बुद्ध जयंती पर हुआ ऑन लाइन राष्ट्रीय कवि सम्मेलन

समता साहित्य समिति,  हैदराबाद के तत्वावधान में बुद्ध जयंती के अवसर पर ऑन लाइन राष्ट्रीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसकी अध्यक्षता प्रसिद्ध आंबेडकरवादी साहित्यकार एवं लखनऊ विश्वविद्यालय, लखनऊ के हिंदी विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. कालीचरण ‘स्नेही’ ने की तथा कार्यक्रम का संयोजन समता साहित्य समिति, हैदराबाद की उपाध्यक्ष, मैत्री महिला संघ, हैदराबाद की अध्यक्ष एवं  हिंदी की आंबेडकरवादी कवयित्री कांता बौद्ध ने किया। ऑन लाइन हुए राष्ट्रीय कवि सम्मेलन में भारत के विभिन्न क्षेत्रों के अनेक गणमान्य कवि – कवयित्रियों व  श्रोतागणों ने भाग लिया। हरियाणा से जिला रेवाड़ी के गांव खालेटा के साहित्यकार भूपसिंह भारती ने इस कवि सम्मेलन में भाग लिया। बुद्ध जयंती राष्ट्रीय कवि सम्मेलन का प्रारंभ सामूहिक त्रिशरण, पंचशील एवम बुद्ध वन्दना से हुआ। कवि सम्मेलन में उपस्थित सभी कवि- कवयित्रियों ने बुद्ध की शिक्षा से संबंधित तथा आज की ज्वलंत समस्याओं पर आधारित अपनी कविताओं का पाठ किया ।  हरियाणा से भूपसिंह भारती ने इस कवि सम्मेलन में महात्मा बुद्ध की शिक्षाओं को हरयाणवी साहित्यिक विधा रागनी “हो बुद्ध की गाथा गाउँ मैं, भूले भटको को बुद्ध की राह दिखाऊँ मैं” के द्वारा हरयाणवी बोल्ली में गाकर सुनाया और खूब तालियां बटोरी।  कवि सम्मेलन में अम्बेडकरवादी साहित्यकार डॉ देवचन्द्र  भारती ‘प्रखर’ (वाराणसी) ; प्रो. हेमलता महीश्वर (दिल्ली); असंग घोष (जबलपुर); डॉ. रजत रानी मीनू (दिल्ली) ; एस एन प्रसाद, (लखनऊ) ; सुदेश कुमार तनवर, (दिल्ली) ; सुनीता कमल, (दिल्ली) ;  डॉ. बीआर बुद्ध प्रिय, (बरेली) ;  श्याम निर्मोही, (बीकानेर) ;  सुनीता बौद्ध,  (टूंडला ) ; इंदु रवि, (गाजियाबाद); उपासना, (कुरुक्षेत्र) ; संजय सेलुरकर , (परभणी); रहमत उन्नीसा बेगम (निजामाबाद), हैदराबाद से डॉ. नीलम कुमार बिडला; भारती भराड़े; वैशाली शेजुल; नागराज उमा विश्वास; मो. बासित अली; मोनिका; प्रो. धर्मपाल पीहल और कांता बौद्ध ने अपनी-अपनी कविताओं का पाठ किया। कार्यक्रम के समापन से पहले धम्मपालन गाथा का वाचन किया गया।  इस अवसर पर प्रो.कालीचरण ‘स्नेही’ ने अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में कहा कि तथागत बुद्ध का धम्म मानव कल्याण के साथ-साथ सभी प्राणियों के कल्याण के लिए है। बुद्ध धम्म हमें ज्ञान-विज्ञान से जोड़ता है। बुद्ध के अष्टांगिक मार्ग और पंचशील के सिद्धांत पर चलकर हम अपने जीवन का कल्याण कर सकते हैं । उन्होंने कहा कि हमारा देश आज अनेक विकट परिस्थितियों से गुजर रहा है । उन्होंने कहा की इस देश में अमन चैन लौटे, इसके लिए एक ही रास्ता है कि हम बुद्ध के मार्ग पर चलें। समता साहित्य समिति, हैदराबाद के अध्यक्ष एवं उस्मानिया विश्वविद्यालय , हैदराबाद के फैकल्टी ऑफ आर्ट्स के पूर्व डीन व हिन्दी विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. धर्मपाल पीहल ने अपने वक्तव्य में कहा कि महामानव बुद्ध ने  विश्व को सत्य, अहिंसा, शांति, प्रेम, भाईचारा, मैत्री, करुणा आदि  आदर्श मानवीय मूल्यों का जो  संदेश  दिया वो आज भी  प्रासंगिक है । उन्होंने कहा कि देश, दुनिया और धरती को बुद्ध की शिक्षा ही बचा सकती है। आज संकट के समय में पूरी दुनिया को बुद्ध के मार्ग पर चलने की जरूरत है। कार्यक्रम का समापन ज्योत्स्ना मोरे के धन्यवाद ज्ञापन से हुआ तथा अंत में विश्व में कोराना महामारी के कारण  मृत्यु को प्राप्त हुए लोगों की स्मृति में दो मिनट का मौन धारण किया गया ।