–उनके चाचा राव यादुवेंद्र सिंह कांग्रेस की टिकट पर लगातार चार विधानसभा चुनाव लड़ते आ रहे हैं। उनकी सहमति के बाद ही अर्जुन राव ने कोसली में अपने कदम रख दिए हैं।
रणघोष अपडेट. सुभाष चौधरी
दक्षिण हरियाणा की राजनीति को अपने मिजाज से तय करने की ताकत रखने वाले दिवंगत पूर्व मुख्यमंत्री राव बीरेंद्र सिंह के रामपुरा हाउस में एक बड़ा राजनीति बदलाव होने जा रहा है। अभी तक अटेली विधानसभा सीट से कांग्रेस की टिकट पर अपना राजनीति भविष्य तलाशते आ रहे राव बीरेंद्र सिंह के पोते एवं राव अजीत सिंह के बेटे अर्जुन राव ने अब कोसली विधानसभा सीट की जमीन पर अपना राजनीति घर बनाने का फैसला लिया है। रामपुरा हाउस के सूत्रों की माने तो कोसली सीट से अभी तक उनके चाचा राव यादुवेंद्र सिंह कांग्रेस की टिकट पर लगातार चार विधानसभा चुनाव लड़ते आ रहे हैं। उनकी सहमति के बाद ही अर्जुन राव ने कोसली में अपने कदम रख दिए हैं। इस सीट पर कांग्रेस विशेषतौर से राज्य सभा सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा का शुरूआत से ही अच्छा खासा प्रभाव रहा है। इसलिए अर्जुन राव परिवार ने हुड्डा परिवार को भी अपनी मंशा जाहिर कर दी है। अगर राव यादुवेंद्र सिंह पूरी तरह से कोसली से खुद को अलग कर लेते हैं तो हुड्डा के लिए अर्जुन राव मजबूत उम्मीदवार के तौर पर रहेंगे। इस सीट पर रामपुरा हाउस का अच्छा खासा प्रभाव रहा है। हुड्डा परिवार यह अच्छी तरह से जानता है कि इस इलाके में इस परिवार को अनदेखा करके मजबूत राजनीति करना आसान नहीं है। यह बात अलग है कि इस परिवार के सबसे ताकतवर नेता राव इंद्रजीत सिंह भाजपा में रहकर पिछली दो विधानसभा चुनावों में कमल को खिलाते आ रहे हैं। इसके लिए चुनाव में उन्हें अपने छोटे भाई राव यादुवेंद्र सिंह की खिलाफत भी करनी पड़ी थी।
अर्जुन राव के अटेली विधानसभा सीट छोड़ने की चार बड़ी वजहें रही। पहली इतिहास गवाह रहा है कि अटेली की जनता स्थानीय नेता को प्राथमिकता पर रखती है। इसलिए पिछले चुनाव में भाजपा से सीताराम यादव विजयी रहे। दूसरा अर्जुन राव का मूल निवास रेवाड़ी में स्थित रामपुरा हाउस है। इसलिए रूटीन में करीब 40 किमी दूर अटेली की जनता को समय देना आसान नहीं था। तीसरा उनके पिता राव अजीत सिंह का स्वास्थ्य ठीक नहीं रहने की वजह से उनके परिवार का लगातार जुड़ाव अटेली से बन नहीं पा रहा था। हालांकि आज भी अटेली में इस परिवार का अच्छा खासा दबदबा है और जीत- हार के समीकरण को बिगाड़ने ओर बनाने की पूरी हैसियत रखते हैं लेकिन समय के साथ साथ उनके प्रभाव का दायरा सिमटता जा रहा था। चौथी सबसे बड़ी वजह कोसली से चाचा राव यादुवेंद्र सिंह का भविष्य में चुनाव नहीं लड़ने की मंशा ने अर्जुन राव के लिए इस सीट के लिए दरवाजे खोल दिए। 2024 को होने जा रहे विधानसभा चुनाव के मद्देनजर राव अजीत सिंह की भी यह इच्छा है कि अर्जुन अभी तक उनकी संघर्ष से भरी चलती आ रही राजनीति को सफलता में बदलकर विरासत को नए सिरे से मजबूत कर दे। अब देखना यह है कि आने वाले समय में इस सीट पर कोसली की जनता रामपुरा परिवार के तीनों भाईयों में किसे प्राथमिकता पर रखती है।
कोसली को लेकर बेहद उत्साहित है अर्जुन राव
रणघोष से बातचीत में अर्जुन राव ने कहा कि कोसली क्षेत्र का जुड़ाव हमेशा से ही उनके परिवार से रहा है। हमारे परिवार की राजनीति की जड़े ही इस क्षेत्र से मजबूत होती रही है। वे जल्द ही कांग्रेस हाईकमान विशेषतौर से पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा व राज्य सभा सांसद दीपेंद्र हुड्डा से विचार विमर्श कर अपनी पूरी ताकत कोसली क्षेत्र में लगा देंगे।