कुरुक्षेत्र या आस पास जिलों कोई प्रचार प्रसार नही था। बैनर व होर्डिंग भी आयोजन से एक दिन पहले लगाए गए। किसी को कोई न्यौता नही दिया। अममून यही स्थित अन्य जिलों में थी। समारोह का समय सुबह 11 बजे व मेहमानों के आने का समय साढ़े 12 बजे तय किया हुआ था। समारोह में 10 से 15 हजार से ज्यादा लोगों के पहुंचने का दावा किया गया था। सुरक्षा की दृष्टि से प्रशासन सुबह से ही अलर्ट हो गया था। सुबह 10.30 बजे तक आयोजन स्थल पर नाम मात्र भीड़ थी। वहां घूम रही सीआईडी टीम एक एक पल की रिपोर्ट अपने उच्च अधिकारियों को दे रही थी। उधर आयोजन के बराबर में 12 हजार लोगों का भंडारा तैयार कर रहे हलवाई उलझन में थे की आयोजन का समय हो चुका है ओर लोग पहुंचे नही है। 10.30 बजे से 12.30 बजे तक अचानक सड़क के चारों तरफ बसों की लंबी कतारे लगनी शुरू हो गईं। आयोजन स्थल देखते ही देखते भीड़ से पूरी तरह से भर गया। रैली समाप्त होने के बाद भी कुछ बसें महेंद्रगढ़, रेवाड़ी से पहुंची जबकि 20 से ज्यादा को रास्ते से ही देरी होने पर वापस भेज दिया गया। देरी से पहुंचने की वजह जन्माष्टमी पर्व होने पर महिलाओं द्वारा व्रत रखने ओर पूजा पाठ करना बताया गया। जिस हलवाई को भंडारा बचने का डर था दोपहर ढाई बजे 12 हजार से ज्यादा लोग उसका आनंद ले चुके थे।
कुछ वक्ताओं के लंबे भाषण से स्थिति बिगाड़ने का काम किया
जनता कुछ वक्ता नेताओं के लंबे भाषण से नाराज नजर आईं। उमस भरी गर्मी होने की वजह से लोग मुख्य नेताओं को सुनना चाह रहे थे। मुख्य अतिथि और मुख्य वक्ता केंद्रीय मंत्री मनोहरलाल को अंत में बोलना था। उनका नंबर आया तो दोपहर डेढ़ बजे से ज्यादा समय हो चुके थे। महेंद्रगढ़, पलवल, नूंह, गुरुग्राम, रेवाड़ी से लोग सुबह 6-7 बजे से लोग से बस से रवाना हो चुके थे। कुछ महिलाओं ने व्रत किया हुआ था उनके लिए फलाहार की व्यवस्था थी। इसलिए जब केंद्रीय मंत्री मनोहरलाल का भाषण शुरू हुआ उस समय दो हजार से ज्यादा लोग भंडारा ले रहे थे। लोगों का कहना था की मंच पर प्रमुख लोगों को बोलना चाहिए था। समारोह में केंद्रीय मंत्री मनोहरलाल, केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन मेघवाल, भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री एवं राज्यसभा सांसद दुष्यंत गौतम, कुरुक्षेत्र सांसद नवीन जिंदल के अलावा हरियाणा से राज्यसभा सांसद कृष्णलाल पंवार, कैबिनेट मंत्री डॉ. बनवारीलाल, युवा नेता अशोक तंवर, स्थानीय विधायक एवं मंत्री सुभाष सुधा विशेष तोर से उपस्थित रहे। मंच की पूरी कमांड स्वयं सुदेश कटारिया ने अपने हाथों में संभाल रखी थी।
महिलाओं के संकल्प लोटे- कलश ने दिया बड़ा संदेश
आयोजन का मुख्य आकर्षण अलग अलग क्षेत्रों से आई 21 महिलाओं द्वारा मुख्य अतिथि मनोहरलाल को संकल्प लौटा देना ओर सुदेश कटारिया के साथ कलश देकर यह वायदा किया जो बाबा साहेब का सम्मान करेगा व देश प्रदेश में राज करेगा। इस मौके पर अतिथियों को बाबा साहेब की पुस्तक भेंट दी गईं। समारोह के बाद भी लोग बाबा साहेब की पुस्तक लेने के लिए पंडाल में बैठे रहे। आयोजन टीम ने बची 100 से ज्यादा पुस्तक देकर उन्हें संतुष्ट किया।
आसमान में उड़े सैकड़ों गुब्बारे, जमकर हुई फूलो की बारिश

समारोह स्थल पर पहुंचने पर सैकड़ों महिलाओं ने अतिथियों पर जमकर फूलों की बारिश की, आपसी एकता, समानता और आपसी भाईचारे के प्रतीक के रूप में सैकड़ों गुब्बारों को आसमान में उड़ाया गया। यह नजारा देखने लायक था।
बिना सरकार, संगठन, किसी के सहयोग से सफल हो गया आयोजन
यहां बता दे आयोजन से कुछ समय पहले ही सुदेश कटारिया ने हरियाणा सीएम के चीफ मीडिया कोर्डिनेटर पद से इस्तीफा दे दिया था। इससे पूर्व वे इस पद पर रहते हुए तीन से चार महीने के दरम्यान दलित पीड़ित ओर शोषित समाज के हजारों लोगों की प्रशासन से संबंधित शिकायतों का मौके पर निपटारा कराने की अपनी कार्य प्रणाली के चलते समाज में काफी चर्चित हो गए थे। यहा तक की समाज के कोटे से विधायक एवं मंत्री भी सुदेश कटारिया से प्रशासन से संबंधित कार्य करवाने का अनुरोध करते नजर आए। गुरुग्राम जिले में एक बेहद गरीब परिवार से संबंध रखने वाले सुदेश कटारिया के सिर पर अपने राजनीतिक गुरु केंद्रीय मंत्री एवं पिछले साढ़े 9 साल हरियाणा के सीएम रहे मनोहरलाल का विशेष आशीर्वाद था। सुदेश अपनी रोजमर्रा की रिपोर्ट से उन्हें लगातार अपडेट करा रहे थे। सुदेश कटारिया समाज के लोगों के अनुरोध पर चंडीगढ़ से चलकर उनके घरों में पहुंच रहे थे जिनका उन्होंने प्रशासनिक स्तर पर काम किया था। इसके बाद जिला स्तर पर लोग स्वयं आगे आकर दलित कार्यक्रम आयोजित कर उन्हें बुलाने लगे। जिसमें सैकड़ों शिकायतों का बंडल लेकर वे चंडीगढ़ से निपटारा करने लगे। यही वजह है की सुदेश कटारिया बहुत कम समय से अपनी कार्य करने की शैली से पूरे प्रदेश में अपने समाज में अलग पहचान बनाने में सफल रहे जिसकी शानदार तस्वीर कुरुक्षेत्र में हुई राज्य स्तरीय समारोह में साफ तोर से नजर आईं।