रणघोष की सीधी सपाट बात

जो दक्षिण हरियाणा किसान आंदोलन में शांत था, इन दिनों उबाल पर, मुश्किल में भाजपा नेताा


–  देखा जाए तो मुआवजा को लेकर दो जिलों में जिस तरह किसानों में तेजी से रोष फैल रहा है उसकी जिम्मेदार खुद भाजपा सरकार और यहां के स्थानीय नेता जिम्मेदार है। यहां के नेताओं का कहना है कि चंडीगढ़ में उनकी सुनवाई नही है। जनहित की बात कहने के लिए गिड़गिड़ाना पड़ता है। जब स्थिति हाथ से निकल जाती हैं फिर उन्हें आगे कर दिया जाता है।


रणघोष खास. गुरुग्राम. रेवाड़ी. मानेसर से ग्राउंड रिपोर्ट 

जिस किसान आंदोलन ने पूरे देश की राजनीति को हिला दिया था। ताकतवर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को किसानों के तीनों बिलों को रद्द करना पड़ा। उस दौरान दक्षिण हरियाणा इस आंदोलन को लेकर बेहद शांत व चुपचाप रहा। अन्य राज्यों के किसानों को यहां आकर रोड जाम टोल फ्री करवाना पड़ा था। आज यही दक्षिण हरियाणा पिछले कुछ दिनों से किसानों के धरना प्रदर्शन से उबाल पर है। गुरुग्राम- मानसेर- पटौदी में किसान जहां जमीन का कम मुआवजा देने को लेकर धरना प्रदर्शन कर नेशनल हाइवे तक जाम कर रहे हैं। राकेश टिकैत, योगेंद्र यादव, गुरुनाम सिंह चढुनी समेत राष्ट्रीय स्तर के बड़े नेता इस आंदोलन में कूद पड़े हैं। वहीं रेवाड़ी में किसान मुआवजा नहीं मिलने को लेकर एक साल से संघर्ष कर रहे हैं। कमाल की बात है कि गुरुग्राम में किसान मुआवजा को लेकर संतुष्ट नहीं है तो रेवाड़ी में जो मुआवजा सरकार ने तय कर दिया है वह किसानों को नहीं दे रही है। इसके अलावा एमएसपी, कपास- बाजारा फसल का बकाया बीमा, किसानों की जुमला मुश्तर्का मालकान शामलात देह भूमि की प्रमुख मांगों ने प्रदेश भर में एक बार फिर किसानों को एकजुट कर दिया है। गौर करने लायक बात यह है कि भाजपा किसी भी सीनियर एवं जिम्मेदार नेता व मंत्रियों के पास इन मांगों के संदर्भ में कोई जवाब नहीं है। रेवाड़ी में तो एमआरटीएस के लिए अधिग्रहित की गई जमीन के मुआवजा को लेकर भाजपा के सीनियर नेताओं का एक धड़ा पिछले 20 दिनों से चंडीगढ़ से यह जानकारी ले पाने में असफल रहा है कि मुआवजा किस आधार पर रोका हुआ है। इसमें पार्टी के चार प्रदेश प्रवक्ता से लेकर भाजपा किसान मोर्चा के सभी छोटे बड़े पदाधिकारी, मंत्री व अध्यक्ष तक शामिल है। पूर्व विधायक रणधीर सिंह कापड़ीवास ने जरूर दो दिन पहले चंडीगढ़ बातचीत कर स्थिति को साफ किया था कि इस परियोजना को लेकर कोई विरोधाभास नहीं है। जल्द ही मुआवजा की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। यह मुआवजा एचएसआईआईडीसी के माध्यम से जारी होना है। यह महकमा डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला के अधीन आता है। यहां जेजेपी के पदाधिकारी भी चंडीगढ़ ये पता लगाने में नाकाम रहे कि इस मुआवजा के नहीं आने की वजह क्या है। उधर दोनों पार्टी के नेताओं की तरफ से अखबारों में किसानों के हितों को लेकर बड़े बड़े दावें किए जा रहे हैं लेकिन किसानों के बीच में जाकर उनकी बातचीत सुनने की हिम्मत कोई नहीं दिखा रहा है। कुछ  दिन पहले मानसेर किसान धरना प्रदर्शन में पहुंचे किसान नेता योंगेद्र यादव ने किसानों की जमकर खिंचाई करते हुए कहा था कि यह नौबत इसलिए आई क्योंकि इस इलाके का किसान एक साल पहले किसान आंदोलन में अपने घर बैठा हुआ था। हमें नहीं भूलना चाहिए कि पूरे देश का किसान दर्द एवं मांगें एक है। सत्ता में बैठे नेता अपने स्वार्थ के लिए बांटने का खेल करते हैं।

मुआवजा के मसले को खुद भाजपा ने पैदा किया

देखा जाए तो मुआवजा को लेकर दो जिलों में जिस तरह किसानों में तेजी से रोष फैल रहा है उसकी जिम्मेदार खुद भाजपा सरकार और यहां के स्थानीय नेता जिम्मेदार है। यहां के नेताओं का कहना है कि चंडीगढ़ में उनकी सुनवाई नही है। जनहित की बात कहने के लिए गिड़गिड़ाना पड़ता है। जब स्थिति हाथ से निकल जाती हैं फिर उन्हें आगे कर दिया जाता है। किसानों की मांगों को लेकर सही रिपोर्ट नहीं जा रही है। कुछ नेता तो जमीन अधिग्रहण या प्रोजेक्ट के नाम पर कमीशनखोरी व प्रोपर्टी डीलिंग तक के काम में लिप्त है।

 रेवाड़ी में डॉ. बनवारीलाल आवास पर हो रहा प्रदर्शन, मानसेर में राकेश टिकैत

भारतीय किसान यूनियन चढुनी के नेतृत्व में  काफी संख्या में  किसानों ने  25 अगस्त को रेवाड़ी विधायक के आवास पर पंचायत कर अपना रोष जताया था। यहां विधायक चिंरजीव राव खुद किसानों के समर्थन में धरने में बैठ गए। शुक्रवार को राज्य के कैबिेनेट मंत्री डॉ. बनवारीलाल के आवास पर किसान धरने पर बैठ गए हैं। मानसेर में धरना दे रहे किसानों के समर्थन में किसान नेता राकेश टिकैत समेत अनेक नेता पहुंच गए हैं। कुल मिलाकर दक्षिण हरियाणा में भाजपा सरकार में पहली बार किसान उग्र नजर आ रहे हैं। यह भाजपा के लिए खतरे की घंटी इसलिए  है क्योंकि यह वो इलाका है जिसकी वजह से भाजपा हरियाणा में सरकार बनाने में सफल रही। यहां भाजपा की राजनीति में केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह की नाराजगी ने अलग ही समीकरण बनाने शुरू कर दिए हैं। इस पूरे घटनाक्रम के लिए भाजपा नेताओं की अदूरदर्शिता, उदासीनता एवं कमजोर नेतृत्व जिम्मेदार माना जाएगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *