UGC Rules 2026 Controversy: धर्मेंद्र प्रधान का बयान, मोदी सरकार ने पहली बार तोड़ी चुप्पी | Latest News

UGC रूल्स 2026 पर देशभर में विरोध के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने दिया भरोसा—न भेदभाव होगा, न दुरुपयोग।


यूजीसी रूल्स पर बवाल के बीच पहली बार बोली मोदी सरकार, धर्मेंद्र प्रधान ने दिया बड़ा भरोसा


यूजीसी रूल्स 2026 को लेकर देशभर में चल रहे विरोध और राजनीतिक बहस के बीच मोदी सरकार की ओर से पहली बार आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि इन नियमों के तहत न तो किसी के साथ भेदभाव होने दिया जाएगा और न ही किसी को इसका बेजा या गलत इस्तेमाल करने की इजाजत दी जाएगी।

धर्मेंद्र प्रधान का यह बयान ऐसे समय आया है, जब यूजीसी के नए नियमों को लेकर सवर्ण समाज से जुड़े संगठनों में भारी नाराजगी देखी जा रही है और कई शहरों में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। इस मुद्दे को लेकर भाजपा की मुश्किलें बढ़ने की चर्चा भी जोरों पर है, क्योंकि सवर्ण समाज को लंबे समय से पार्टी का एक मजबूत वोट बैंक माना जाता रहा है।

“किसी का उत्पीड़न नहीं होगा” – धर्मेंद्र प्रधान

केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने कहा, “मैं एक बात बहुत विनम्रता से कहना चाहता हूं कि किसी का उत्पीड़न नहीं होने दिया जाएगा। कोई भेदभाव नहीं होगा। यूजीसी, भारत सरकार और राज्य सरकारों की यह जिम्मेदारी होगी।” उन्होंने यह भी साफ किया कि यह पूरा मामला सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में है और सरकार पूरी तरह संविधान के दायरे में रहकर काम करेगी।

धर्मेंद्र प्रधान ने आगे कहा कि भेदभाव के नाम पर किसी को भी कानून का दुरुपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। उनके अनुसार, सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि नियमों का उद्देश्य पूरा हो, लेकिन किसी वर्ग को अन्याय या अत्याचार का सामना न करना पड़े।

बढ़ता जा रहा है विवाद

यूजीसी रूल्स 2026 को लेकर विवाद लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। सवर्ण बिरादरियों से जुड़े कई संगठनों ने इन नियमों पर सख्त आपत्ति जताई है और दिल्ली, लखनऊ सहित कई शहरों में प्रदर्शन किए जा रहे हैं।

इस मुद्दे का असर सत्ताधारी दल भाजपा के भीतर भी देखने को मिल रहा है। रायबरेली और लखनऊ जैसे जिलों में भाजपा के कुछ नेताओं ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। इतना ही नहीं, उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपने फैसले के पीछे शंकराचार्य के अपमान और यूजीसी रूल्स को कारण बताया है।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी तेज

यूजीसी रूल्स को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। उद्धव ठाकरे की शिवसेना की राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने इन नियमों को वापस लेने या इनमें संशोधन करने की मांग की है। वहीं समाजवादी पार्टी के सांसद रामगोपाल यादव ने यूजीसी रूल्स का समर्थन करते हुए इसे सही कदम बताया है।

दिलचस्प बात यह है कि कांग्रेस पार्टी ने अब तक इस मुद्दे पर खुलकर कोई स्पष्ट रुख सामने नहीं रखा है, जिससे राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं।

सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में मामला

सरकार की ओर से यह भी संकेत दिया गया है कि यूजीसी रूल्स 2026 से जुड़ा पूरा मामला सुप्रीम कोर्ट के दायरे में है। ऐसे में अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया के तहत ही होगा। केंद्र सरकार का दावा है कि वह सभी वर्गों के हितों को ध्यान में रखते हुए आगे बढ़ेगी।

यूजीसी रूल्स 2026 अब केवल शिक्षा से जुड़ा विषय नहीं रह गया है, बल्कि यह सामाजिक संतुलन, राजनीति और संविधानिक मूल्यों से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन चुका है। आने वाले दिनों में इस पर सरकार, अदालत और समाज की दिशा तय करने वाली भूमिका अहम मानी जा रही है।