शंकराचार्य विवाद में दूसरा इस्तीफा: योगी के समर्थन में GST के डिप्टी कमिश्नर प्रशांत सिंह ने छोड़ी नौकरी
शंकराचार्य विवाद को लेकर उत्तर प्रदेश में प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। अयोध्या से एक और बड़ा इस्तीफा सामने आया है, जहां जीएसटी विभाग में तैनात डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने यह इस्तीफा राज्यपाल को भेजा है, जो दो पन्नों का बताया जा रहा है। प्रशांत कुमार सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समर्थन में नौकरी छोड़ने का फैसला लेने की बात कही है।
यह इस्तीफा ऐसे समय आया है, जब शंकराचार्य विवाद और यूजीसी नियमों को लेकर प्रदेश में सियासी और सामाजिक बहस तेज चल रही है। इससे पहले सोमवार को बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने भी शंकराचार्य विवाद और यूजीसी के नए रेगुलेशन के विरोध में अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। ऐसे में यह उत्तर प्रदेश में इस मुद्दे को लेकर सामने आया दूसरा बड़ा इस्तीफा माना जा रहा है।
शंकराचार्य की टिप्पणी से आहत होने का दावा
प्रशांत कुमार सिंह ने अपने बयान में कहा कि शंकराचार्य द्वारा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर की गई कथित अभद्र टिप्पणी से वे गहरे आहत हैं। उन्होंने कहा कि जिस प्रदेश का वह नमक खाते हैं और जहां से उन्हें वेतन मिलता है, उसका पक्ष लेना उनका नैतिक दायित्व है। उनके अनुसार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत चुने गए मुख्यमंत्री हैं और इस तरह का अपमान वह स्वीकार नहीं कर सकते।
उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यह फैसला किसी राजनीतिक लाभ या दबाव के कारण नहीं लिया गया, बल्कि आत्मसम्मान और सिद्धांतों के आधार पर लिया गया निर्णय है।
तीन दिन से मानसिक रूप से व्यथित थे
डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह ने बताया कि वह पिछले तीन दिनों से इस पूरे घटनाक्रम को लेकर मानसिक रूप से व्यथित थे। काफी सोच-विचार के बाद उन्होंने पद छोड़ने का निर्णय लिया। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनका इस्तीफा पूरी तरह स्वैच्छिक है और इस पर किसी तरह का दबाव नहीं है।
उन्होंने आगे कहा कि जब उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया जाएगा, तब वे अपने निजी संसाधनों से समाजसेवा और राष्ट्रहित के कार्यों में सक्रिय रूप से योगदान देंगे। उन्होंने सामाजिक और राष्ट्रीय सरोकारों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
प्रशासन और राजनीति में तेज चर्चाएं
अयोध्या जैसे धार्मिक और संवेदनशील शहर से आए इस इस्तीफे को प्रशासनिक और राजनीतिक दोनों दृष्टि से अहम माना जा रहा है। इस फैसले के बाद प्रशासनिक गलियारों और राजनीतिक हलकों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। कई लोग इसे शंकराचार्य विवाद से सीधे जोड़कर देख रहे हैं, जिसने पहले ही प्रदेश की राजनीति में तीखी बहस छेड़ रखी है।
इससे पहले PCS अधिकारी का इस्तीफा
गौरतलब है कि इससे पहले सोमवार को बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट और पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री ने भी शंकराचार्य और उनके शिष्यों के कथित अपमान तथा यूजीसी के नए रेगुलेशन के विरोध में अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने उस समय स्पष्ट कर दिया था कि उनका फैसला पूरी तरह सोच-समझकर लिया गया है और वह किसी भी दबाव या समझाइश में आकर अपना इस्तीफा वापस नहीं लेंगे।
लगातार हो रहे इन इस्तीफों ने उत्तर प्रदेश में शंकराचार्य विवाद को और अधिक गंभीर बना दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि इस मुद्दे पर प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर क्या रुख अपनाया जाता है।