एम्स शिलान्यास को लेकर 30 दिन का एल्टीमेटम, कुरुक्षेत्र में गुरुनाम चढुनी ने उठाया रेवाड़ी का मुददा
-6 को जिला सचिवालय पर प्रदर्शन, उसके बाद अनिश्चित कालीन धरना आमरण अनशन शुरू
रणघोष अपडेट. रेवाड़ी. कुरुक्षेत्र
जमीन के कम मुआवजा को लेकर मानसेर- पटौदी में धरने पर बैठे किसान, माजरा एम्स शिलान्यास को लेकर हो रही देरी को लेकर हो रही पंचायतें एवं रेवाड़ी में जमीन का मुआवजा देने के बाद उस पर बने स्ट्रक्चर की राशि देने में आनाकानी कर रहे एचएसआईआईडीसी अधिकारियों की गलतियों का खामियाजा सरकार में बैठे मंत्रियों एवं नेताओं को भुगतना पड़ सकता है। एम्स संघर्ष समिति ने सरकार को चेतावनी दी है कि अगर 2 अक्टूबर से पहले तक सरकार ने एम्स के शिलान्यास की घोषणा नहीं की तो क्षेत्र में एक बड़ा आंदोलन खड़ा हो जाएगा। सरकार एक तरफ एक दिन मे 2 हजार करोड़ की परियोजनाओं का शिलान्यास एवं उदघाटन कर झूठी वाही वाही लूट रही है वहीं 2015 से एम्स को लेकर चली परियोजना अभी तक जमीन पर आने के लिए छट पटा रही है। यही स्थिति रेवाड़ी में आए एमआरटीएस प्रोजेक्ट की है। एचएसआईआईडीसी के अधिकारियों ने तीन साल पहले अपनी शर्तों व नियम कायदे से पहले किसानों की जमीन को अधिग्रहण कर लिया। जमीन का मुआवजा तो दे दिया लेकिन उस पर बने भवनों की राशि देने में पिछले एक साल से आनाकानी कर रही है। सबसे दिलचस्प बात यह है कि मुख्यमंत्री से लेकर यहां के दिग्गज नेताओं को इन परियोजनाओं की आड में अपना खेल कर रहे अधिकारियों की असलियत का पता तक नहीं है। पिछले एक माह के दरम्यान किसान व आमजन सड़कों पर उतर रहे हैं तो उन्हें पता चल रहा है। रेवाड़ी में जमीन पर बने भवनों के मुआवजा को लेकर सोमवार को कुरुक्षेत्र में किसानों की हुई राज्य स्तरीय मीटिंग में भाकियू के राष्ट्रीय अध्यक्ष गुरुनाम सिंह चढुनी ने भी इस मुद्दे को मंच पर प्रमुखता के साथ रखा। साथ ही चेतावनी दी कि अब पानी सिर के ऊपर से पार हो चुका है। सरकार में बैठे नेता एवं मंत्री सत्ता सुख में अपनी सुध बुध खो बैठे हैं। उन्हें केवल अपना ही विकास दिख रहा है। किसान किस कदर अपने हक के लिए सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर है। आमतौर पर शांत रहने वाला दक्षिण हरियाणा अब सुलगने लगा है तो समझ जाइए फिर बचा क्या है। जब सरकार के पास किसी प्रोजेक्ट लागू करने की हैसियत ही नहीं थी कि तो जमीन अधिग्रहण कर बिना पूरा मुआवजा दिए उस पर मालिक किस अधिकार से बन गईं। यह तो सरासर सरकार के नाम पर ही दादागिरी हो गईं। ऐसा तो फिल्मों में बदमाशों को करते हुए देखा था अब किसानों के साथ सरकार वहीं रैवया अपना रही है। यह विनाश काले विपरित बुद्धि है। कायदे से मुआवजे में देरी करने वाले अधिकारियों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई होनी चाहिए। यहां बता दें कि कुछ दिन पहले राज्य के कैबिनेट मंत्री डॉ. बनवारीलाल ने जब अधिकारियों से सीधे सपाट बात की तो वे मुआवजा देने के लिए सहमत हो गए लेकिन यहां भी चालाकी दिखा गए। उन्होंने इसके लिए कोई समय सीमा निर्धारित नहीं की। यानि मुआवजा मिलेगा लेकिन कब मिलेगा। यह कुछ नहीं बताया। कमाल की बात यह है कि पटौदी- मानेसर में किसान जमीन का कम मुआवजा को लेकर आंदोलनरत है जबकि रेवाड़ी में किसानों को सरकार की तरफ से तय किए गए मुआवजे को लेकर ही सड़कों पर उतरना पड़ रहा है। उधर भाकियू चढुनी के जिला अध्यक्ष समे सिंह ने कहा कि 6 सितंबर को मुआवजा को लेकर उपायुक्त के माध्यम से सीएम को ज्ञापन भेजा जाएगा। दो दिन बाद जिला सचिवालय के सामने राजीव चौक पर धरना प्रदर्शन शुरू होगा। उसके बाद भी सरकार नहीं जागी तो आमरन अनशन शुरू हो जाएगा।
एम्स को लेकर अब बहुत हो चुका सरकार का आश्वासन
उपतहसील मनेठी के प्रांगण में एम्स संघर्ष समिति के प्रधान श्योताज सिंह की अध्यक्षता में हुई मीटिंग में सरकार व प्रशासन को 2 अक्टूबर तक शिलान्यास की डेट तय करने का एल्टीमेटम दिया गया। इससे पहले 6 सितंबर को सरकार को सूचित किया जाएगा। बैठक में कामरेड राजेंद्र सिंह, ओमप्रकाश सैन, कर्नल राजेंद्र सिंह, मास्टर लक्ष्मण सिंह, बीडी यादव, भूप सिंह आर्य, देशराज यादव, कंवल सिंह, बलवंत सिंह, सांवल सिंह, रामेश्वर दयाल, रामानंद, रामस्वरूप, मास्टर दयाराम यादव, कप्तान मनफूल सिंह, दिलबाग सिंह, रोशनलाल, प्रो. वीपी यादव समेत अनेक ग्रामीण मौजूद थे।