मंकीपॉक्स से वैश्विक स्वास्थ्य आपात स्थिति है? डब्ल्यूएचओ करेगा बैठक

रणघोष खास. विश्वभर से 

विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी डब्ल्यूएचओ ने मंगलवार को कहा है कि वह 23 जून को एक आपातकालीन बैठक करेगा। इसमें यह निर्धारित किया जाएगा कि वैश्विक मंकीपॉक्स के प्रकोप को अंतरराष्ट्रीय चिंता के रूप में सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थिति माना जाए या नहीं।विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रमुख टेड्रोस एडनोम घेब्रेयेसस ने कहा, ‘मंकीपॉक्स का प्रकोप असामान्य और चिंताजनक है। इस कारण से मैंने अगले सप्ताह अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य नियमों के तहत आपातकालीन समिति बुलाने का फैसला किया है, ताकि यह आकलन किया जा सके कि यह प्रकोप अंतरराष्ट्रीय चिंता के तौर पर सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल है या नहीं।’डब्ल्यूएचओ प्रमुख ने कहा, ‘डब्ल्यूएचओ दुनिया भर के भागीदारों और विशेषज्ञों के साथ मंकीपॉक्स वायरस का नाम, इसके समूह और इससे होने वाली बीमारी को बदलने पर भी काम कर रहा है। हम जल्द से जल्द नए नामों के बारे में घोषणा करेंगे।’बता दें कि मंकीपॉक्स एक संक्रामक बीमारी है जो संक्रमित जानवरों, आमतौर पर रोडेंट से मनुष्यों में फैलती है। वायरस को पहली बार 1958 में मैकाक के एक समूह में खोजा गया था, जिसका अध्ययन अनुसंधान उद्देश्यों के लिए किया जा रहा था।

यह आमतौर पर अफ्रीका में उत्पन्न होने वाली एक दुर्लभ बीमारी है जो आमतौर पर अपने आप ठीक हो जाती है। लेकिन कभी कभी अफ्रीका के बाहर भी इसके मामले सामने आए हैं। 2003 में अमेरिका में कम से कम 71 मामले आए थे। तब मंकीपॉक्स किसी यात्री से नहीं फैला था, बल्कि अफ्रीकी देश घाना से आयात किए गए रोडेंट (चूहे) की वजह से फैला था। उन रोडेंट ने तब पालतू कुत्तों को संक्रमित किया, और फिर अमेरिकी लोग संक्रमित हुए। तो क्या इसकी कोई वैक्सीन बनी है? मंकीपॉक्स के लिए कोई विशिष्ट टीका नहीं है, लेकिन कुछ रिपोर्टों में चेचक वाले टीके को 85% सुरक्षा प्रदान करता बताया गया है क्योंकि दोनों वायरस काफी समान हैं।डब्ल्यूएचओ ने भी आज कहा है कि चेचक के टीके से कुछ हद तक मंकीपॉक्स के ख़िलाफ़ सुरक्षा मिलने की उम्मीद है, लेकिन इस पर सीमित क्लिनिकल डाटा उपलब्ध हैं और सीमित आपूर्ति है।

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