RSS Ban Talks in Karnataka: सीएम सिद्धारमैया के बेटे ने आरएसएस को बताया तालिबान जैसा

आरएसएस पर बैन की चर्चाओं के बीच कर्नाटक सीएम सिद्धारमैया के बेटे ने बताया तालिबान जैसा

कर्नाटक में आरएसएस की गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाने के कयासों के बीच राज्य की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के बेटे यतींद्र सिद्धारमैया ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की तुलना तालिबान से करते हुए बड़ा बयान दिया है।

यतींद्र ने कहा कि “आरएसएस की वही मानसिकता है जो तालिबान की है। इनका मानना है कि देश में सिर्फ एक मजहब और एक विचारधारा के लोग ही रह सकते हैं।” उन्होंने आगे कहा कि आरएसएस भी वही सोच रखता है जो तालिबान महिलाओं और समाज के प्रति रखता है — एकरूपता और नियंत्रण की मानसिकता।

मुख्यमंत्री के बेटे ने आगे कहा कि जैसे तालिबान कहता है कि इस्लाम का एक ही फिरका रहेगा और महिलाओं की आज़ादी खत्म कर दी गई है, वैसे ही आरएसएस भी यह चाहता है कि भारत में सिर्फ उसके तरीके से हिंदू धर्म को मानने वाले लोग ही रहें।

यह बयान ऐसे समय आया है जब कर्नाटक में आरएसएस पर बैन लगाने की चर्चा जोरों पर है। आईटी मंत्री प्रियांक खरगे ने मुख्यमंत्री को एक पत्र लिखकर संघ की गतिविधियों की जांच और संभावित रोक की मांग की थी। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने इस पत्र को गंभीरता से लेते हुए राज्य की मुख्य सचिव को आरएसएस की गतिविधियों की जांच करने के आदेश दिए हैं।

आरएसएस पर टिप्पणी के बाद भाजपा नेताओं ने कड़ा विरोध जताया है। पूर्व मुख्यमंत्री बी.एस. येदियुरप्पा के बेटे बी.वाई. विजयेंद्र ने कहा कि “आरएसएस राष्ट्रवाद और सामाजिक सुधार की विचारधारा वाला संगठन है। इस पर किसी भी प्रकार का प्रतिबंध लगाना असंभव है।”

विजयेंद्र ने आगे कहा कि “आरएसएस के पास देशभर में लाखों स्वयंसेवक हैं जो राष्ट्रसेवा के लिए समर्पित हैं। कांग्रेस सिर्फ राजनीतिक लाभ के लिए ऐसे बयान दे रही है।”

वहीं, यतींद्र सिद्धारमैया ने यह भी कहा कि “आरएसएस खुद को बहुत बड़ा संगठन कहता है। उनके पास दिल्ली में बड़ी बिल्डिंग है जिसमें हजारों करोड़ रुपये लगे हैं, लेकिन उनका कोई रजिस्ट्रेशन नहीं है। अगर कोई संगठन कानून के दायरे में नहीं आता, तो यह चिंता का विषय है।”

उधर, कांग्रेस नेता बी.के. हरिप्रसाद ने भी आरएसएस की गतिविधियों पर रोक लगाने की मांग का समर्थन किया है।
हालांकि, आरएसएस की ओर से अभी तक इस विवाद पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

राज्य में यह बहस तब और तेज हो गई है जब इसी सप्ताह अफगानिस्तान के तालिबानी मंत्री भारत दौरे पर आए हुए हैं, और उसी दौरान आरएसएस को लेकर यह विवादास्पद बयान सामने आया है।