रणघोष खास. एक पीड़ित किसान की कलम से
एमआरटीएस (मास रैपिड ट्रांजिट सिस्टम) योजना के लिए एचएसआईआईडीसी द्वारा अधिग्रहित की गई जमीन के मुआवजा को लेकर हर रोज तरह तरह की जानकारियां सामने आ रही है। किसानों की माने तो मुआवजा हमें बहुत पहले मिल जाता अगर चंडीगढ़ कमीशन पहुंच जाता। कुछ किसान तैयार हो गए अधिकांश ने मना कर दिया बात बनते बनते बिगड़ गईं। अधिकारियों के पास इतना जबरदस्त मास्टर माइंड होता है कि वह किसी प्रोजेक्ट को सुबह रिजेक्ट कर दें और शाम को शानदार बता दें। नेताओं एवं मंत्रियों की इतनी गहरी समझ नहीं होती कि वे इसके पीछे की चालाकियों को समझ सकें। इसी प्रोजेक्ट में भी यहीं हुआ। 2020-21 में जब जिला रेवाड़ी में इस परियोजना के तहत कुल मुआवजा 201 करोड़ 53 लाख 62 हजार 130 रुपए में से 120 करोड़ रुपए जारी किए उसमें सभी ने मिले कमीशन यानि दलाली की जमकर दीवाली मनाईं। किसानों की माने तो बाकी की 81 करोड़, 53 लाख, 62 हजार 130 रुपए की राशि भी सितंबर 2021 में ही जारी होने वाली थी कि कमीशन को लेकर परस्पर नेटवर्क नहीं बन पाया। किसानों को लगा कि अब बाकी राशि जारी करना अब अधिकारियों की मजबूरी होगी। यहीं वे गलती कर गए। फरवरी 2022 में थक हारकर किसान कुल मुआवजा पर कमीशन तय करने के लिए तैयार हो गए। सबकुछ ओके हो गया लेकिन अचानक कुछ अधिकारी बदल गए जिसकी वजह से राशि जारी होनी थी। उसके बाद मुआवजा का मामला ठंडे बस्ते में चला गया। कुछ किसान चंडीगढ़ भी पहुंचे लेकिन वहां तो बिना किसी जान पहचान व सेवा पानी के चपरासी तक नहीं पूछता। हजारों रुपए रोज आने जाने का किराए व खान पान पर खर्च अलग से हो जाते हैं। किसानों ने सोच लिया कि मुआवजा को लेकर या तो वे इन कार्यालयों में कमीशन के बदले काम कराने वालों को सैट करें या फिर सड़कों पर संघर्ष के लिए तैयार हो जाए। किसानों ने जब प्रदर्शन व ज्ञापन देने का सिलसिला शुरू किया तो यह प्रचार किए जाने लगा कि यह प्रोजक्ट ही कामयाब नहीं है। फाइल सीएम के पास है इस योजना को ही रद्द किया जा रहा है। ऐसा प्रचार शुरू हो गया। भाजपा नेताओं के बयानों एवं अधिकारियों के पत्राचार पर गौर करें तो मुआवजा को लेकर अधिकारी जानबूझकर कबडडी कबडडी खेल रहे हैं। इसमें कुछ नेता व पदाधिकारी इसलिए चुप है कि वे भी पीछे के दरवाजे से कमीशन में हिस्सेदार हैं। यह कड़वी हकीकत है। सोचिए बिना किसी वजह या विवाद के किसान पिछले एक साल स मुआवजा को लेकर इस दर भटक रहे हैं मानो वह हक नहीं भीख मांग रहे हो। मुआवजा को लेकर कोई अवार्ड यहां तक की सारी फाइलें ओके हो चुकी हैं बस उसे जारी करने के लिए इशारे की जरूरत है। किसानों की पीड़ा है कि सत्ता में बैठे नेताओं को होश तब आता है जब सड़कों पर उग्र प्रदर्शन से हिंसा नहीं हो जाए और उसकी तपिश देश में चारों तरफ ना फैल जाए। पिछले दिनों किसानों ने इसी मुद्दे पर दिल्ली- जयपुर नेशनल हाइवे को जाम कर दिया था। अब रेवाड़ी जिले में किसान संगठन व आस पास गांवों के किसान संघर्ष समिति का गठन कर आर पार लड़ाई लड़ने का मन बना चुके हैं। 25 अगस्त को भाकियू चढुनी व अन्य संगठन मुआवजा समेत किसानों के कुछ मु्ददों पर विधायक के आवास व शहर में प्रदर्शन करने का एलान कर चुके हैं।