यूपी चुनाव 2027 से ही लागू हो सकता है 33% महिला आरक्षण, कानून में संशोधन की तैयारी में केंद्र सरकार

यूपी चुनाव 2027 से ही लागू हो सकता है 33% महिला आरक्षण, कानून में संशोधन की तैयारी

देश की राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए लाया गया महिला आरक्षण कानून अब तय समय से पहले लागू हो सकता है। केंद्र सरकार इस कानून में संशोधन कर 2027 के उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड विधानसभा चुनावों से ही 33 फीसदी महिला आरक्षण लागू करने पर विचार कर रही है। इसके लिए सरकार विपक्षी दलों से भी सहमति बनाने की कोशिश में जुट गई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार सरकार चाहती है कि महिलाओं को संसद और विधानसभा में प्रतिनिधित्व देने वाला यह ऐतिहासिक कानून जल्द लागू हो, ताकि राजनीति में महिलाओं की भागीदारी वास्तविक रूप से बढ़ सके।

कानून में बदलाव की तैयारी

दरअसल महिला आरक्षण अधिनियम 2023 (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) में यह प्रावधान रखा गया था कि लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण जनगणना और परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद लागू किया जाएगा।

लेकिन अब सरकार मान रही है कि जनगणना और परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होने में काफी समय लग सकता है। ऐसे में यदि मौजूदा प्रावधानों का इंतजार किया गया तो यह कानून 2029 के लोकसभा चुनाव तक भी लागू नहीं हो पाएगा। इसी कारण अब सरकार इस कानून में संशोधन कर इसे पहले लागू करने का रास्ता तलाश रही है।

2027 के चुनाव से शुरुआत की संभावना

रिपोर्ट्स के मुताबिक सरकार चाहती है कि महिला आरक्षण की शुरुआत 2027 में होने वाले उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड विधानसभा चुनावों से कर दी जाए। उसी समय पंजाब और गोवा में भी विधानसभा चुनाव होने हैं, इसलिए इन राज्यों में भी इसे लागू किया जा सकता है।

यदि यह फैसला होता है तो देश की राजनीति में महिलाओं के प्रतिनिधित्व का नया अध्याय शुरू हो सकता है।

लॉटरी सिस्टम से तय हो सकती हैं आरक्षित सीटें

जानकारी के अनुसार इन चुनावों में महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों का निर्धारण लॉटरी सिस्टम के जरिए किया जा सकता है। इसका मतलब यह होगा कि प्रत्येक चुनाव में अलग-अलग सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी, ताकि सभी क्षेत्रों को बराबर अवसर मिल सके।

विपक्ष से सहमति बनाने की कोशिश

इस मुद्दे पर व्यापक सहमति बनाने के लिए संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्षी दलों से बातचीत शुरू कर दी है। बताया जा रहा है कि उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से इस विषय पर दो बार संपर्क साधा है।

सरकार की कोशिश है कि इस संशोधन विधेयक को मौजूदा बजट सत्र में ही संसद में पेश किया जाए, जो 2 अप्रैल तक चलने वाला है। इसके लिए कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी दलों की राय भी ली जा रही है।

विपक्ष पहले से उठा चुका है सवाल

विपक्षी दल पहले ही महिला आरक्षण कानून के लागू होने में हो रही देरी पर सवाल उठा चुके हैं। कांग्रेस, डीएमके और तृणमूल कांग्रेस जैसे दलों का कहना रहा है कि यदि इस कानून को जनगणना और परिसीमन से जोड़ दिया गया तो इसे लागू होने में कई साल लग सकते हैं।

इसी वजह से कई दलों ने पहले ही मांग की थी कि सरकार इस कानून को जल्द लागू करे।

2023 में पारित हुआ था कानून

महिला आरक्षण कानून को सितंबर 2023 में संसद के विशेष सत्र में पारित किया गया था। इसे दोनों सदनों से मंजूरी मिलने के बाद राष्ट्रपति की स्वीकृति भी मिल चुकी है। इस कानून के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित करने का प्रावधान है।

हालांकि उस समय इसमें जनगणना और परिसीमन के बाद लागू होने की शर्त जोड़ दी गई थी। अब सरकार उसी प्रावधान में संशोधन कर महिला आरक्षण को जल्दी लागू करने की दिशा में कदम बढ़ा रही है

राजनीति में महिलाओं की बढ़ेगी भागीदारी

यदि यह संशोधन पारित हो जाता है और 2027 से महिला आरक्षण लागू होता है तो भारतीय राजनीति में महिलाओं की भागीदारी ऐतिहासिक रूप से बढ़ सकती है। इससे संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की संख्या में बड़ा इजाफा होने की संभावना है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को और मजबूत करने के साथ-साथ महिला सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा बदलाव साबित हो सकता है।