सीधी सपाट बात: राव इंद्रजीत सिंह की जीत में मोदी- भाजपा की कोई कहानी नही.. बात खत्म

रणघोष खास. सुभाष चौधरी

आमतौर पर जीत के बाद नेता इसका श्रेय उन लोगों को भी देते हैं जिन्होंने किसी ना किसी कारण से साथ नही दिया। इस बार के लोकसभा चुनाव में गुरुग्राम संसदीय सीट से कम मतों से विजयी हुए भाजपा प्रत्याशी राव इंद्रजीत सिंह ने जीत का संपूर्ण आभार केवल अपने समर्थकों के प्रति जताया है। राव के भाषण पर गौर करे तो अगर उनके समर्थक विशेषतौर से गांवों में पूरी तरह से सक्रिय नही होते तो वह चुनाव पूरी तरह से हार जाते। अब सवाल यह उठता है की क्या राव के समर्थक भाजपाई है या नही है। राव ने कहा उन्हें टिकट भी समर्थकों की वजह से मिली है। राव के भाषण में पीएम नरेंद्र मोदी व भाजपा संगठन पूरी तरह से गायब था। इसलिए उन्होंने भिवानी- महेंद्रगढ़ सीट पर विजयी हुए चौधरी धर्मबीर सिंह की जीत का श्रेय भी खुद ले लिया जबकि वहा चुनाव प्रचार के अंतिम दिन पीएम नरेंद्र मोदी ने चुनावी जनसभा भी की थी।

