रेवाड़ी नगर परिषद में बड़ा एक्शन: लेखाकार और JE सस्पेंड, अधिकारी पर कार्रवाई नहीं होने से उठे सवाल

Rewari Nagar Parishad Corruption Case: JE और लेखाकार सस्पेंड, अधिकारी पर क्यों नहीं हुआ एक्शन?


Rewari Nagar Parishad में भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच JE और लेखाकार सस्पेंड, लेकिन एक अधिकारी पर कार्रवाई नहीं होने से सवाल उठ रहे हैं। जानिए पूरा मामला।


नगर परिषद रेवाड़ी ओर भ्रष्टाचार का रिश्ता दो जिस्म एक जान की तरह बन चुका है। अब तो स्थिति है की कर्मचारी ओर अधिकारी आपस में ही एक दूसरे का निजी नाजायज काम करने के लिए एक दूसरे की सेवा पानी करते हें। ऐसे ही एक मामले में अशोक कुमार मीणा, डायरेक्टर जनरल, अर्बन लोकल बॉडिज, हरियाणा ने परिषद के लेखाकार जितेंद्र कुमार एवं जेई हैपी को सस्पेंड कर दिया है। कमाल की बात देखिए इस खेल में एक अधिकारी पर पूरी मेहरबानी बरती गईं। वह क्यों बरती गई यह भी जांच का विषय है क्योंकि यहां से जिला प्रशासन की तरफ से जो रिपोर्ट भेजी गई थी उसमें तीनों को समान तौर पर दोषी माना गया था। यहा स्पष्ट कर देना चाहते हैं की नगर परिषद रेवाड़ी में एक के बाद एक बेहिसाब घोटालों का खुलासा होता रहा है। हरियाणा विजिलेंस की टीम भी अनेक बाद कार्रवाई कर चुकी है। आदमखोर की तरह नप में विकास के नाम पर खर्च हुई राशि को डकारा गया। खुलेआम इतना सबकुछ होने के बावजूद मजाल आज तक ऐसी कोई कार्रवाई नही हुई जिसे देखकर यह विश्वास कायम किया जा सके की सिस्टम में भरोसा कुछ हद तक बचा हुआ है। भ्रष्टाचार को खत्म करने के नाम पर छोटे स्तर के कर्मचारी को निशाना बनाकर लीपापोती का खेल लगातार जारी है।
सूत्रों के अनुसार यह कार्रवाई एक जेई ने पिछले चार महीने की नॉन पे लीव ली हुई थी। एक अधिकारी महोदय ने नियमों के दरकिनार करते हुए इस जेई के खाते में दो महीने का वेतन डाल दिया। इसके बदले उसे अच्छा खासा महंगा मोबाइल गिफ्ट में दिया गया। हालांकि इसकी अभी आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है। इस खेल में लेखाकार भी शामिल थे। पता चलते ही जेई ने अपना यह वेतन वापस लौटा दिया लेकिन तब तक सबकुछ रिकार्ड में आ चुका था। जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी की तरफ से इसकी जांच कर उच्च अधिकारियों के पास भेज दी गई जिसमें तीनों को बराबर का दोषी मानते हुए नियमानुसार कार्रवाई करने की अनुशंसा की गई जिसके आधार पर 10 फरवरी को जेई हैप्पी व लेखाकार जितेंद्र कुमार को दोषी मानते हुए सस्पेंड कर दिया लेकिन दोषी एक अधिकारी पर कोई कार्रवाई नही हुईं। उस पर आगे चलकर एक्शन होगा या खेला होगा यह तो आने वाले दिनों में स्पष्ट हो पाएगा। इतना जरूर है की नगर परिषद में इन दोनो कर्मचारियों के सस्पेंड होने की खबर से ज्यादा अधिकारी पर नही हुई कार्रवाई की चर्चा ज्यादा सुर्खिया बटोर रही है। नगर परिषद में यह तो भ्रष्टाचार का ऊंट के मुंह में जीरा जितना भी मामला नही है। इससे बड़े कई स्तर के मामले विधानसभा की तरफ से गठित कमेटी से लेकर अनेक बार जिला कष्ट निवारण समिति की मीटिंग में उठते रहे हैं लेकिन सभी के सभी मीडिया में सुर्खिया बनकर रह गए हैं।