134 ए को लेकर क्या है हाईकोर्ट मामले का सच..

 प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन- शिक्षा विभाग में झूठ कौन बोल रहा है


रणघोष अपडेट. रेवाड़ी


नियम 134 ए के तहत जरूरतमंद परिवारों के बच्चों का प्राइवेट स्कूलों में दाखिला कराने की प्रक्रिया के तहत शिक्षा विभाग संबंधित स्कूलों को एक निर्धारित मानदेय भी देता है। प्राइवेट स्कूलों का दावा है कि उन्हें पिछले 7 सालों से एक रुपया भी नहीं मिला है जबकि शिक्षा अधिकारी दावा कर रहे हैं कि 2017 में यह राशि स्कूलों के खाते में डलवाई जा चुकी है। इस विवाद के बीच एक ओर नया मामला सामने आया है। हरियाणा प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन ने अपने लिखित बयान में कहा है कि शिक्षा विभाग हर साल झूठ बोल रहा है कि 134 ए के तहत जितने भी बच्चों के दाखिले हो रहे हैं उसके एवज में एक तय राशि उन्हें भेजी जा रही है जबकि असल में आती कुछ भी नहीं। इससे परेशान होकर निजी स्कूल पंजाब- हरियाणा हाईकोर्ट में केस दायर कर चुके हैं। जिसकी अगली सुनवाई 28 फरवरी 2022 है। ऐसे में शिक्षा विभाग प्राइवेट स्कूलों पर दाखिला करने के लिए दबाव नहीं बना सकता। उधर मौलिक शिक्षा निदेशालय ने 21 दिसंबर को जारी पत्र में कहा है कि कोर्ट में हरियाणा प्रोग्रेसिव स्कूल कांफ्रेस वर्सीज स्टेट आफ हरियाणा  मामले में स्पष्टीकरण दिया गया था कि नियम 134-ए के तहत वर्ष 2021-22 के दाखिले पर स्टे नहीं माना जाए तथा दाखिले हेतु निदेशालय द्वारा पूर्व में दिए गए निर्देशों का पालन किया जाए। ऐसे में सवाल उठता है कि दोनों ही सरकारी और गैर सरकारी शिक्षण संस्थाओं में सच कौन बोल रहा है। कुल मिलाकर इस लड़ाई में ना तो शिक्षा विभाग के अधिकारियों के बच्चों  का भविष्य दांव पर लग रहा है और ना ही प्राइवेट स्कूल की सेहत पर असर पड़ रहा है। खामियाजा उन बच्चों को भुगतना पड़ रहा है कि जिसका कसूर यह है कि उनका परिवार आर्थिक चुनौतियों से लड़ता हुआ आगे बढ़ रहा है। वह मजबूर ओर बेबस है। इसलिए खामियाजा भी उसे ही भुगतना पड़ेगा।


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