हरियाणा की भिवानी महेंद्रगढ़ की सीट का बदल रहा मिजाज

 पूर्व मंत्री किरण चौधरी के समर्थकों का दावा 


धर्मबीर सिंह से ज्यादा खतरनाक दान सिंह की जीत   


रणघोष खास. भिवानी- महेंद्रगढ़ से ग्राउंड रिपोर्ट  

भिवानी की जमीन से हरियाणा की राजनीति को इधर उधर करने की हैसियत रखने वाली पूर्व मंत्री किरण चौधरी के एक बयान ने भिवानी- महेंद्रगढ़ लोकसभा सीट से कांग्रेस उम्मीदवार राव दान सिंह की जीत की मजबूत दावेदारी को  पूरी तरह से पलट कर रख दिया है। किरण चौधरी समर्थकों का दावा है की इस चुनाव में राव दान सिंह की जीत उनके लिए भाजपा प्रत्याशी धर्मबीर सिंह से ज्यादा खतरनाक है। इससे अच्छा है की धर्मबीर सिंह तीसरी बार जीत की  हैट्रिक मार जाए। इससे किरण चौधरी की अपनी हैसियत वाली राजनीति काफी हद तक सुरक्षित हो जाएगी।  समर्थकों का कहना है की अगर दान सिंह जीत दर्ज करते हैं उनकी कुर्बानी पर जश्न उनके राजनीति विरोधी पूर्व सीएम भूपेंद्र हुडडा मनाएगे। भविष्य में भी उनकी राजनीति के दरवाजे बंद होने के आसार बन जाएगे। इस बार भी किरण चौधरी की बेटी श्रुति चौधरी की टिकट साजिश के तहत काटी गई जबकि किरण चौधरी का परिवार चुनाव को लेकर पहले ही होमवर्क कर चुका था। ऐन वक्त पर टिकट का काटना एक तरह से बंसीलाल परिवार की विरासत की हैसियत बताना था जिससे उनके समर्थकों में जबरदस्त गुस्सा और रोष है। यह कांग्रेस हाईकमान का गलत निर्णय था। अगर किरण चौधरी खामोश रहती है तो चार महीने बाद होने वाले हरियाणा विधानसभा चुनाव में भी उनके परिवार को अच्छी खासी कीमत चुकानी पड़ेगी। वह चाहकर भी अपने समर्थकों में जोश व मनोबल को बनाए रखने में कामयाब नही हो पाएगी। इसलिए इस चुनाव में किरण चौधरी ने ऐन वक्त पर अपनी अनदेखी की पीड़ा को सार्वजनिक कर पूर्व सीएम हुडडा एवं राव दान सिंह के इरादों को काफी हद तक रोक दिया है। किरण चौधरी के मुखर हो जाने से भाजपा उम्मीदवार चौधरी धर्मबीर सिंह को एक बार फिर घर बैठे ऐसी ताकत मिल गई है जिसकी उन्हें बेहद जरूरत थी। महेंद्रगढ़ जिले के यादव बाहुल्य क्षेत्र में गुरुग्राम से उम्मीदवार कद्दावर नेता राव इंद्रजीत सिंह पहले ही डंके की चोट पर अपने समर्थकों एवं यादव समाज को चौधरी धर्मबीर सिंह का मजबूती से साथ देने की अपील कर चुके हैं। यहा बता दे की यह सीट पूरी तरह से जाट- यादव जातीय समीकरण के आधार पर ही हार जीत का गणित तय करती आ रही है। यहां से श्रुति चौधरी कांग्रेस से सांसद रह चुकी है और पिछले दो चुनाव चौधरी धर्मबीर सिंह से हारती रही है। धर्मबीर सिंह लोकसभा चुनाव नही लड़ने की इच्छा जता चुके हैं लेकिन हाईकमान एवं राव इंद्रजीत सिंह के कहने पर वे तीसरी बार मैदान में उतरे हैं। ऐसे में किरण चौधरी के समर्थकों का कहना है की अगर दान सिंह इस सीट से हार जाते हैं तो 2029 में श्रुति चौधरी की दावेदारी बेहद मजबूत हो जाएगी। वह किस तोर पर होगी यह आने वाला समय बताएगा। कुल मिलाकर किरण चौधरी का ऐन वक्त पर अपनी नाराजगी जताना सीधे तौर पर राव दान सिंह की मजबूत दावेदारी को रोककर इधर उधर करना है। आने वाले दो तीन रोज में भी तस्वीर काफी हद तक साफ हो जाएगी। 4 जून को आने वाले परिणाम यह बता देंगे की इस चुनाव में जातीय समीकरण ने किसका गणित बिगाड़ा और किसे जीत तक पहुंचाया।