तेल-गैस संकट में फंसी दुनिया, अब पीछे हटे डोनाल्ड ट्रंप? होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने के लिए देशों से मांगी मदद

तेल-गैस संकट में फंसी दुनिया, अब पीछे हटे डोनाल्ड ट्रंप? होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने के लिए देशों से मांगी मदद

मध्य पूर्व में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) बंद होने से वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति पर बड़ा संकट खड़ा हो गया है। इस संकट के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने अब दुनिया के कई देशों से इस जलमार्ग को खुलवाने के लिए आगे आने की अपील की है।

हालांकि आलोचक इसे अमेरिका की रणनीतिक विफलता बता रहे हैं और कह रहे हैं कि अमेरिका और इजरायल की सैन्य कार्रवाई के बाद पैदा हुए इस संकट से निपटने में अब ट्रंप दूसरे देशों की मदद मांग रहे हैं।

होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से बढ़ा संकट

ईरान और पश्चिमी देशों के बीच बढ़ते तनाव के बाद Strait of Hormuz को बंद करने का फैसला किया गया था। यह जलमार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक माना जाता है।

मध्य पूर्व से निकलने वाले कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर एशिया और यूरोप तक पहुंचता है। ऐसे में इस मार्ग के बंद होने से वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों में तेजी और ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव बढ़ने की आशंका है।

ट्रंप ने किन देशों से मांगी मदद

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि इस संकट को खत्म करने के लिए कई देशों को मिलकर काम करना होगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि China, France, Japan, South Korea और United Kingdom जैसे देश अपने युद्धपोत भेजकर इस मार्ग को सुरक्षित बनाने में मदद करेंगे।

ट्रंप का कहना है कि यदि कई देश मिलकर नौसैनिक तैनाती करें तो होर्मुज को दोबारा सुरक्षित और खुला बनाया जा सकता है।

अमेरिका का दावा – ईरान की सैन्य क्षमता खत्म

ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका ने पहले ही ईरान की सैन्य क्षमता को काफी हद तक खत्म कर दिया है। इसके बावजूद ईरान छोटे स्तर पर ड्रोन, बारूदी सुरंग या कम दूरी की मिसाइलों के जरिए इस समुद्री रास्ते को असुरक्षित बना सकता है।

उन्होंने कहा कि अमेरिकी नौसेना लगातार ईरानी जहाजों पर नजर रखे हुए है और जरूरत पड़ने पर कार्रवाई भी कर रही है।

“यह रास्ता अमेरिका के लिए उतना जरूरी नहीं”

ट्रंप ने यह भी कहा कि यह समुद्री मार्ग अमेरिका के लिए उतना महत्वपूर्ण नहीं है जितना एशियाई देशों के लिए है। उनका दावा है कि अमेरिका को इस मार्ग से केवल लगभग एक प्रतिशत तेल मिलता है, जबकि चीन को करीब 90 प्रतिशत तेल इसी रास्ते से गुजरने वाले मार्गों से प्राप्त होता है।

अभी तक किसी देश ने नहीं दिखाई स्पष्ट सहमति

हालांकि ट्रंप की अपील के बावजूद अभी तक किसी भी देश ने खुले तौर पर अपने युद्धपोत भेजने की प्रतिबद्धता नहीं जताई है।

Australia ने साफ कर दिया है कि वह इस मिशन में अपने जहाज नहीं भेजेगा। ऑस्ट्रेलियाई सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री ने कहा कि फिलहाल इस तरह की कोई योजना नहीं है।

जापान और दक्षिण कोरिया भी कर रहे विचार

उधर Japan की संसद में प्रधानमंत्री ने कहा कि युद्धपोत भेजने को लेकर अभी कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है।

वहीं South Korea ने संकेत दिए हैं कि वॉशिंगटन के साथ बातचीत जारी है और किसी भी कदम से पहले विस्तृत समीक्षा की जाएगी।

चीन यात्रा पर भी बना दबाव

ट्रंप ने संकेत दिया है कि यदि चीन इस मिशन में सहयोग नहीं करता है तो वह अपनी प्रस्तावित चीन यात्रा भी टाल सकते हैं। उन्होंने कहा कि चीन को भी इस संकट के समाधान में भूमिका निभानी चाहिए, क्योंकि उसके लिए यह समुद्री मार्ग अत्यंत महत्वपूर्ण है।

यूरोपीय संघ की अहम बैठक

इधर European Union के नेता भी इस मुद्दे पर सोमवार को बैठक करने जा रहे हैं। इस बैठक में मध्य पूर्व में सीमित नौसैनिक मिशन भेजने के विकल्पों पर चर्चा हो सकती है, हालांकि यह संभावना कम है कि संघ तुरंत कोई बड़ा सैन्य निर्णय लेगा।

वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है बड़ा असर

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य लंबे समय तक बंद रहता है तो वैश्विक ऊर्जा बाजार में बड़ा संकट पैदा हो सकता है। इससे तेल और गैस की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं और कई देशों की अर्थव्यवस्था पर सीधा असर पड़ सकता है।

ऐसे में आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या अंतरराष्ट्रीय समुदाय मिलकर इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को फिर से खोलने में सफल हो पाता है या नहीं।