हरियाणा नगर निकाय चुनाव की तस्वीर साफ होने में महज दो सप्ताह का समय भी नही बचा है की उससे पहले ही भाजपाई हाईकमान के सामने श्रेय लेने के लिए जनता के समक्ष खुद का मजाक बनने व बनाने में भी कोई संकोच नही कर रहे हैं।
रेवाड़ी में नगर निकाय चुनाव को लेकर राजनीति ने अब गली मोहल्लों में पूरी तरह से शोर मचाना शुरू कर दिया है। नया कुछ नही है बस कुछ चेहरे बदले हैं और बोलने का अंदाज। शहर के कुल 32 वार्डों में अधिकांश सीटों पर सीधा मुकाबला भाजपा- कांग्रेस के बीच है। चेयरपर्सन के लिए यह सीट एससी महिला आरक्षित है। जिस पर भाजपा, कांग्रेस के अलावा निर्दलीय उम्मीदवार भी सीधी टक्कर दे रहे हैं।
इस रिपोर्ट में चर्चा हो रही है भाजपा में अंदर- बाहर के मूल चरित्र की। जिसके प्रमाण भी अब खुद ही सामने आ रहे हैं। चार दिन पहले रेवाड़ी विधायक लक्ष्मण सिंह यादव ने पहले से ही निर्धारित अपनी ब्रज यात्रा पूरी करने के बाद चुनावी मैदान संभाल लिया था। उन्होंने सबसे पहले पत्रकारों के समक्ष तमाम विरोधाभास, गुटबाजी को विराम देते हुए कहा की उन्होंने भाजपा उम्मीदवारों के पक्ष में चुनाव प्रचार भी तेज कर दिया है। टिकट को लेकर जो टकराव नजर आ रहा था उसे खत्म करने के लिए भी सभी भाजपाई मंचों पर एकजुट भी नजर आने लगे थे। एक बार तो लगा की भाजपा ने सबकुछ कंट्रोल कर लिया है लेकिन वह बाहरी तौर पर दिखावा था। यहां भाजपा की एकजुटता ब्यूटीपार्लर वाली सुंदरता की तरह नजर आ रही है ताकि किसी तरह चुनाव तक जनता की आंखों में एकजुटता वाली सुंदरता का भ्रम बनाए रखे। भाजपा में किस हद तक गुटबाजी व एक दूसरे को नीचा दिखाने की हरकतें की जा रही हैं। इसे नगर पार्षद भाजपा उम्मीदवारों के कार्यालय उदघाटन के घटनाक्रमों से आसानी से समझा जा सकता है। जिस कार्यालयों का उदघाटन रेवाड़ी विधायक लक्ष्मण सिंह यादव अपने हाथों से करके जा रहे हैं। थोड़ी देर बाद उसी कार्यालयों का अलग से रिबन काटा जा रहा है। शहर के वार्ड नंबर 7 व वार्ड नंबर 22 में यह तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। कोई भाजपाईयों से पूछे की क्या एक ही कार्यालय का बार बार उदघाटन करने से शहर की तस्वीर बेहतर हो जाएगी। भाजपा के आंतरिक सूत्रों की माने तो हाईकमान के समक्ष श्रेय लेने के लिए ऐसा ड्रामा किया जा रहा है। चुनाव को लेकर प्रतिदिन रिपोर्ट भेजी जा रही है की कौन कितनी मेहनत कर रहा है। इसलिए जीत दर्ज होने पर इसका श्रेय लेने के लिए सबूत दिखाने के तौर पर यह सबकुछ किया जा रहा है। हालांकि यह छोटे स्तर का चुनाव है। मतदाता आमतौर पर उम्मीदवार की छवि, व्यवहार के साथ साथ कुछ हद तक पार्टी बैनर भी देखता है। इसलिए कार्यालयों के अलग अलग उदघाटन वाली घटनाओं से ज्यादा असर नही पड़ेगा लेकिन इतना जरूर है की जो भाजपा खुद को बूथ लेवल से ही कैडर होने का दावा करती है उसकी असलियत सामने लाने के लिए ये सबूत पर्याप्त है। बताया जा रहा है की शहर में हर चौथे, पांचवे कार्यालय उदघाटन पर इस तरह का नजारा सामने आ रहा है। अब देखना यह है की हाईकमान किस स्तर पर क्या कदम उठाता है। इतना जरूर है की गुटबाजी के जो हालात एक समय में कांग्रेस के हुआ करते उसकी जगह अब भाजपा पूरी जिम्मेदारी के साथ ग्रहण करती जा रही है। अंतर इतना है की कांग्रेस में विस्फोट तुरंत हो जाता है भाजपा समय रहते कंट्रोल करने में कामयाब हो जाती है। इस बार के चुनाव में चेयरपर्सन टिकट केा लेकर भाजपा का आंतरिक विरोध कंट्रोल में रहा लेकिन कांग्रेस में गुटबाजी फटकर निर्दलीय उम्मीदवार शकुंतला भांडोरिया की शक्ल में मैदान में आ गईं।