-डीसी यशेंद्र सिंह के फोन पर मौके पर पहुंचे कर्मचारी, नागरिकों का दावा खाली जमीन के नाम पर अवैध कब्जेधारियों से वसूली कर रहे थे अधिकारी- कर्मचारी
– रेजागंला पार्क विकास समिति का संघर्ष रंग लाया, करीब 20 एकड़ जमीन पार्क में शामिल होगी
रणघोष अपडेट. रेवाड़ी
शहर के सबसे बड़े रेजागंला शौर्य पार्क को अपनी असली जमीन मिलने जा रही है। 20 सालों से अधिक समय से इस पार्क के नाम पर दर्ज 20 एकड़ से ज्यादा खाली जमीन पर खेती बाड़ी से लेकर अवैध पार्किंग एवं झुग्गी बस्ती बनाकर कब्जा किया हुआ था। शोर मचाने वाला कोई नहीं था लिहाजा हुडा के अधिकारी एवं कर्मचारियों के लिए यह जमीन अच्छी खासी खुराक देने का काम कर रही थी। दो माह पहले शहर के कुछ जागरूक एवं प्रबुद्ध नागरिकों ने रेजागंला पार्क विकास समिति का गठन कर पार्क के रिकार्ड को खंगाला तो वे हैरत में पड़ गए। 20-25 साल पहले हुड्डा ने हर जिले के बड़े शहरों के सौंदर्यीकरण के मद्देनजर सेक्टरों के बीच में बड़े पार्क विकसित करने के लिए जमीनें अधिग्रहित की थी। शहर के राजेश पायलट चौक स्थित सेक्टर 19 में भी 46 एकड़ जमीन पार्क के नाम पर हुडा ने निजी मालिकों से खरीदी थी। वर्तमान में महज 10-12 एकड़ पर पार्क बना हुआ है। इस दौरान अलग अलग कारणों से 16 एकड़ से ज्यादा जमीन वापस निजी लोगों के पास समारोह स्थल, पेट्रोल पंप एवं अन्य कार्यो के नाम पर चली गईं। बची 15-20 एकड़ खाली जमीन पर कुछ लोग खेती कर रहे हैं तो कुछ ने अवैध तौर पर पार्किग का धंधा चला रखा है बाकि पर झुग्गियां बन गई है। पता होने के बावजूद इन्हें हटाने का आज तक हुडा अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने कोई प्रयास नहीं किए जबकि इस पर किसी तरह का कोई विवाद या स्थाई कब्जा नहीं है। रेजागंला पार्क विकास समिति बनने के बाद यह खुलासा सामने आया। समिति के अध्यक्ष रिटायर डिप्टी डायरेक्टर रोजगार विभाग अशोक कुमार यादव ने अपने समिति सदस्यों के साथ मिलकर पार्क की जमीन को लेकर मोर्चा खोल दिया। सर्वप्रथम उन्होंने हुडा को पत्र लिखकर स्थिति से अवगत कराया। कायदे से हुडा अधिकारियों को तुरंत एक्शन लेना चाहिए था जो कार्य उनका है उसे पार्क समिति कर रही है। कुछ नहीं हुआ। समिति में रिटायर अधिकारी एवं जागरूक लोग थे उन्हें पता था कि हुडा के अधिकारी एवं कर्मचारी पार्क की खाली जमीन के नाम पर अपना खेल कर रहे हैं। इसलिए उन्होंने आरटीआई, सीएम विंडो के साथ साथ कष्ट निवारण समिति की मीटिंग में भी इस मुद्दे को प्रमुखता के साथ उठाया। समिति के अध्यक्ष राज्य मंत्री ओमप्रकाश यादव ने इसे गंभीरता से लेते हुए प्रशासनिक अधिकारियों से 15 दिन में जमीन पर कब्जा छुड़ाकर पार्क को देने के आदेश दिए। उपायुक्त यशेंद्र सिंह ने भी तुरंत एक्शन लिया और हुडा अधिकारियों से रिपोर्ट मांग ली। समिति के सदस्य जानते थे कि हुडा के अधिकारी एवं कर्मचारी कोई ना कोई बहाना बनाकर इस मसले को दबाने का प्रयास करेंगे इसलिए वे राज्य मंत्री ओमप्रकाश यादव के लगातार संपर्क में रहे। इसी का नतीजा रहा कि उपायुक्त के फोन करने के बाद हुडा कर्मचारी 17 दिसंबर को पार्क की जमीन की पैमाइश करने पहुंचे। पूरी रिपोर्ट तैयार की ओर माना की इतने सालों से खाली जमीन का अवैध कब्जेधारी अपने हिसाब से इस्तेमाल कर रहे थे। इसलिए इस जमीन पर पार्क का स्वरूप विकसित करने के लिए बागवानी विभाग की जिम्मेदारी लगाई गई है कि वह जल्दी इसे विकसित कर पार्क में तब्दील कर दें। यहां गौर करने वाली बात यह है कि अगर दो माह पहले रेजागंला पार्क विकास समिति का गठन नहीं होता और समिति सदस्य आगे बढ़कर कार्रवाई नहीं करती तो खाली जमीन के नाम पर हुडा एवं अवैध कब्जेधारी चांदी कूटते आ रहे थे। यहां सबसे बड़ा सवाल यह है कि एक तरफ हुडा किसी छोटे से टुकड़े पर रेहड़ी तक खड़ी नहीं होने देती वह कई सालों से 20 एकड़ के करीब जमीन के इस्तेमाल पर कैसे आंख बंद कर लेती है। सीधी सी बात यह है कि यह सबकुछ जमीनों पर अवैध मंथली किराया या वसूली के बिना संभव नहीं है। इसी तरह राजेश पायलट चौक से राव अभय सिंह चौक बाइपास की ग्रीन बैल्ट का भी इसी तरह इस्तेमाल हो रहा है। यहां कोई बोलने वाला नहीं है इसलिए यहां भी वसूली का खेल चल रहा है। समिति की सफलता में अध्यक्ष अशोक कुमार यादव के अलावा परमात्मा शरण यादव, रामौतार, विजय कौशिक, ऊषा आर्य, नीतू, ओमप्रकाश, विवेक, सौरभ, धर्मपाल, प्रदीप, मुकेश, राजेश, पवन, अरविंद, एनपीएस यादव, प्रवीन, अरूण, रामजस, अमर सिंह समेत अनेक सदस्यों ने विशेष भूमिका निभाईं।