रणघोष की बात.. प्रत्येक अभिभावक व शिक्षकों को यह लेख जरूर पढ़ना चाहिए

अब टयूशन पर बच्चे अपने दोस्तों को लाए कमीशन पाए का खेल शुरू


-हे बाजारू गुरुजनों मां सरस्वती पर रहम करो, पैसों की हवस में किसी लायक नहीं रहोंगे


-स्कूलों में ज्यादा से ज्यादा बच्चे लाने वाले की कला ही शिक्षक की सबसे बड़ी योग्यता


रणघोष खास. एक आम आदमी की कलम से


सोचिए शिक्षा की गरिमा- पवित्रता को शिक्षक ही कंलकित एवं शर्मसार करने लग जाए तो फिर परिवार- समाज एवं राष्ट्र को खत्म होने से कैसे बच सकता है। ऐसे हालात अब अंदरखाने बन चुके हैं बस विस्फोट होना बाकी है। अभी तक हम सभी ने देखा था कि  निजी स्कूलों में शिक्षकों को नौकरी व वेतन अच्छा पढ़ाने से बेहतर ज्यादा से ज्यादा बच्चों को दाखिला कराने के लिए मिले टारगेट पूरा करने पर तय होता था। अब एक नया हैरान व शर्मसार करने वाला सच सामने आया है। टयूशन व कोचिंग के नाम पर तेजी से गली मोहल्लों में फैल चुके इस कारोबार के मुखिया अब पढ़ने वाले बच्चों से ही कह रहे हैं कि वे ज्यादा से ज्यादा अपने दोस्तों एवं मिलने वालों को यहां टयूशन करने के लिए प्रेरित करें। ऐसा करने पर उन्हें अच्छा खासा कमीशन मिलेगा। यानि पैसो की हवस में इन बाजारू गुरुजनों ने अपने ईमान धर्म को भी तार तार  कर दिया है। सोचिए और मंथन करिए हमारी शिक्षा प्रणाली किस तरह बाजार में वस्त्रहीन होती जा रही है। चारों तरफ देखो हर कोई बेहतर शिक्षा के नाम पर लूटने में लगा हुआ है। इसके लिए अलग अलग तौर तरीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है। मजबूर हताश एवं सोच समझने की शक्ति गंवाते जा रहे अभिभावक समझ नहीं पा रहे कि वे अपने बच्चों का भविष्य किस दिशा में जाकर तय करें। जो शिक्षक स्कूल में उन्हें पढ़ाता है वहीं टयूशन पर अलग ही अंदाज में दिखता है। क्या स्कूल समय में ही हुई पढ़ाई किसी बच्चे के लिए पर्याप्त नहीं है। बेहतर शिक्षा के नाम पर लाखों रुपए का वेतन लेने वाले अधिकारियों के कानों ने सुनना बंद कर दिया और आंखों में मौजूदा हालात को देखकर उनकी रोशनी खत्म हो गई है। परस्पर एक दूसरे से आगे बढ़ने की अंधी दौड़ ने बच्चों की जिंदगी एक पैकेज में बदल दिया है। इसके लिए माता- पिता पूरी तरह से जिम्मेदार है जो अपने बुढ़ापे को सुरक्षित करने के लिए अपने बच्चों को बेहतर इंसान बनाने की बजाय अच्छा खासा कमाई करने वाली मशीन बनाने में लगे हुए हैं। इसी के चलते कोचिंग एवं टयूशन का कारोबार तेजी से इतना फैल चुका है कि शायद ही कोई घर इसकी चपेट में बच रहा हो। ऐसा भी नहीं है कि बच्चों पर चारों तरफ से बढ़े तनाव व दबाव के दुष्परिणाम भी सामने आ रहे हैं। नेशनल क्राइम की रिपोर्ट के हवाले से यह सामने भी आ रहा है कि हर 55 मिनट में एक बच्चा डिप्रेशन के चलते सुसाइड कर रहा है। राष्ट्रीय स्तर की नीट, आईआईटी की हर साल होने वाली परीक्षा के परिणाम असफल हुए हजारों बच्चों के लिए काल साबित हो रही है। यही हाल अब बोर्ड परीक्षाओं में नजर आ रहे हैं। हालांकि इसके दुष्परिणामों को देखते हुए राष्ट्रीय स्तर पर परीक्षा के तनाव से बचने के लिए जागरूक कार्यक्रम हो रहे हैं। कुल मिलाकर शिक्षा प्रणाली को खंडित करने के लिए वे बाजारू गुरु जिम्मेदार है जिसने बाजार में खुद को निवस्त्र  किया हुआ है।