कितलाना टोल पर गूंजे नारे- मोदी देखा तेरा खेल, महंगी खाद महंगा तेल

सरकार की जनविरोधी नीतियों के कारण किसान-मजदूरों के आगे संकट के बादल


बंगाल चुनाव हारते ही केंद्र सरकार अपने असली रंग में आ गई है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें 68 डॉलर प्रति बैरल से कम होने के बावजूद पिछले चार दिन से पैट्रोलियम पदार्थों के मूल्य में लगातार वृद्धि हुई है। यह बात वक्ताओं ने कितलाना टोल पर चल रहे किसानों के अनिश्चितकालीन धरने को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने कहा कि आज पैट्रोल रिकॉर्ड 89.70 और डीजल 82.64 रुपए प्रति लीटर पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि जनता को पैट्रोलियम पदार्थों पर पचास प्रतिशत से अधिक टैक्स चुकाना पड़ रहा है। सरकार को एक्साइज ड्यूटी और वेट में कमी करके लोगों को राहत देनी चाहिए पर उसके उलट खुद का खजाना भरने के साथ रिलायंस को फायदा पहुँचाने में मशगूल है।उन्होंने कहा कि बुआई के समय किसान डीएपी के दाम बढ़ने से पहले ही हताश था। रही सही कसर डीजल की बढ़ी कीमतों ने पूरी कर दी है। उन्होंने कहा कि हरियाणा सरकार भी केंद्र के पदचिन्हों पर है। मनरेगा पर रोक लगने से मजदूरों को गुजर बसर करना मुश्किल हो रखा है। उन्होंने कहा कि काम ना मिलने पर बेरोजगारी भत्ता मिलना चाहिए पर वो दूर की कौड़ी लग रही है। सत्ता में बैठे लोगों का ध्यान केवल अपने धनाढ्य मित्रों का लाभ पहुंचाने पर है। गरीब और मध्यम वर्ग से उन्हें कोई सरोकार नहीं है।

संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर कितलाना टोल पर धरने के 134वें दिन खाप सांगवान 40 के सचिव नरसिंह डीपीई, किसान सभा के रणधीर कुंगड़, युवा कल्याण संगठन के कमल प्रधान, जाटू खाप 84 के राजसिंह जताई, चौगामा खाप के मीरसिंह निमड़ीवाली, प्रताप सिंहमार, संतोष देशवाल ने संयुक्त रूप से अध्यक्षता की। उन्होंने कहा कि जब तक तीनों काले कानून रद्द नहीं होते किसान, मजदूर पीछे नहीं हटेंगे। पैट्रोलियम उत्पादों में वृद्धि के खिलाफ आज कितलाना टोल पर मोदी देखा तेरा खेल, महंगी खाद महंगा तेल के जोरदार नारे गूंजे। धरने का मंच संचालन कामरेड ओमप्रकाश ने किया। इस अवसर पर मास्टर ताराचन्द चरखी, सुरजभान सांगवान, सुरेन्द्र कुब्जानगर, रणधीर धिकाड़ा, सुखदेव पालवास, मास्टर ओमप्रकाश कितलाना, धर्मेन्द्र छपार, सुबेदार सतबीर सिहं, रामफल देशवाल, कप्तान रामफल डोहकी, निहाल सिंह डोहकी, सत्यवान कालूवाला, बलजीत मानकावास, जगमाल शीशवाला, ओमप्रकाश सारगंपुर, राजेन्द्र घिकाड़ा, ओम प्रजापति डोहकी इत्यादि मौजूद थे।

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