– कायदे से नप का नाम बदलकर नाट्य एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम विभाग रखने का समय आ चुका है। कम से कम टैक्स के बदले मनोरंजन तो मिलेगा।
रणघोष खास. सुभाष चौधरी
शहर की जनता को हाथ जोड़कर कान पकड़कर नगर परिषद के अधिकारियों एवं नगर पार्षदों से माफी मांगनी चाहिए। जनता की दिन रात भलाई के लिए पार्षद और अधिकारी किस कदर एक दूसरे से लड़ते हैं। धरने पर बैठते हैं। मीडिया के सामने जमकर भड़ास निकालते हैं। यह बताने की जरूरत नहीं। अधिकारी एवं कर्मचारियों की हालत यह है कि शहर की चिंता में उन्हें नींद तक नहीं आती। कुछ तो डिप्रेशन में आकर छुटटी पर चले गए तो कुछ फटाफट विकास कराने के चक्कर में नियम कायदे भूलकर विजिलेंस की चपेट में आ गए। बड़े अधिकारियों की बात अलग है। उन्हें सवाल करने पर पार्षद गली मोहल्लों के बिगड़े हुए बच्चे लगते हैं। सोमवार को नप की मीटिंग में एकता कपूर सीरियल की स्टाइल में आरोप प्रत्यारोप का वहीं नाटक नई स्क्रिप्ट में नजर आया। डीएमसी सुभिता ढाका का वर्क स्टाइल पार्षदों को रास नहीं आया तो डीएमसी को पार्षदों का सवाल करना तौहीन लग रहा था। जनता ने वोट देकर पार्षद बनाए और अपनी कमाई से टैक्स चुकाकर कर्मचारी और अधिकारियों के वेतन की व्यवस्था कर रही है। वह इस तरह के नाटक को बार बार देखकर तंग आ चुकी है। वह थक चुकी है कि इस तरह का ड्रामा आखिर कब तक चलेगा। उसे चौतरफा क्यों मारा जा रहा है। रूटीन के काम के लिए धक्के खाने पड़ते हैं। विकास बजाय शहर में नजर आने के अधिकारी व कर्मचारियों के घरों एवं तौर तरीकों में ज्यादा नजर आता है। पार्षदों में कुछ ईमानदारी से नप पर लगे धब्बों को धोना चाहते हैं तो अधिकांश पीछे के दरवाजे से दाग लगाकर चले जाते हैं। नप की अलमारियों में घोटालों की फाइलें संडाध मार रही है। वह तभी खुलती है जब बड़े साहब एवं बड़े नेता का मिजाज बिगड़ जाए। मीडिया वालों के पास अब वे शब्द नहीं बचे जिसमें नप की मर्यादा सुरक्षित रह सके। एक बात हमेशा याद रखनी चाहिए। जो अधिकारी या कर्मचारी इस भ्रम में हैं कि वह अपनी मर्जी व अंदाज से डयूटी करेंगे, जनता परेशान रहे उसे कोई परवाह नहीं। वह याद रखे उसके घर का चुल्हा इसी जनता के टैक्स से जलता है। पार्षद जनता और सिस्टम के बीच की कड़ी है। उसे अनदेखा नहीं किया जा सकता लेकिन पार्षदों को भी अपनी लक्ष्मण रेखा तय करनी होगी। अगर ऐसा नहीं कर पाए तो नप का नाम बदलकर नाट्य एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम विभाग रख दीजिए कम से कम टैक्स के बदले मनोरंजन तो मिलेगा।