ईरान को कसने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा अमेरिका, 2500 मरीन सैनिक और युद्धपोत पश्चिम एशिया रवाना
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने ईरान पर दबाव और बढ़ा दिया है। अमेरिका ने करीब 2500 मरीन सैनिकों और एक बड़े युद्धपोत को पश्चिम एशिया की ओर रवाना कर दिया है। इस कदम को ईरान के खिलाफ अमेरिका की सैन्य तैयारी को मजबूत करने के तौर पर देखा जा रहा है।
एक अमेरिकी अधिकारी ने एसोसिएटेड प्रेस को बताया कि 31वीं मरीन एक्सपेडिशनरी यूनिट और युद्धपोत यूएसएस त्रिपोली को पश्चिम एशिया की ओर जाने का आदेश दिया गया है। अधिकारी ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बताया कि यह तैनाती क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति को काफी बढ़ा देगी।
पश्चिम एशिया में बढ़ रही अमेरिकी सैन्य ताकत
अमेरिका लगातार पश्चिम एशिया में अपनी सैन्य ताकत बढ़ा रहा है। 31वीं मरीन एक्सपेडिशनरी यूनिट अमेरिका की तेज प्रतिक्रिया देने वाली सबसे महत्वपूर्ण सैन्य इकाइयों में से एक मानी जाती है।
इस यूनिट में हजारों प्रशिक्षित मरीन सैनिक, हेलीकॉप्टर, उभयचर वाहन और आधुनिक हथियार शामिल होते हैं। युद्धपोत यूएसएस त्रिपोली भी अत्याधुनिक तकनीक से लैस है और बड़े सैन्य अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
अमेरिका का यह कदम ऐसे समय पर सामने आया है जब ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है।
ईरान के शीर्ष नेताओं पर इनाम की घोषणा
अमेरिका ने ईरान के शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ भी बड़ा कदम उठाया है। अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने “रिवॉर्ड्स फॉर जस्टिस” कार्यक्रम के तहत ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई समेत कई प्रमुख अधिकारियों की जानकारी देने वालों को 10 मिलियन डॉलर तक का इनाम देने की घोषणा की है।
अमेरिकी नोटिस में उन अधिकारियों को विशेष रूप से निशाना बनाया गया है जो ईरान की सत्ता और सैन्य ढांचे में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
इस सूची में शामिल प्रमुख नामों में
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मोजतबा खामेनेई
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अली असगर हेजाजी (डिप्टी चीफ ऑफ स्टाफ)
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मेजर जनरल यहया रहीम सफावी (सैन्य सलाहकार)
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अली लारीजानी (सलाहकार)
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ब्रिगेडियर जनरल एस्कंदर मोमेनी (आंतरिक मामलों के मंत्री)
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इस्माइल खतीब (खुफिया और सुरक्षा मंत्री)
शामिल हैं।
अमेरिकी विदेश मंत्रालय का कहना है कि ये अधिकारी इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स से जुड़े हैं और विश्व स्तर पर सैन्य गतिविधियों के संचालन में अहम भूमिका निभाते हैं।
जानकारी देने वालों को मिलेगा सुरक्षित ठिकाना
अमेरिका ने अपने नोटिस में यह भी स्पष्ट किया है कि जो भी व्यक्ति इन अधिकारियों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी देगा उसे नकद इनाम के साथ सुरक्षित स्थान पर बसाने की सुविधा भी दी जा सकती है।
यह कदम उस समय उठाया गया है जब ईरान के शीर्ष नेतृत्व और सैन्य ढांचे को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव बढ़ गया है।
होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे भारतीय जहाज
इस बीच होर्मुज जलडमरूमध्य में भारतीय ध्वज वाले कई जहाजों के फंसे होने की खबरें भी सामने आई हैं।
भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फताली ने कहा कि इस मुद्दे को हल करने के लिए ईरान पूरी कोशिश कर रहा है।
पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि भारत और ईरान के बीच लंबे समय से दोस्ताना संबंध हैं और दोनों देशों के हित काफी हद तक समान हैं।
वैश्विक तनाव के और बढ़ने की आशंका
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका द्वारा सैनिकों और युद्धपोत की तैनाती से पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ सकता है। यदि स्थिति और बिगड़ती है तो इसका असर वैश्विक तेल बाजार, व्यापार मार्गों और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर भी पड़ सकता है।
ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ता यह टकराव अब पूरी दुनिया की नजरों में है और आने वाले दिनों में इसके और गंभीर होने की आशंका जताई जा रही है।