शिक्षित परिवार व उच्च शिक्षित दपंति ने दहेज रहित विवाह किया

इसके अलावा बेटी का बनवारा घोड़ी पर बैठा कर बाजे-गाजे के साथ निकाला गया


समाज में व्याप्त दहेज प्रथा तथा महिला असमानता को दूर करने के लिए समाज को संदेश देने का कार्य जिले के डहीना ब्लॉक के गांव लिसान तथा कंवाली गांव के दो परिवारों ने मिलकर दहेज रहित विवाह किया हैं। परिवार शिक्षित होने के साथ दपंति भी उच्च शिक्षित हैं। इतना ही नहीं बेटी ने घोड़ी पर बैठ कर बाजे-गाजे के साथ बनवारा निकाला। दहेज रहित व लडक़ी के घोड़ी पर बैठ कर बनवारा निकालने की लीक से हट कर प्रेरणादायक शुरू आत से सर्वत्र प्रशांसा हो रही हैं। कंवाली गांव के सतेन्दर यादव ने अपने बेटे देवेंद्र जो कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) में सहायक प्रवर्तन अधिकारी पद पर आसीन है । उसने अपने लग्न समारोह में केवल एक रुपया को ही स्वीकार कर दहेज प्रथा पर कुठाराघात किया है। लडक़ी के भाई अटेली मार्केट कमेटी में सचिव यदुराज यादव ने बताया कि शादी एक पवित्र बंधन है जो कि किसी पैसे लालच से दूषित नहीं होना चाहिए इसलिए उन्होंने पहले ही लडक़ी के परिवार को दहेज के लिए मना कर दिया था। उधर लिसान गांव की बेटी शीतल के पिताजी सुखबीर सिंह द्वारा बेटो की तरह बेटी का भी घुड़चढ़ी से बनवारा करवाकर गांव में नयी शुरुआत की है। बेटी केमस्ट्री विषय में नेट जेआरफ उर्तीण कर प्रतिस्पर्धा परीक्षाओं की तैयारी कर रही हैं। सुखबीर सिंह का कहना है कि उनके बेटी को कभी अपने बेटे से कम नहीं समझा तथा बेटी को बेटे के बराबर शिक्षित किया है तो शादी में बेटे की तरह बेटी को घुड़चढ़ी से कैसे रोक सकते थे। ये दोनों परिवार प्रगतिशील विचारों की प्रशंसा दोनों परिवारों के परिजन उदयभान पूर्व सरपंच, सूरत सिंह, धर्मपाल, वेदप्रकाश, जगदेव, उदयसिंह, दलबीर, ईश्वर सिंह, मार्केट कमेटी के सचिव यदुराज एवं अन्य गणमान्य लोगों द्वारा की गई है। इस प्रकार दहेज प्रथा तथा महिला असमानता को दूर करने का समाज को संदेश देने का प्रयास दोनों परिवार द्वारा सराहनीय कदम है। शीतल एवं देवेन्द्र की शादी सोमवार को होनी है ।

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