मिडल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच एक बड़ा खुलासा सामने आया है। रिपोर्ट के अनुसार, Iran ने China के जासूसी सैटेलाइट का इस्तेमाल करते हुए अमेरिकी सैन्य ठिकानों की रेकी की और बाद में उन पर सटीक हमले किए।
यह दावा Financial Times की एक रिपोर्ट में किया गया है, जिसने वैश्विक राजनीति में हलचल मचा दी है।
कैसे किया गया सैटेलाइट का इस्तेमाल?
रिपोर्ट के अनुसार, Iran ने TEE-01B सैटेलाइट्स का इस्तेमाल किया। इन सैटेलाइट्स को चीन की कंपनी Earth Eye ने तैयार किया है।
- इन सैटेलाइट्स की सेवाएं ईरान की एयरोस्पेस फोर्स ने खरीदीं
- लॉन्च के कुछ ही दिनों बाद ईरान ने इनका उपयोग शुरू कर दिया
- सैटेलाइट्स के जरिए अमेरिकी सैन्य ठिकानों की निगरानी की गई
- तस्वीरें और रणनीतिक डेटा इकट्ठा किया गया
बताया गया है कि यह पूरी प्रक्रिया 2024 के आखिरी महीनों में की गई थी।
लीक दस्तावेजों से हुआ खुलासा
Financial Times ने दावा किया है कि यह जानकारी ईरानी सेना के लीक दस्तावेजों के अध्ययन से सामने आई है।
रिपोर्ट के मुताबिक:
- ईरानी कमांडरों ने सैटेलाइट को खास तौर पर अमेरिकी ठिकानों की निगरानी का निर्देश दिया
- सैटेलाइट से मिली तस्वीरों का इस्तेमाल हमलों की रणनीति बनाने में किया गया
जवाबी हमलों में हुआ इस्तेमाल
जब 28 फरवरी को United States और Israel ने ईरान पर हमले किए, तो उसके बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई की।
इन हमलों में:
- इराक
- कतर
- सऊदी अरब
जैसे देशों में स्थित अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया गया।
चीन ने आरोपों को किया खारिज
इस पूरे मामले पर Ministry of Foreign Affairs of China ने सख्त प्रतिक्रिया दी है।
चीन के प्रवक्ता Lin Jian ने कहा:
- ये आरोप पूरी तरह निराधार हैं
- अमेरिका टैरिफ लगाने के बहाने ऐसे आरोप गढ़ रहा है
- अगर टैरिफ बढ़ाया गया तो चीन भी जवाब देगा
ट्रंप का पुराना बयान भी चर्चा में
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump पहले भी चीन पर आरोप लगा चुके हैं कि उसने ईरान को हथियारों के जरिए मदद की है।
उन्होंने कहा था कि:
- अतिरिक्त 50% टैरिफ की योजना मुख्य रूप से चीन को ध्यान में रखकर बनाई गई है
- उनका आगामी चीन दौरा भी रणनीतिक दबाव का हिस्सा हो सकता है
सैटेलाइट की पहुंच कितनी बड़ी?
रिपोर्ट के अनुसार:
- इन चीनी सैटेलाइट्स की पहुंच एशिया के बड़े हिस्से तक है
- लैटिन अमेरिका समेत कई अन्य क्षेत्रों को भी कवर किया जा सकता है
यानी यह तकनीक सिर्फ एक क्षेत्र तक सीमित नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर निगरानी करने में सक्षम है।