कप्तान के बयान में मनेठी एम्स का जिक्र समझ से परे
पूर्व मंत्री कैप्टेन अजय सिंह यादव ने कहा कि झज्जर जिले के बाढसा में बने एम्स में जितने भी कोरोना के मरीज हैं वे सभी एम्स दिल्ली से रेफर किए जाते हैं और अधिकतर मरीज हरियाणा के बाहर के होते हैं। जबकि जमीन और ऑक्सीजन हरियाणा सरकार देती है तो फिर हरियाणा के लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं से क्यों वंचित रखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार हाथ पर हाथ रखकर बैठी हुई है। कैप्टेन अजय सिंह ने कहा कि कोरोना की संभावित तीसरी लहर को देखते हुए सरकार को अभी से तैयारियों में जुट जाना चाहिए। मनेठी में बनने वाले एम्स को सरकार ने तुरंत प्रभाव से शुरू करवाना चाहिए। जल्द से जल्द पीएम केयर फंड से पैसा स्वास्थ्य सेवाओं के लिए लेकर मनेठी एम्स का कार्य शुरू करवाना चाहिए। ताकि जिस प्रकार कोरोना की दूसरी लहर में रेवाडी में बेकसूरों की जाने गई हैं उनको आगे रोका जा सके। यादव ने कहा कि गांवों में कोरोना घर-घर दस्तक दे रहा है और सरकार संक्रमितों व मृतकों के आंकडे छुपाकर झूठे दावों के पुलिंदे बांध रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में अस्पतालव स्वास्थ्य सेवाओं की भारी कमी है। यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार ने पिछले एक साल में कोई सीख नही ली और एक साल बीत जाने के बाद भी स्वास्थ्य सेवाओं में हम जहां थे आज भी वहीं पर ही हैं। अस्पतालों में आज भी वेंटिलेटर की भारी कमी है। अस्पतालों में ऑक्सीजन समय पर नही मिल पा रही है। इतने लोगों की जान जाने के बाद भी प्रदेश सरकार ने सबक नही लिया है। अब भी प्रदेश में ऑक्सीजन व दवाईयों की कालाबाजारी जोरों पर है। दूसरी तरफ लॉकडाउन लगने से विद्दार्थियों को शिक्षा का भारी नुक्सान हो रहा है। इसके लिए सरकार क्या पॉलिसी बना रही है।
कप्तान के बयान में मनेठी एम्स का जिक्र समझ से परे
कप्तान ने अपने प्रेस नोट में मनेठी में एम्स बनाने पर जोर दिया हुआ है जबकि मनेठी एम्स बनाने के दायरे से कभी बाहर हो चुका है। माजरा- भालखी में एम्स बनाने की प्रक्रिया को फाइनल किया जा रहा है। ऐसे में कप्तान का यह कहना कि मनेठी एम्स का निर्माण जल्दी शुरू किया जाए जमीनी हकीकत से मेल नहीं खा रहा है।