आरती राव को बाजारू कार्यकर्ता नहीं चिंता करने वाले समर्थक चाहिए तभी बात बनेगी
-आरती राव अब उस दौर में आ चुकी है जहां उसे अपने पिता की राजनीति वसीयत को सुरक्षित करने के लिए खुद को भी मजबूत करना होगा इसके लिए उसे पैसा खर्च कर जिंदाबाद करने वाले बाजारू कार्यकर्ता नहीं चिंता करने वाले समर्थक चाहिए।
रणघोष खास. प्रदीप नारायण
राजनीति वटवृक्ष की छाया में बड़ी हुई आरती राव पूरी तरह से अपने पिता केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह की विरासत को संभालने की लगभग तैयारी कर चुकी है। अभी तक उन्हें राजनीति में छांव देखी है। असली परीक्षा धूप में तपने और निखरने की रहेगी। पिता उंगली पकड़ कर रास्ता दिखा चुके हैं आगे की राह बेहद कठिन है। वजह भी साफ है देश में कांग्रेस व क्षेत्रीय दलों का पूरी तरह से सफाया करने का अटल इरादा लेकर चल पड़ी भाजपा 2024 के चुनाव में वंशवाद मुक्त देश की राजनीति के एजेंडे को लागू करने जा रही है जिसमें केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह की चलती आ रही विरासत खतरे में पड़ सकती हैं। राव उम्र के जिस पड़ाव पर आ चुके हैं वहां उन्हें बेटी के राजनीति भविष्य के लिए भाजपा के मापदंडों पर चलना होगा नहीं तो सही समय का इंतजार करना पड़ेगा जो जल्दी से आने वाला नहीं है। अब वह ताकत व माहौल नहीं रहा जब राव अपनी जमीनी ताकत से भाजपा के इरादों को बदल सकते थे। वे खुद पिछले दो चुनाव पीएम मोदी की लहर से ही जीत पाए हैं। इसका मतलब यह भी नहीं है कि राव का दक्षिण हरियाणा में वजूद तेजी से सिकुड़ता जा रहा है बस ठहराव जरूर आ चुका है। आज भी वे महेंद्रगढ़ से लेकर गुरुग्राम तक जमीनी स्तर पर सबसे धाकड़ नेता है लेकिन जिस तरह उनके पास जो टीम होनी चाहिए, कुशल प्रबंधन और युवा शक्ति नजर आनी चाहिए। उसकी जगह अवसरवादी चेहरों ने ले ली हैं जो उनकी ताकत को प्रशासन में, बाजार के इधर उधर के कारोबारों में मजबूत करने के लिए चालाकी से इस्तेमाल कर ले जाते हैं। अधिकांश अवसरवादी आए दिन विज्ञापन व होने वाले कार्यक्रमों के खर्चों का ठेका उठाते हैं और बहुत कम समय में अधिकारियों के सामने राव इंद्रजीत सिंह का खास होने का दावा करते हुए अपने छिपे हुए एजेंडों को पूरा कर जाते हैं। सबकुछ इतना चालाकी से होता है कि खुद राव को भनक तक नहीं लग पाती है। हालांकि आरती राव ने अपने स्तर पर रामपुरा हाउस में आने वाले ऐसे समर्थकों की पहचान करनी शुरू कर दी है जिसका अपने गांव व समाज में कोई आधार नहीं है लेकिन चाटुकारिता में सबसे आगे रहकर अपना काम कर जाते हैं। बावल क्षेत्र में एक जेबीटी शिक्षक दो प्राइवेट स्कूल चल रहा हैं उसकी छवि स्कूल में समय पर नहीं पहुंचना, बच्चों को नहीं पढ़ाने की रही है। इस शिक्षक ने कई सालों से शिक्षा विभाग में राव का खास होने का ऐसा दबदबा बना रखा है कि जो भी ग्रामीणों की शिकायत पर कार्रवाई करता है उसे फोन पर तबादला होने की धमकी मिल जाती है। ऐसा हुआ भी है। इस शिक्षक की शिकायत सरकारी रिकार्ड में धूल फांक रही है। इसी तरह अलग अलग कामों का टेंडर लेने वाले, जमीन का कारोबार करने वालों की संख्या राव के दरबार में ज्यादा बढ़ती जा रही है जिसकी सही रिपोर्ट या तो उनके पास पहुंच नहीं रही है या जानबूझकर उसे दबा दिया जाता है। पिछले 8 सालों में राज्य व केंद्र में भाजपा सरकार होने व राव की मजबूत कार्य शैली का जो फायदा क्षेत्र के विकास व समर्पित कार्यकर्ताओं की भावनाओं के सम्मान के तौर पर होना चाहिए था उसका भरपूर इस्तेमाल अलग अलग इधर उधर के व्यवसायों में लिप्त वे कारोबारी उठा रहे हैं जो धन बल का सही समय पर उपयोग कर राव की छवि को अपने हिसाब से तय करने में कामयाब हो जाते हैं। कुछ माह पहले नगर परिषद रेवाड़ी में राव समर्थित पार्षदों में प्रोपर्टी आईडी समेत अनेक कार्यों को लेकर छिड़ी जंग का लाइव प्रसारण भी हो चुका है। इसी वजह से आज स्थिति यह है कि उनके कर्मठ कार्यकर्ता जो आर्थिक तौर पर मजबूत नहीं है वे राव के दरबार में इन फाइनेंसरों को सबसे आगे देखकर वापस लौटने लगे हैं। ऐसे में आरती राव को रामपुरा हाउस में आने वाले असली-नकली समर्थकों की पहचान करना भी सीधी चुनौती रहेगी जो किसी सूरत में आसान नहीं है।
भाजपा के पास राव का मजबूत विकल्प भूपेंद्र यादव हर लिहाज से मजबूत
राजनीति में राव से जूनियर भाजपा में सीनियर केंद्रीय कैबिनेट मंत्री भूपेंद्र यादव भाजपा हाईकमान के लिए तुरुप का पत्ता है जिसका जब चाहे किसी भी समय उपयोग हो सकता है। भूपेंद्र यादव गुरुग्राम लोकसभा में होने वाले सामाजिक और राजनीतिक कार्यक्रमों में लगातार शिरकत कर रहे हैं। इसलिए राव को भाजपा के अंदर और बाहर बराबर लड़ाई लड़नी पड़ रही है। ऐसे में आरती राव को विरासत में मिली राजनीति से कई गुणा अधिक मेहनत करनी होगी। आरती का मजबूत पक्ष पिता से मिली शानदार विरासत है जिसकी जड़े आज भी गहरी है। जिसे समय रहते संभालती रही तो स्थिति पूरी तरह कंट्रोल में रहेगी। आसान इसलिए नजर नहीं आ रहा है भाजपा की कार्यशैली व तौर तरीके उसे अपने हिसाब से राजनीति करने की इजाजत नहीं देंगे। कुल मिलाकर आरती राव अब उस दौर में आ चुकी है जहां उसे अपने पिता की राजनीति वसीयत को सुरक्षित करने के लिए खुद को भी मजबूत करना होगा इसके लिए उसे जिंदाबाद करने वाले बाजारू कार्यकर्ता नहीं चिंता करने वाले समर्थक चाहिए।