जिले के मॉडल संस्कृति स्कूल विजिलेंस के निशाने पर, कुछ शिक्षकों ने डर के मारे चार्ज नहीं लिया

 रणघोष अपडेट. रेवाड़ी


एक तरफ शिक्षक दिवस पर शिक्षण संस्थाओं में शिक्षकों के सम्मान में कार्यक्रम आयोजित हो रहे हैं वहीं कुछ स्कूलों में भवन निर्माण एवं मदो की राशि में हेराफेरी करने के मामले में शिक्षा निदेशालय की तरफ से जिला स्तर पर गठित कमेटी विजिलेंस के सहयोग से दूध का दूध पानी का पानी करने में लगी हुई है।  जिन स्कूलों पर विजिलेंस ने शक के दायरे में लिया है उसमें मॉडल संस्कृति स्कूलों की संख्या ज्यादा है। इसमें गढ़ी बोलनी, पीथड़ावास, मॉडल स्कूल राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय कुंड, आशिया की गौरावास, नांगल पठानी के सरकारी स्कूल विशेष तौर से शामिल है। अधिकारियों की माने तो विजिलेंस जांच की सूचना फैलते ही कुछ स्कूलों में प्राचार्यों ने चार्ज लेने से मना कर दिया है। उन्हें शक है कि पूर्व के प्राचार्य की गड़बड़ियों का खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ सकता है। आनन फानन में रिकार्ड दुरुस्त किया जा रहा है। यहां बता  दें कि यह जांच इसलिए की जा रही है कि कुछ स्कूल के प्राचार्यों ने नियमों  को ताक पर रखकर जिला शिक्षा विभाग के कर्मचारी व एकाध अधिकारियों से मिलकर स्कूल ग्रांट की फाइलों को चंडीगढ़  भिजवा दिया। वहां से भी मिलकर उस बजट को स्वीकृत करा लिया जबकि नियमानुसार सभी स्कूलों में समान विकास के तहत जरूरत के आधार पर ग्रांट जारी होती है। इसमें जिला स्तर पर गठित कमेटी की अनुमति जरूरी होती है। ग्रांट आने के बाद भी  कमेटी सदस्य मौके पर जाकर चल रहे कायों का मूल्याकंन करते हैं ताकि पारदर्शिता बनी रहे। लेकिन कुछ स्कूलों के प्राचार्यों को विश्वास में लेना ही उचित नहीं समझा। प्रदेश स्तर पर जब इस तरह  की शिकायतें पहुंचना शुरू हुई तो जिला स्तर पर एडीसी की अध्यक्षता में विजिलेंस टीम ने अपने स्तर पर ऐसे स्कूलों की जांच शुरू कर दी जिसने सबसे ज्यादा ग्रांट ली है। अधिकारियों की माने तो रिकार्ड आने पर ही असल सच सामने आएगा कि स्कूल मुखियाओं ने अपने कार्य में कितनी पारदर्शिता बरती।  विजिलेंस द्वारा भेजे गए नोटिस में  2018-19 से वर्ष 2020-21 में शिक्षा निदेशालय से प्राप्त अनुदान राशि  की पूरी रिपोर्ट एवं निर्माण कार्य से संबंधित एमबी, बिल, रजिस्टर, टेंडर प्रक्रिया इत्यादि एक सप्ताह में एडीसी कार्यालय में जमा कराने को कहा है।

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