– राव इंद्रजीत की जीत को अपनी हंसी से तोलते कापड़ीवास फिर सुर्खियों में
रणघोष खास. सुभाष चौधरी
हरियाणा में रेवाड़ी विधानसभा से विधायक रहे रणधीर सिंह कापड़ीवास दो वजहों से सुर्खिया बटोर रहे हैं। पहला उनके चेहरे पर हर समय इतराती हंसी जिसे देखकर यकीन नही होता की छह में पांच बार चुनाव हारने वाला यह नेता जिंदगी के सलीके को अलग ही तौर तरीकों में जी रहा है। जिसके चलते समर्थक उनकी तुलना पूर्व क्रिकेटर अजय जडेजा के अंदाज से कर रहे है। जो बोल्ड होने पर भी हंसते हुए पेविलियन लौटते थे ओर सिक्सर मारने पर भी उसी अंदाज में रहते थे। मैदान में कैच छोड़ने पर भी इस खिलाड़ी के चेहरे पर हंसी बनी रहती थी ओर शानदार फिल्डिंग करते समय खिलखिलाते हुए टहलते हुए नजर आते थे। इसी अंदाज के चलते जडेजा जितने मैदान में छाए उससे ज्यादा बालीवुड समेत अनेक मंचों पर आज तक छाप छोड़ते आ रहे हैं।
उम्र में 75 पार कापड़ीवास का राजनीति के साथ साथ निजी जिंदगी जबरदस्त संघर्ष में रही है जवान बेटे का बीमारी में चले जाना उसके बाद खुद को संभाले रखना। इसके बावजूद चेहरे पर मुस्कान और हंसी ठहाका बनकर इधर से उधर टस से मस नहीं हुईं। यही वजह है की कापड़ीवास का आधा काम उनकी हंसी कर देती है जिसे देख उनके विरोधी भी परेशान रहते हैं की उनके हमले का असर कहा काम कर रहा हैं।
कापड़ीवास पर चर्चा इसलिए जोर पकड़ रही है की वे एक बार फिर इलाके के धाकड़ नेता और हरियाणा की राजनीति में छह बार सांसद बनने का रिकार्ड बनाने वाले राव इंद्रजीत सिंह पर सीधा अटैक करते नजर आ रहे हैं। जाहिर है यह यह आक्रमकता चार माह बाद होने जा रहे विधानसभा चुनाव में भी रेवाड़ी सीट पर एक दूसरे को खत्म करने तक जारी रहेगी। राव के विरोधियों की लिस्ट में कापड़ीवास पहले नंबर पर चल रहे हैं। राव को इस बार के लोकसभा चुनाव में जो संघर्ष से भरी जीत मिली उस पर भी कापड़ीवास ने सीधा हमला किया है। इस नेता का कहना है की राव इंद्रजीत सिंह बेशक भाजपा में है लेकिन वे मन से पूरी तरह कांग्रेसी है। इसलिए उन्होंने जीत के बाद इसका श्रेय भाजपा और पीएम नरेंद्र मोदी को देने की बजाय अपने समर्थकों को दे दिया। वे पहले भी ऐसा करते आए हैं। उनका मकसद इलाके में अपने विरोधियों को कूचलकर खत्म करना है यही उनकी राजनीति का असली विकास है। इसलिए सोचिए जो नेता पिछले 40 सालों से सत्ता पार्टी में सुख भोगता आ रहा है। अगर उसने विकास कराए होते तो वह डंके की चोट पर जनता के सामने रिपोर्ट कार्ड पेश कर वोट मांगते लेकिन पिछले तीन चुनाव में मोदी के नाम पर वोट मांगकर अपने निजी राजनीति एजेंडे को पूरा करते रहे। इस बार चुनाव में जनता ने सबक सिखाने का मन बना लिया था अगर मोदी गारंटी और भाजपा की टिकट उन्हें नही मिलती। जीत के बाद यह कहना की यह जीत उनकी समर्थकों की मेहनत है तो वे आगामी विधानसभा चुनाव में अपने इंसाफ मंच से लड़कर दिखाए असलियत सामने आ जाएगी।
छह में से पांच चुनाव हारे लेकिन जमीन पर आज भी मजबूत
कापड़ीवास छह में से पांच चुनाव हारे। 2014 का चुनाव 45 हजार से ज्यादा मतों से जीता और अपनी सरकार में मंत्री बनते बनते रह गए। राजनीति की शुरूआत 1996 में आजाद उम्मीदवार के तौर पर की ओर अपने विरोधी कांग्रेस से कप्तान अजय सिंह यादव से महज 1400 वोटों से हार गए। वह भी राजनीति कुटनीति का शिकार बन गए जब उनका चुनाव चिन्ह कार था और उस समय लोकसभा चुनाव भी साथ हो रहे थे। उनके विरोधियों ने पटौदी से लोकसभा का डम्मी उम्मीदवार खड़ा कर उसे भी चुनाव चिन्ह कार दिला दिया। नतीजा इस डम्मी उम्मीदवार को अपने पटौदी क्षेत्र से कोई वोट नही मिला लेकिन रेवाड़ी विधानसभा से कापड़ीवास का चुनाव चिन्ह कार होने का फायदा लेते हुए 6300 वोट ले गया। बाद में पता चला की उसे खड़ा करना चुनाव में रणनीति का एक हिस्सा था। उसके बाद कापड़ीवास लगातार इस सीट पर चुनाव लड़ते रहे। 2019 में भाजपा की टिकट नही मिलने पर निर्दलीय लड़े और 35 हजार से ज्यादा वोट लेकर जता दिया की वे जमीनी हैसियत वाले नेता है इसलिए अपनी मिजाज की राजनीति करते हैं। कापड़ीवास की टिकट कटाने में राव इंद्रजीत सिंह विशेष भूमिका में रहे इसलिए इस सीट पर अभी तक दोनो नेताओं के बीच जबरदस्त टकराव बना हुआ है।