राव के इन तेवरों से यह साफ नजर आ रहा है की वे अपने अपनी 2013 की उस स्क्रिप्ट को दोहराने जा रहे हैं जब कांग्रेस पर हमला करते समय भाजपा में शामिल हो गए थे। याद करिए राव को जब भी राजनीति में कोई बड़ा निर्णय लेना होता है या दबाव बनाना होता है वे अपने समर्थकों की फौज के साथ एक साथ हमला कर डालते हैं। राव ने अपने भाषण में समाज के दो तीन समुदाय का सहयोग नही मिलने का दर्द भी बयां किया। उनका इशारा एससीएसटी एवं जाट समुदाय पर था। इसलिए लगे हाथ उन्होंने मौके पर मौजूद हरियाणा के कैबिनेट  मंत्री डॉ. बनवारीलाल पर भी  कटाक्ष कर दिया। दरअसल राव समझ चुके हैं की देश में पीएम नरेंद्र मोदी का जादू जितना चलना था वह चल चुका। भाजपा संगठन पूरे देश में अंदर से बिखर चुका है। इसलिए अनेक सीटों पर संगठन की सेना मूक दर्शक बनकर तमाशा देखती रही। इसलिए राव ने अपने समर्थकों में जबरदस्त ऊर्जा भरते हुए अपनी जीत का संपूर्ण श्रेय उन्हें दे दिया। अब सवाल यह उठता है की राव जीतने के बाद भी भाजपा से पूरी तरह से खफा क्यों रहे।  क्या अब उनकी जीत से मोदी गांरटी का फॉरमेट पूरी तरह से गायब हो चुका है। क्या सचमुच में राव इंद्रजीत सिंह को जितने वोट मिले हैं यह उनकी 50 साल की राजनीति तपस्या का प्रतिफल है। अगर यह सच है तो राव ने अपने भाषण में मोदी के नाम पर ही वोट क्यों मांगे। क्या राव चुनाव के अंतिम दौर में यह समझ चुके थे की इस सीट पर उन्हें मोदी गारंटी के नाम पर फायदा कम नुकसान ज्यादा होने जा रहा है। इसलिए उन्होंने यह भी माना की 400 पार का नारा उन्हें शुरू से ही हजम नही हो रहा था। यह काफी हद तक सही भी है। इस सीट के  कुछ हिस्से विशेष तौर से मेवात की तीन विधानसभा सीटों पर  उनका एक तरह से सफाया हो गया। इतना ही नही एससीएसटी एव जाट वोटर भी भाजपा के शीर्ष नेताओं की संविधान एवं किसानों की एमएसपी समेत अनेक मांगों पर की गई विवादित टीका टिप्पणी से काफी आक्रोशित हो चुके थे और उन्होंने खुलकर भाजपा के खिलाफ मतदान किया। जिसकी वजह से एकतरफा नजर आने वाली यह सीट भाग्य के भरोसे कम मतों से राव इंद्रजीत सिंह की इज्जत को किसी तरह बचा गईं। राव समझ चुके हैं की चार महीने बाद विधानसभा चुनाव आने वाले हैं। अगर यही स्थिति रही तो भाजपा के नाम पर उनकी राजनीति कही सिमट कर ना रह जाए । इसलिए उन्होंने बेहद ही समझदारी एवं राजनीति चतुराई से अपने भाषण से एक तीर से कई निशाने साध दिए। पहला भाजपा पर जबरदस्त दबाव बना दिया की वह समय रहते दक्षिण हरियाणा में उनके हिसाब से चलने का मन बना ले। नही तो वे बड़ा फैसला लेने में कोई देरी नही दिखाएगे। जाहिर है राव अपनी बेटी आरती राव के अलावा अपने समर्थकों को भी टिकट दिलाने का पूरा खाका इस चुनाव के बाद हाईकमान के सामने रखने जा रहे हैं। क्योंकि दक्षिण हरियाणा में अभी तक वे ही भाजपा का सबसे बड़ा चेहरा है। राव भांप चुके हैं की देश में अब एनडीए की सरकार है जिसमें भाजपा का अपना पूर्ण बहुमत नही है। एक एक सीट के लिए वह मोहताज नजर आ रही है। दूसरा हरियाणा में भाजपा की स्थिति आऊट ऑफ कंट्रोल होती जा रही है। जिसकी शुरूआत पांच लोकसभा सीटें खोकर हो चुकी है। कहने को यह सबसे बड़ा संगठन है है लेकिन अंदरखाने बिखराव जबरदस्त बन चुका है। इसी वजह से भाजपा हरियाणा में राम भरोसे तीन सीटें तो हजारों में जीत पाईं। राव यह जान चुके हैं की भाजपा के खिलाफ चुनाव पूरी तरह से जनता ने लड़ा है जिसका भरपूर फायदा विरोधियों को मिला है और यही हालात रहे तो आगे भी हरियाणा चुनाव में बहुत बड़ा खामियाजा उठाना पड़ सकता है। इतनी जल्दी स्थिति को बदल पाना संभव नही है। ऐसे में दक्षिण हरियाणा जहां से भाजपा को सबसे ज्यादा आक्सीजन मिलती रही है वह भी मिलना बंद हो जाएगी। वे भांप चुके हैं की ऐसे में भाजपा हाईकमान पूरी तरह से उन नेताओं  के दबाव में रहेगा जो जमीनी तौर पर अपनी हैसियत रखते हैं। राव ने अपने शब्दों से भाजपा से नाराज चल रहे समुदायों को भी मैसेज दिया है की वे उन्हें पूरी तरह से भाजपाई नही माने। वे उनके  लिए भी भाजपा से टकराते रहे हैं। इसलिए बेशक वे भाजपा से दूर चले जाए लेकिन उनकी आवाज पर कम से कम साथ जुड़े रहे। इसलिए राव ने अपने समर्थकों को अभी से विधानसभा चुनाव में पूरी  तरह से जुट जाने को भी कह दिया है और बेटी के चुनाव लड़ने की घोषणा भी कर दी है।  कुल मिलाकर राव के बदलते तेवरों ने भाजपा की हैसियत बता दी है की वे दक्षिण हरियाणा में उनके हिसाब से चलने का मन बना ले नही तो वे तो अपनी मन की बात कह चुके हैं जिसमें कोई किंतु परंतु नही है।