राजस्थान संकटः सोनिया गांधी ने पर्यवेक्षकों से लिखित रिपोर्ट मांगी

रणघोष अपडेट. देशभर से


राजस्थान में चल रहे संकट की रिपोर्ट लेकर कांग्रेस पर्यवेक्षक मल्लिकार्जुन खड़गे और इंचार्ज अजय माकन सोनिया गांधी से मिलने उनके आवास पर पहुंच गए हैं। सोनिया गांधी के बुलावे पर कमलनाथ भी पहुंचे हैं। खड़गे और माकन ने सारा घटनाक्रम जुबानी बताया। सोनिया गांधी ने दोनों से लिखित रिपोर्ट मांगी है। ये रिपोर्ट सोमवार देर रात या मंगलवार सुबह दी जाएगी। इस बीच गहलोत ने मल्लिकार्जुन खड़गे से माफी मांगी है। उन्होंने खड़गे से कहा है कि मेरा असंतुष्ट विधायकों से कोई मतलब नहीं है।बैठक करीब दो घंटे चली। उसके बाद अजय माकन ने मीडिया को संबोधित किया। माकन ने कहा कि राजस्थान के विधायकों ने सामूहिक बैठक की मांग की थी, जबकि हम लोग हर विधायक की राय अकेले में जानना चाहते थे। लेकिन कुछ विधायकों ने इसे स्वीकार नहीं किया। विधायकों की सबसे बड़ी शर्त यह रखी थी कि गहलोत खेमे से ही राजस्थान का नया सीएम बने। माकन ने कहा कि ये सारी जानकारी कांग्रेस अध्यक्ष को दी गई है। लेकिन उन्होंने सारे तथ्य लिखित रूप से मांगे हैं। इस बीच गहलोत खेमे के कुछ विधायकों के बयान आना शुरू हो गए हैं, जिनमें वो कह रहे हैं कि आलाकमान का जो फैसला होगा, उन्हें मंजूर होगा।

मल्लिकार्जुन खड़गे और माकन करीब चार बजे शाम को जयपुर से दिल्ली पहुंचे और सीधे सोनिया गांधी के निवास पर पहुंचे। इस समाचार के लिखे जाने तक उनकी मंत्रणा सोनिया गांधी से चल रही थी। इस संबंध में सोनिया को पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की ओर से यही सलाह दी गई है कि अब गहलोत पर दांव नहीं लगाया जाए। तमाम मीडिया रिपोर्टों में कहा जा रहा है कि अध्यक्ष पद की रेस में मध्य प्रदेश के पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह, मुकुल वासनिक के नाम सबसे आगे हैं।  इसमें मुकुल वासनिक पर सबसे ज्यादा दांव गांधी परिवार लगा सकता है। हालांकि मल्लिकार्जुन खड़गे का नाम भी तीसरे नंबर पर है। हालांकि मजाक के तौर पर एआईसीसी दफ्तर के इंचार्ज केसी वेणु गोपाल का नाम भी चल रहा है।  शशि थरूर पहले ही घोषणा कर चुके हैं कि वो कांग्रेस अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ेंगे। वो 30 सितंबर को नामांकन दाखिल करने वाले हैं। कांग्रेस अध्यक्ष का चुनाव 17 अक्टूबर को प्रस्तावित है।अभी जो हालात हैं, उससे नहीं लग रहा है कि राजस्थान का संकट आज या कल में खत्म हो जाएगा। राजस्थान में गहलोत को बनाए रखना अब कांग्रेस अध्यक्ष मजबूरी बन गया है। लेकिन देर सवेर गहलोत को इसके नतीजे तो भुगतने ही होंगे। इस बीच राजस्थान में कांग्रेस विधायक गंगा देवी का बयान सामने आया है। उन्होंने कैमरे के सामने आकर कहा कि मुझे कोई जानकारी नहीं थी, मैं वहां देर से पहुंची थी। मैंने चिट्ठी नहीं पढ़ी थी, मैंने कोई इस्तीफा नहीं दिया। आलाकमान जो फैसला करेंगे हम उसके साथ हैं। पर्यवेक्षक से हमारी मिलने की बात थी लेकिन हम नहीं जा सके। उनके बयान का वीडियो नीचे है। इसी तरह का बयान गहलोत समर्थक इंदिरा मीणा का भी आया है। गहलोत समर्थक कुछ अन्य विधायकों ने संकेत दिया है कि वे भी आलाकमान के फैसले को स्वीकार करेंगे।