जमीन का मुआवजा- एमएसपी समेत चार मांगों को लेकर किसानों का जोरदार प्रदर्शन

विधायक कार्यालय को घेरा, बावल में डॉ. बनवारीलाल आवास पर होगा प्रदर्शन


–जमीन अधिग्रहण के  मुआवजा इश्यू को भाजपा पाल पोषकर बड़ा कर रही है..जितना ज्यादा देरी उतना बड़ा नुकसान

–   मुआवजा को लेकर भाजपा नेताओं के पास कोई जवाब नहीं,  कहीं परियोजना को लेकर दाल में कुछ काला तो नहीं 

– विधायक चिरंजीव राव भी किसानों की मांगों के समर्थन में धरने पर बैठ गए।


रणघोष अपडेट. रेवाड़ी


किसान संगठनों ने गुरुवार को कपास- बाजारा फसल का बकाया बीमा, एमआरटीएस के लिए  जमीन अधिग्रहण का मुआवजा, एमएसपी, व किसानों की जुमला मुश्तर्का मालकान शामलात देह भूमि चार प्रमुख मांगों को लेकर शहर में जोरदार प्रदर्शन किया। किसानों ने मॉडल टाउन स्थित विधायक चिरंजीव राव के आवास व कार्यालय का घेराव किया। किसान 26 अगस्त को बावल स्थित राज्य के कैबिनेट मंत्री डॉ. बनवारीलाल के आवास पर घेराव करेगे। किसानों ने कहा कि जल्द ही उनकी जायज मांगों पर अमल नहीं हुआ तो यह प्रदर्शन उग्र होगा। हमें रोड जाम करना पड़ा वह भी करेंगे। हम जान दें देंगे लेकिन अपना हक लेकर रहेंगे। 

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गुरुवार सुबह 10 बजे अलग अलग संगठनों से जुड़े किसान माडल टाउन में एकत्र हो गए। इसके बाद प्रदर्शन करते हुए विधायक चिरंजीव राव के आवास व कार्यालय पर पहुंचे। वहां धरना प्रदर्शन किया। भाकियू चढुनी प्रधान समे सिंह, उपप्रधान रोहताश,उपप्रधान ईश्वर महलावत,  प्रधान महिला किसान संगठन की अध्यक्ष लक्ष्मीबाई, राकेश ढोकिया , भूपेन्द्र राठी आईटी सेल प्रधान, सवाचंद नंबरदार ,मुन्नी देवी , सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता विजय यादव, ओमप्रकाश धनखड़, सतेंद्र चेयरमैन नाहड़ समेत अनेक किसानों ने बताया कि एक तरफ भाजपा- जेजेपी सरकार खुद को किसानों का सबसे बड़ा हितैषी होने का नाटक कर रही है वहीं किसानों को चारों तरफ से मारा जा रहा है। विकास की परियोजना के नाम पर पहले जमीन को अधिग्रहण किया जाता है। उसके बाद किसानों को मुआवजा के लिए अधिकारी चक्कर कटवाते हैं। कमीशनबाजी का खेल किया जाता है। एमआरटीएस (मास रैपिड ट्रांजिट सिस्टम) योजना के तहत एचएसआईआईडीसी ने गांव खलियावास, ढुंगरवास व आस पास गांवों  की जमीन को दो साल पहले अधिग्रहित किया था। पिछले एक साल से किसान मुआवजा को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। सरकार के पास जब परियोजना को लेकर बजट खर्च करने की हैसियत नहीं है तो जमीन का अधिग्रहण क्यों किया गया। किसानों ने कहा कि सरकार पर अफसरशाही पूरी तरह से हावी है इसलिए काम उसी के होंगे जो कमीशनबाजी के रास्ते पर चलेगा नही तो डीआरओ कार्यालय 15 बार मुआवजा को लेकर रिमाइंडर भेज चुका है। एक बार भी स्थिति को स्पष्ट नहीं किया गया। इसी तरह किसान बिल वापस लेते हुए सरकार ने एमएसपी लागू करने की बात कहीं थी। उस पर भी वायदा खिलाफी की गईं। इसी तरह सरकार किसानों की जुमला मुश्तर्का मालकान शामलात देह भूमि पर अपना कब्जा करना चाह रही है जो कि किसी भी हाल में नहीं करने दिया जाएगा। किसान मर तो सकते हैं लेकिन अपनी 1इंच भी जमीन नहीं देंगे। उन्होंने कहा कि अगर धरना प्रदर्शन के दौरान कोई हिंसा या जान माल की हानि होती  है तो इसके लिए सरकार की नाकामियां व फेल हो चुका सिस्टम पूरी तरह से जिम्मेदार होगा। इस दौरान विधायक चिरंजीव राव भी किसानों की मांगों के समर्थन में धरने पर बैठ गए। उन्होंने कहा कि यह जायज मांगें हैं। यहां के सांसदों को भी इनकी मांगें प्रधानमंत्री तक पहुंचाना चाहिए। 

डॉ. बनवारीलाल भी नही  कर पाए स्थिति स्पष्ट, अब किसान करेंगे घेराव

मुआवजा को लेकर किसान राज्य के कैबिनेट मंत्री डॉ. बनवारीलाल को 15 दिन पहले ज्ञापन भेज चुके हैं। डॉ. बनवारीलाल ने भी अपने स्तर पर मुआवजा नहीं मिलने की वजह का पता लगाया। यहां तक की सीएम से मिलकर समाधान कराने का भरोसा भी दिलाया लेकिन वे भी अपने प्रयास में सफल नहीं हो पाए। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर कैबिनेट स्तर के मंत्री को भी अधिकारी व चंडीगढ़ में बैठे पदाधिकारी स्थिति को स्पष्ट क्यों नहीं कर पा रहे हैं। ऐसे में अगर यहीं स्थिति रही तो भाजपा- जेजेपी पार्टी को राजनीतिक तौर पर भी काफी नुकसान हो सकता है। किसान सिर्फ इतना ही सवाल कर रहे हैं कि आखिर उन्हें एक साल से मुआवजा किस आधार पर नहीं मिला। अगर यह परियोजना सफल नहीं है तो तस्वीर साफ करें। बजट नहीं है तो फिर इस परियोजना को शुरू क्यों किया। सबसे बड़ी बात रेवाड़ी में कुल मुआवजा 201 करोड़ 53 लाख 62 हजार 130 रुपए तय हुआ था जिसमें  एचएसआईआईडीसी इस परियोजना पर 120 करोड़ रुपए 2021 से पहले जारी कर चुकी है। महज बकाया 81 करोड़, 53 लाख, 62 हजार 130 रुपए को लेकर किसान संघर्षरत है। इस मुआवजा को लेकर कोई विवाद या आपत्ति भी नहीं है।